जबलपुर, 3 अगस्त 2026: MP High Court OBC Reservation Hearing Updates 2026: कोर्ट में आरक्षण सीमा पर तीखी बहस जबलपुर में 3 अगस्त 2026 को Madhya Pradesh High Court Special Division Bench के समक्ष ओबीसी आरक्षण के समर्थन में 13वें दिन की सुनवाई संपन्न हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू और तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद व वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने अपना पक्ष रखा। इसके बाद खंडपीठ के निर्देश पर वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बहस शुरू की। ठाकुर ने सरकार द्वारा नियुक्त अधिवक्ता के.एम. नटराज के उस तर्क का खंडन किया जिसमें कहा गया था कि सरकार के पास ओबीसी की पहचान का कोई स्पष्ट तंत्र (mechanism) नहीं है।
MP Reservation Percentage and Caste Population Data
बहस के दौरान अधिवक्ता ठाकुर ने प्रदेश की जनसंख्या के आंकड़े पेश करते हुए सरकार की नीतियों पर प्रहार किया। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में SC 15.6%, ST 21.14% और OBC 51% है, जो कुल मिलाकर 87.7% आरक्षित वर्ग की आबादी बनाती है, जबकि शेष 12.3% सामान्य वर्ग है। उन्होंने तर्क दिया कि 2 जुलाई 2019 को 10% EWS आरक्षण लागू करके 50% की सीमा पहले ही तोड़ी जा चुकी थी, जिसके बाद 14 अगस्त 2019 को ओबीसी के लिए 13% अतिरिक्त आरक्षण देकर कुल 27% का प्रावधान किया गया। अधिवक्ता ने सवाल उठाया कि जब 12.3% सामान्य वर्ग (जिसमें मात्र 1.5% असल EWS आबादी है) को 10% आरक्षण दिया जा रहा है, तो 51% ओबीसी आबादी को 27% आरक्षण देने पर आपत्ति क्यों है?
OBC Creamy Layer vs EWS Income Limit Dispute
अदालत में Income limit for OBC creamy layer vs EWS criteria पर भी गंभीर बहस हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि प्रदेश में 8 लाख रुपये सालाना कमाने वाला ओबीसी व्यक्ति Creamy Layer में आता है और उसे आरक्षण के लाभ से वंचित कर दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर, 8 लाख रुपये कमाने वाले सामान्य वर्ग के व्यक्ति को 'गरीब' (EWS) मानकर 10% आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। ठाकुर ने इसे सरकार की "दोहरी नीति" करार देते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 15(6) और 16(6) के अनुसार EWS का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए, लेकिन सरकार इसे त्रुटिपूर्ण ढंग से लागू कर रही है।
Historical and Religious Context of OBC Shudra Status
बहस को ऐतिहासिक मोड़ देते हुए अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने ओबीसी जातियों की पहचान पर प्रकाश डाला। उन्होंने मनु संहिता, भृगु संहिता, महाभारत और रामायण जैसे धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए बताया कि ओबीसी की अधिसूचित जातियाँ 'शूद्र वर्ण' के अंतर्गत आती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि Mahajan Commission report on OBC identification ने इन ग्रंथों का अवलोकन कर 92 जातियों को ओबीसी सूची में जोड़ा था। उन्होंने बताया कि इन जातियों (जैसे कृषक, शिल्पकार, नाई, धोबी आदि) को हजारों वर्षों तक शिक्षा और संपत्ति के अधिकार से वंचित रखकर केवल सेवा और दासता तक सीमित रखा गया था।
MP High Court Next Hearing Date on Reservation
आज की कार्यवाही समय समाप्त होने के कारण रोक दी गई। अब इस संवेदनशील मामले की regular hearing कल दिनांक 4 अगस्त 2026 को दोपहर 2:30 बजे से फिर शुरू होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह इन सभी मुद्दों पर निरंतर सुनवाई जारी रखेगा ताकि आरक्षण के इस जटिल विवाद का न्यायसंगत समाधान निकाला जा सके।
.webp)