
नॉर्दन सी-रूटImage Credit source: Getty Images
भारत और रूस के बीच व्यापारिक संपर्क को बढ़ाने के लिए अब आर्कटिक के Northern Sea Route (NSR) को विकसित करने पर काम तेज हो सकता है. रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने रूसी समाचार एजेंसी Interfax को बताया है कि दोनों देश 2026 के अंत तक NSR पर विकास सहयोग को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) कर सकते हैं.
मंटुरोव के मुताबिक, समझौते के बाद 2027 में भारत और रूस के बीच Northern Sea Route पर एक संयुक्त पायलट यात्रा की योजना है. यह यात्रा ऐसे समय होगी जब दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों की 80वीं वर्षगांठ मना रहे होंगे.
रूस सालों से इसे विकसित करने पर दे रहा जोर
रूस की दीर्घकालिक योजना इस समुद्री मार्ग के जरिए भारत और रूस के बीच सालाना 50 लाख टन तक माल ढुलाई की क्षमता विकसित करने की है. हालांकि, यह तत्काल शुरू होने वाली 50 लाख टन की ढुलाई नहीं है, बल्कि रूस द्वारा बताई गई long-term cargo target है.
Northern Sea Route रूस के आर्कटिक तट के साथ गुजरने वाला समुद्री मार्ग है, जो यूरोप और एशिया के बीच पारंपरिक समुद्री व्यापार मार्गों के मुकाबले एक वैकल्पिक कनेक्टिविटी उपलब्ध करा सकता है. रूस पिछले कुछ सालों से इस मार्ग को अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई के लिए विकसित करने पर जोर दे रहा है.
भारत के लिए इस ट्रेड रूट का क्या है महत्व?
भारत के लिए इसका महत्व इस बात में है कि रूस के साथ कनेक्टिविटी का दायरा अब पारंपरिक समुद्री मार्गों से आगे बढ़कर Arctic shipping और logistics cooperation तक पहुंच रहा है. यह भविष्य में दोनों देशों के बीच माल ढुलाई के लिए एक अतिरिक्त समुद्री विकल्प उपलब्ध करा सकता है.
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भारत-रूस आर्थिक संबंधों में ऊर्जा के अलावा अन्य क्षेत्रों में व्यापार और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर है. Northern Sea Route के जरिए सहयोग बढ़ने से logistics, shipping और supply-chain connectivity इस साझेदारी का नया हिस्सा बन सकते हैं.
रूस ने MoU और पायलट यात्रा का रखा प्रस्ताव
महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी MoU पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं और 50 लाख टन की वार्षिक ढुलाई भी तत्काल उपलब्ध क्षमता नहीं है. फिलहाल रूस की ओर से 2026 के अंत तक MoU और 2027 में pilot voyage की योजना सामने रखी गई है. आगे की व्यावहारिक क्षमता, cargo mix और नियमित संचालन इस सहयोग की अगली अवस्था में तय होंगे.
तेल और गैस से आगे बढ़कर भारत-रूस अब आर्कटिक के रास्ते व्यापारिक कनेक्टिविटी तलाश रहे हैं. 2026 में MoU और 2027 में पहला संयुक्त pilot voyage इस दिशा में अगला कदम हो सकता है.

शिवांग माथुर
शिवांग माथुर टीवी 9 भारतवर्ष में एसोसियेट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं.
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