July 18, 2026

Monsoon Diet Tips: मानसून में दही खाना फायदेमंद होगा छाछ पीना रहेगा बेस्ट, आयुर्वेद से जानें खान-पान से जुड़ी जरूरी सलाह

हेल्थ

  • Authored by: गुलशन कुमार
  • Updated Jul 18, 2026, 08:19 AM IST

Monsoon Diet Tips: मानसून में खान-पान को लेकर अक्सर सावधान रहने की सलाह दी जाती है। आज हम आपको आयुर्वेद के अनुसार बताएंगे कि मानसून में किसे दही खानी चाहिए और किसके लिए छाछ का सेवन फायदेमंद होगा।

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मानसून में दही खाना फायदेमंद या छाछ?

Monsoon Diet Tips: मानसून अपने साथ ठंडक और राहत तो लेकर आता है, लेकिन यही मौसम पाचन संबंधी समस्याओं, वायरल संक्रमण और पेट के रोगों का खतरा भी बढ़ा देता है। आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में जठराग्नि (पाचन शक्ति) कमजोर हो जाती है। ऐसे में जो खाना गर्मियों में लाभदायक लगता है, वही बारिश में हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होता है।

दही और छाछ दोनों ही दूध से बनने वाले प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ हैं, लेकिन मानसून में इनका प्रभाव एक जैसा नहीं होता है। कई लोग रोज दही खाते हैं, जबकि कुछ लोग छाछ को अधिक सुरक्षित विकल्प मानते हैं। सवाल यह है कि बारिश के मौसम में किसे दही खाना चाहिए और किसके लिए छाछ ज्यादा फायदेमंद होगी? आइए आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान की मदद से समझते हैं मानसून में दही और छाछ (Curd vs Buttermilk) दोनों में से क्या फायदेमंद है।

मानसून में दही खाने को लेकर क्या कहता है आयुर्वेद

आयुर्वेदाचार्य वैद्य के.पी, सिंह, के अनुसार, दही को पौष्टिक आहार माना गया है, लेकिन वर्षा ऋतु में इसका सेवन सावधानी के साथ करने की सलाह दी जाती है। दही का स्वभाव गुरु (भारी), अम्ल (खट्टा) और कफ बढ़ाने वाला माना जाता है। यदि इसे गलत समय या अधिक मात्रा में खाया जाए तो यह पाचन पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। क्योंकि बारिश के मौसम में हमारा पाचन थोड़ा कमजोर हो जाता है, इसलिए मानसून में दही का सेवन फायदेमंद नहीं माना जाता है।

मानसून में रात के समय दही खाने से बचना चाहिए। यदि दही खाना ही हो तो दिन के भोजन में सीमित मात्रा में लें और उसमें काली मिर्च, भुना जीरा या सेंधा नमक मिलाना बेहतर माना जाता है।

किन लोगों को मानसून में दही नहीं खाना चाहिए?

बारिश के मौसम में कुछ लोगों को दही कम या बिल्कुल नहीं खानी चाहिए।

  • बार-बार सर्दी, खांसी या गले में खराश रहने वाले लोग।
  • कफ प्रकृति वाले लोग।
  • जिन्हें साइनस या एलर्जी की समस्या रहती है।
  • जिनका पाचन कमजोर रहता है।
  • जिन्हें बार-बार गैस, अपच या पेट फूलने की शिकायत होती है।

मानसून में छाछ का सेवन ज्यादा फायदेमंद

आयुर्वेदाचार्य वैद्य के.पी, सिंह, के अनुसार, आयुर्वेद में छाछ को 'तक्र' कहा गया है और इसे पाचन के लिए श्रेष्ठ पेय माना गया है। छाछ दही की तुलना में हल्की होती है और इसमें फैट भी कम होता है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के लिए लाभकारी हो सकते हैं। इसमें भुना जीरा, काला नमक, अदरक या पुदीना मिलाकर बनाई गई छाछ न केवल स्वाद बढ़ाती है बल्कि पाचन को भी सहारा देती है। यही कारण है कि आयुर्वेद मानसून में दही की जगह छाछ का सेवन करने की सलाह देता है।

आधारदहीछाछ
पाचनअपेक्षाकृत भारी, पचने में अधिक समय ले सकती हैहल्की और सुपाच्य, पाचन में सहायक
वसा (Fat)अपेक्षाकृत अधिककम
कफ पर प्रभावकफ बढ़ा सकती है, खासकर अधिक मात्रा या रात मेंअपेक्षाकृत कम, मसाले मिलाकर लेने पर अधिक संतुलित
मानसून में सेवनसीमित मात्रा में और दिन के समयअधिक उपयुक्त, विशेषकर दोपहर के भोजन के साथ
सेवन का समयदोपहर के भोजन मेंदोपहर या भोजन के बाद
आयुर्वेदिक प्रकृतिगुरु (भारी) और अम्ल (खट्टा)लघु (हल्की) और पाचन को सहारा देने वाली
किसके लिए बेहतरजिनकी पाचन शक्ति अच्छी होजिनका पाचन कमजोर हो या गैस-अपच की समस्या रहती हो
किन मसालों के साथ लेंकाली मिर्च, भुना जीरा, सेंधा नमकभुना जीरा, काला नमक, अदरक, पुदीना
मुख्य फायदाप्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोतप्रोबायोटिक्स के साथ बेहतर पाचन और शरीर में हल्कापन बनाए रखने में सहायक

क्या बच्चों और बुजुर्गों को छाछ देना सही है

यदि बच्चा छह महीने से बड़ा है और सामान्य भोजन लेता है, या बुजुर्ग को दूध से एलर्जी नहीं है, तो सीमित मात्रा में ताजी और स्वच्छ छाछ दी जा सकती है। हालांकि बुखार, दस्त या किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

मानसून में दही बेहतर या छाछ

मानसून में दही और छाछ दोनों ही पोषक हैं, लेकिन हर व्यक्ति के लिए सही विकल्प अलग हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में पाचन शक्ति कमजोर होने के कारण छाछ को अधिक हल्का और पाचन के अनुकूल माना जाता है, जबकि दही का सेवन सीमित मात्रा में और सही समय पर करना बेहतर रहता है।

यदि आपको बार-बार गैस, अपच, सर्दी या कफ की समस्या रहती है तो छाछ अधिक उपयुक्त हो सकती है। वहीं जिनकी पाचन शक्ति अच्छी है और कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या नहीं है, वे दोपहर के भोजन में सीमित मात्रा में ताजी दही का सेवन कर सकते हैं। किसी भी पुरानी बीमारी, लैक्टोज असहिष्णुता या विशेष चिकित्सीय स्थिति में अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

gulshan kumar

गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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