
अस्पताल में बच्चों का चल रहा इलाज
Balaghat News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी अंचल में कुपोषण और बीमारियों से बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद अब जिले में कुपोषण की तस्वीर भी सामने आई है. महिला एवं बाल विकास विभाग के अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 1 लाख 21 हजार 892 बच्चों की जांच की गई, जिनमें 27 हजार 839 बच्चे कुपोषित पाए गए. इनमें 3,741 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में हैं. यानी जांचे गए बच्चों में करीब हर चौथा बच्चा कुपोषण की श्रेणी में है.
बैगा बहुल इलाकों में कुपोषण के साथ मलेरिया, खसरा और दूसरी बीमारियां भी बच्चों के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं. हाल के दिनों में इन इलाकों में 32 से ज्यादा बच्चों की मौत की बात सामने आई है. प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कई मौतों के पीछे मलेरिया समेत अन्य बीमारियों को वजह बताया है, लेकिन कुपोषण और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी गंभीर कारक माना जा रहा है.
3 साल की बच्ची का वजन सिर्फ साढ़े चार किलो
बालाघाट के बोंदारी गांव में सुखचंद्र धुर्वे की तीन साल की बेटी प्रीति धुर्वे की मौत का मामला भी कुपोषण की गंभीर तस्वीर सामने लाता है. अधिकारियों के मुताबिक बच्ची कुपोषित थी और उसका वजन महज करीब साढ़े चार किलो था. यह मामला बताता है कि आदिवासी अंचलों में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य की चुनौती कितनी गंभीर हो सकती है.
बैहर क्षेत्र में 1,111 बच्चे अति कुपोषित
महिला एवं बाल विकास विभाग के मुताबिक बैहर विधानसभा क्षेत्र में ही 1,111 बच्चे अति कुपोषित पाए गए हैं. इनमें बैहर ब्लॉक के 560 और बिरसा ब्लॉक के 551 बच्चे शामिल हैं. विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के अति कुपोषित बच्चों में करीब 29.69 प्रतिशत इसी क्षेत्र से हैं. वहीं, क्षेत्रीय विधायक संजय उइके की ओर से जारी जुलाई 2026 के आंकड़ों में कुपोषण की तस्वीर अलग तरीके से सामने आती है. उनके मुताबिक 1 लाख 15 हजार 828 बच्चों की जांच में 34,976 बच्चे उम्र के हिसाब से कम लंबाई, 26,640 बच्चे अंडरवेट और 9,266 बच्चों की लंबाई के अनुपात में वजन कम पाया गया.
टेक होम राशन और पोषण पर भी सवाल
विधायक ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए टेक होम राशन यानी टीएचआर को लेकर भी सवाल उठाए हैं. उनका दावा है कि मार्च से टीएचआर बंद है और इससे पहले मिलने वाले राशन में पर्याप्त पोषक तत्व नहीं थे. हालांकि बोंदारी की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्यारी यादव के मुताबिक मई से स्वयं सहायता समूह की मदद से दलिया के पैकेट बांटे जा रहे हैं.
सरकारी आंकड़ों पर सवाल
कुपोषण के बीच सरकारी पोर्टल पोषण ट्रैकर में दर्ज आंकड़े भी सवालों के घेरे में हैं. कई केंद्रों पर बच्चों की दैनिक उपस्थिति, नाश्ता और गर्म पका भोजन वितरण 100 प्रतिशत दर्ज किया गया है. यहां तक कि सितंबर-अक्टूबर 2025 के आंकड़ों में सरकारी अवकाश वाले दिन भी कुछ आंगनवाड़ी केंद्रों पर 100 प्रतिशत उपस्थिति और भोजन वितरण दर्ज होने का दावा किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि कई अभिभावक बच्चों को आंगनवाड़ी के बजाय खेतों और जंगलों में अपने साथ ले जाते हैं. ऐसे में जमीनी स्थिति और पोषण ट्रैकर के आंकड़ों के बीच अंतर की जांच जरूरी है.
प्रशासन का दावा-घर-घर पहुंच रहे अधिकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र कुमार सुंदरियाल के मुताबिक कुपोषण के कई कारण हैं और विभाग समग्र रूप से काम कर रहा है. कुपोषित बच्चों को भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराने के साथ परिवारों को घर पर पौष्टिक आहार देने के लिए जागरूक किया जा रहा है. जरूरत पड़ने पर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र यानी एनआरसी भेजा जाता है.
बच्चों की मौत के बाद अब प्रशासनिक और स्वास्थ्य अमला प्रभावित गांवों में पहुंच रहा है. घर-घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की निगरानी का दावा किया जा रहा है. हालांकि, मौतों के बाद सामने आए कुपोषण के आंकड़े और पोषण व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल यह बताते हैं कि बैगा अंचल में सरकारी योजनाओं की जमीनी निगरानी और उनके असर की गंभीरता से समीक्षा की जरूरत है.

पंकज डहरवाल
पंकज डहरवाल मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के गांव चिखला बांध के रहने वाले हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा चिखला बांध में ही संपन्न हुई. वर्ष 2013 में न्यूज़ पेपर नवभारत में रिपोर्टर के तौर पर पत्रकारिता में क्षेत्र में प्रवेश किए. नवभारत न्यूज़ पेपर में उन्होंने 10 वर्ष तक सेवा दी. इसके बाद वो TV9 भारतवर्ष से जुड़ गए. जिले की हर खबर एक नए अंदाज और नए कलेवर में पहुंचाने की कोशिश करते हैं.
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