MP के 22 जिलों में आज बूंदाबांदी होगी: 5 दिन से तेज बारिश नहीं; 16 जुलाई से नया सिस्टम, भारी बरसात के आसार - Bhopal News
भोपाल31 मिनट पहले
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मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार थम गई है। करीब 60% हिस्से से मानसून के बादल गायब है। इस वजह से प्रदेश में अगले 5 दिन तक कहीं भी भारी या अति भारी बारिश के आसार नहीं है। IMD (मौसम केंद्र) की माने तो 16 जुलाई से नया सिस्टम एक्टिव हो सकता है। इससे तेज बारिश के संकेत है।
इससे पहले प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा। सोमवार को 22 जिले- सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और आलीराजपुर में बादल और हल्की बारिश के आसार है।
कहीं भी तेज बारिश नहीं, रिमझिम होती रहेगी मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता में फिलहाल कमी देखने को मिल रही है। इस वजह से पिछले 4-5 दिन से प्रदेश में कहीं भी भारी या अति भारी बारिश नहीं हुई है। अगले कुछ दिन तक रिमझिम बारिश जरूर होती रहेगी। 16 जुलाई से ज्यादा असर दिखेगा।
मानसून क्यों हुआ कमजोर? एक्सपर्ट नायक ने बताया, वर्तमान में मानसून को एक्टिव करने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ गई हैं अथवा उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर चला गया है। यही कारण है कि अधिकांश क्षेत्रों में केवल बादल छाए रहने और हल्की फुहारों जैसी स्थिति बनी हुई है।
हवा की दिशा इस तरह से बनी हुई है।
अब उम्मीद बंगाल की खाड़ी से एक्सपर्ट नायक ने बताया कि 13 से 19 जुलाई के दौरान उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण यानी, साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम बनने का अनुमान है। यदि यह सिस्टम निम्न दाब क्षेत्र में बदला तो प्रदेश में फिर से तेज बारिश का दौर शुरू हो जाएगा।
मौसम विभाग का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में 3 नए सिस्टम बन रहे हैं, अगर इनमें से एक भी बंगाल की खाड़ी तक पहुंच गया तो मानसून फिर से एक्टिव हो सकता है।
बारिश का आंकड़ा सिर्फ 1 प्रतिशत ज्यादा प्रदेश में पिछले 5 दिन से भारी बारिश नहीं हुई है। इस वजह से 30 प्रतिशत वाला आंकड़ा अब 1 प्रतिशत पर आकर ठहर गया है। रविवार की बात करें तो प्रदेश में अब तक सिर्फ एक प्रतिशत बारिश ही ज्यादा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5) बारिश हो चुकी है, जो सामान्य बारिश के 239.8 मिमी (9.4) से 1% अधिक है। हालांकि, यह कोटे की 25 प्रतिशत है।
रविवार को मध्य प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों से बादल गायब नजर आए।
मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम
जून में कम बारिश, जुलाई में बढ़ा मौसम विभाग के अनुसार, जून में कम बारिश हुई है, लेकिन जुलाई से काफी उम्मीदें हैं। इस महीने पूरे मानसून की एक तिहाई बारिश का ट्रेंड है। जैसे- भोपाल में 39 इंच सामान्य बारिश है तो 14 इंच बारिश जुलाई में होती है। बड़े शहरों में जबलपुर ही ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा 17 इंच से ज्यादा बारिश होती है। जुलाई के महीने में ही प्रदेश में कोटे की 40 प्रतिशत तक बारिश होती है।
प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।
इन जिलों में सामान्य से कम/ज्यादा बारिश
कम बारिश वाले जिले- अनूपपुर, बालाघाट, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, रीवा, सागर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, दतिया, धार, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन और शिवपुरी।
भोपाल में इस सीजन में अब तक 13.1 इंच पानी गिरा है।
देवास में 18 इंच पानी गिरा, भोपाल-इंदौर भी बेहतर प्रदेश में देवास सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला है। यहां 102 प्रतिशत ज्यादा पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के आंकड़ों की माने तो यहां अब तक 18 इंच बारिश हो चुकी है। इंदौर-सीहोर में 14 इंच बरसात हुई है। हरदा में 15 इंच पानी गिर चुका है।
भोपाल में 13.1 इंच पानी गिरा है। आगर-मालवा, अशोकनगर, बैतूल, बुरहानपुर, गुना, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन, विदिशा, अनूपपुर, बालाघाट, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, मंडला, पांढुर्णा, पन्ना, सागर, सिवनी और उमरिया जिले भी बेहतर स्थिति में है। आलीराजपुर में सबसे कम सवा 2 इंच ही बारिश हुई है, जो सामान्य से 74 प्रतिशत कम है।
जुलाई में MP के 5 बड़े शहरों में ऐसा ट्रेंड
इंदौर में 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड इंदौर की बात करें तो 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 27 जुलाई 1913 में हुई थी। वर्ष 1973 को पूरे महीने 30.5 इंच पानी गिरा था। बारिश के चलते यहां भी तापमान में गिरावट देखने को मिलती है।
इंदौर में महीने की एवरेज बारिश 12 इंच है। एवरेज 13 दिन यहां बारिश होती है।
भोपाल में 41 इंच बारिश का रिकॉर्ड राजधानी भोपाल में जुलाई में खूब बारिश होती है। यहां एक ही महीने में 1031.4 मिमी यानी 41 इंच के करीब बारिश होने का रिकॉर्ड है। यह साल 1986 को हुई थी। 22 जुलाई 1973 को एक ही दिन में 11 इंच बारिश हुई थी, जो अब तक का रिकॉर्ड है।
भोपाल में बारिश के दिनों की बात करें तो जुलाई महीने में एवरेज 15 दिन बारिश होती है। यानी, हर दूसरे दिन पानी बरसता है। महीने की एवरेज बारिश 367.7 मिमी यानी 14.4 इंच है। बारिश के चलते दिन का तापमान 30 और रात में पारा 25 डिग्री से कम रहता है।
भोपाल में जुलाई महीने में एवरेज 15 दिन बारिश होती है।
जबलपुर में सबसे ज्यादा बारिश होने का रिकॉर्ड चारों बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा बारिश होती है। वर्ष 1930 में करीब 45 इंच पानी बरसा था, जबकि 30 जुलाई 1915 को 24 घंटे की सर्वाधिक 13.5 इंच बारिश हुई थी। पिछले साल जुलाई में 13 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। 2013 और 2016 में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।
जबलपुर में जुलाई की सामान्य बारिश 17 इंच है। महीने में 15 से 16 दिन पानी बरसता है।
ग्वालियर में 6 बार 8 इंच से कम बारिश भोपाल, इंदौर और जबलपुर की तुलना में ग्वालियर में सबसे कम बारिश होती है। पिछले 10 साल में 6 बार ऐसा हुआ, जब 8 इंच से कम पानी गिरा हो, जबकि यहां की एवरेज बारिश 9 इंच के करीब है। ग्वालियर में वर्ष 1935 में महीने की सबसे ज्यादा बारिश हुई थी। तब 623.3 मिमी यानी 24.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश की बात करें तो 12 जुलाई 2015 में 190.6 मिमी यानी साढ़े 7 इंच पानी बरसा था। ग्वालियर में जुलाई के महीने में एवरेज 11 दिन बारिश होती है।
उज्जैन में जमकर होती है बारिश प्रदेश के अन्य शहरों की तरह उज्जैन में भी जुलाई में जमकर बारिश होती है। कोटे की करीब 40 प्रतिशत बारिश इसी महीने हो जाती है।
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