Published: Monday, September 7, 2026, 16:34 [IST]
UP Sneha Chandan Gupta Trapped Moscow: उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले इंजीनियर चंदन गुप्ता की मॉस्को में हिरासत का मामला सामने आया है। उनकी पत्नी स्नेहा गुप्ता ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है। स्नेहा का आरोप है कि उनके पति को रूसी पुलिस ने हिरासत में लिया और अब उन पर रूसी सेना में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है।
रूस की राजधानी मॉस्को से सामने आए इस मामले ने एक बार फिर उन भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो नौकरी या काम के सिलसिले में रूस जाते हैं। कानपुर निवासी इंजीनियर चंदन गुप्ता की पत्नी स्नेहा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि मॉस्को पुलिस उनके पति को हिरासत में लेकर गई है। स्नेहा इस समय अपने 10 साल के बेटे के साथ मॉस्को में हैं। वीडियो में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की अपील करती नजर आ रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
स्नेहा गुप्ता के मुताबिक, उनके पति चंदन गुप्ता कानपुर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और पेशे से इंजीनियर हैं। वह नोएडा के सेक्टर-62 स्थित एक कंपनी से जुड़े हैं और कंपनी के काम से रूस गए थे। स्नेहा का कहना है कि उनका परिवार मॉस्को में चंदन के वर्क हाई-क्वालिफाइड स्पेशलिस्ट वीजा के आधार पर रह रहा था। उन्होंने वीडियो में दावा किया कि रविवार को करीब 12:30 बजे मॉस्को पुलिस उनके पति को अपने साथ ले गई। उनका कहना है कि उन्हें रूसी भाषा नहीं आती, इसलिए वह यह भी ठीक से नहीं समझ पा रही हैं कि उनके पति को किस वजह से हिरासत में लिया गया और उनके साथ आगे क्या होने वाला है।
पत्नी का बड़ा दावा- रूसी सेना में शामिल होने का दबाव
स्नेहा ने अपने वीडियो में दावा किया कि चंदन को हिरासत में लेने के बाद उन पर रूसी सेना में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि रूस में सैन्य कर्मियों की कमी के चलते विदेशी नागरिकों, खासकर भारतीयों को सेना में शामिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि उनके पति को भी इस प्रक्रिया में फंसाया जा सकता है। स्नेहा ने यह भी दावा किया कि मॉस्को डे के आसपास उनके पति को परेशान किया गया था और इसके बाद उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
रूसी पक्ष से क्या जानकारी सामने आई?
इस मामले में एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सरकारी सूत्रों ने बताया है कि मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और चंदन को कांसुलर सहायता दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, रूसी पुलिस का दावा है कि चंदन को एक अन्य व्यक्ति के साथ सार्वजनिक रूप से शराब पीने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। उन्हें कथित तौर पर बाउमानस्काया पुलिस स्टेशन में रखा गया। इसलिए फिलहाल मामले के दो अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। एक तरफ पत्नी का सेना में जबरन भर्ती कराने का आरोप है, जबकि रूसी अधिकारियों की ओर से सामने आई जानकारी में हिरासत की वजह सार्वजनिक शराब सेवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी बताई गई है। अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच और भारतीय दूतावास की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी।
'मेरे पति ने कुछ नहीं किया, मुझे नहीं पता क्या हो रहा है'
स्नेहा ने वीडियो में भावुक होकर बताया कि वह अपने 10 वर्षीय बेटे के साथ मॉस्को में हैं और पति की हिरासत के बाद बेहद परेशान हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें रूसी भाषा की जानकारी नहीं है। ऐसे में न तो वह अपने पति के खिलाफ कार्रवाई की वजह समझ पा रही हैं और न ही यह पता चल पा रहा है कि उन्हें कहां रखा गया है। इसी वजह से उन्होंने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। स्नेहा ने लोगों से भी वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करने की अपील की, ताकि उनकी आवाज अधिकारियों तक पहुंच सके।
रूस में भारतीयों की भर्ती का मामला क्यों गंभीर है?
चंदन गुप्ता का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारतीय नागरिकों के रूसी सैन्य ढांचे में पहुंचने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने राज्यसभा को बताया था कि 202 भारतीय नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किए जाने की जानकारी थी। इनमें 26 की मौत और 7 के लापता होने की सूचना थी। उस समय 119 भारतीयों को सैन्य सेवा से मुक्त कराया जा चुका था और बाकी लोगों की रिहाई के प्रयास जारी थे। बाद में स्थिति में बदलाव आया।
31 जुलाई 2026 को विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत के प्रयासों से 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से मुक्त कराया जा चुका है, जबकि करीब दो दर्जन भारतीयों की रिहाई के लिए अभी प्रयास जारी हैं। मंत्रालय ने साथ ही भारतीयों को जोखिम भरे और संदिग्ध विदेशी नौकरी प्रस्तावों से सावधान रहने की चेतावनी दी। 31 अगस्त 2026 को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि रूसी सेना में भर्ती किए गए 227 भारतीयों में से 51 की मौत हो चुकी है और 139 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। यानी यह सिर्फ एक परिवार की चिंता नहीं है। इसके पीछे उन भारतीयों की सुरक्षा का बड़ा सवाल भी जुड़ा है, जो विदेश में नौकरी की तलाश में जाते हैं।
कैसे फंस रहे हैं भारतीय?
सरकार और सुप्रीम कोर्ट के सामने आए मामलों में यह बात सामने आई है कि कुछ भारतीयों को रूस में सिविलियन नौकरी, निर्माण, हॉस्पिटैलिटी या अन्य काम का झांसा देकर ले जाया गया और बाद में उन्हें रूसी सैन्य ढांचे में शामिल किए जाने का आरोप लगा। कुछ मामलों में परिवारों ने आरोप लगाया कि युवाओं के पासपोर्ट और दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए गए और उन्हें सैन्य सेवा के लिए मजबूर किया गया। हालांकि हर मामले की परिस्थितियां अलग हैं और सभी लोगों के बारे में यह कहना सही नहीं होगा कि उन्हें जबरन भर्ती किया गया था। इसी वजह से विदेश मंत्रालय लगातार संदिग्ध विदेशी नौकरी ऑफर से सावधान रहने की अपील कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी दिए हैं निर्देश
रूस में सैन्य सेवा से जुड़े भारतीयों के परिवारों की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कई कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इनमें प्रभावित परिवारों के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति, डीएनए के जरिए मृतकों की पहचान, कानूनी सहायता, मुआवजे से जुड़े दस्तावेजों में मदद और शवों की स्वदेश वापसी जैसे उपाय शामिल हैं। इससे साफ है कि रूस में भारतीयों की सैन्य भर्ती का मुद्दा अब केवल अलग-अलग परिवारों की शिकायत नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत सरकार के सामने एक गंभीर राजनयिक और मानवीय मुद्दा बन चुका है।