August 13, 2026

क्या है MMR वैक्सीन, अमेरिका में इसकी अलग-अलग डोज देने के फैसले का विरोध क्यों?

क्या है MMR वैक्सीन, अमेरिका में इसकी अलग-अलग डोज देने के फैसले का विरोध क्यों?

MMR एक कॉम्बिनेशन वैक्सीन है.

अमेरिका में बच्चों के वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर बड़ा और विवादास्पद फैसला सामने आया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर के साथ मिलकर एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं, जिसमें MMR वैक्सीन को तीन अलग-अलग टीकों में बांटकर, अलग-अलग देने की सिफारिश की गई है. ट्रंप का कहना है कि वे चाहते हैं कि MMR वैक्सीन के लिए अलग-अलग विजिट और अलग-अलग समय हों, और वैक्सीन को तीन अलग-अलग सिंगल डोज में बांटकर दिया जाए.

इस फैसले ने अमेरिका के मेडिकल सेक्टर में बहस छेड़ दी है. आइए इसी बहाने जानते है कि क्या है MMR वैक्सीन, अमेरिका में यह बदलाव क्यों किया जा रहा है और डॉक्टर इसका विरोध क्यों कर रहे हैं.

क्या है MMR वैक्सीन?

आसान भाषा में समझें तो MMR एक कॉम्बिनेशन वैक्सीन है. इसका पूरा नाम है मीजल्स (खसरा), मम्प्स (गलसुआ) और रूबेला (जर्मन खसरा). अब तक इसी एक वैक्सीन ने तीन अलग-अलग बीमारियों का बचाव किया जाता है. तीनों ही वायरल बीमारियां हैं और बच्चों के लिए बेहद संक्रामक होती है. गंभीर स्थितियों में ये जानलेवा साबित हो सकती हैं. दुनियाभर में दशकों से यह वैक्सीन एक ही डोज में तीनों बीमारियों से सुरक्षा देने के लिए इस्तेमाल की जाती रही है, ताकि बच्चों को बार-बार इंजेक्शन न लगवाना पड़े.

अमेरिका में आमतौर परबच्चों को MMR वैक्सीन की पहली डोज 12 से 15 महीने की उम्र में और दूसरी डोज 4 से 6 साल की उम्र में दी जाती है. कई जगह चिकनपॉक्स (वेरिसेला) की वैक्सीन को भी इसी के साथ मिलाकर MMRV के रूप में दिया जाता है, जिससे एक ही विजिट में चार बीमारियों से सुरक्षा मिल जाती है.

अमेरिका में क्या बदलाव किया जा रहा है?

10 अगस्त 2026 को व्हाइट हाउस में हस्ताक्षरित इस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत कई बड़े बदलावों की सिफारिश की गई है. इस ऑर्डर में बच्चों के लिए नियमित टीकों की संख्या घटाकर 11 करने की बात कही गई है. टीकों को ऑटिज्म से जोड़ने की कोशिश की गई है, हालांकि यह वैज्ञानिक रूप से गलत साबित हो चुका दावा है. पहले अमेरिका में बच्चों के लिए 17 टीकों की सिफारिश की जाती थी.

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह जनवरी में CDC की सिफारिश को औपचारिक रूप देने जैसा कदम है, जिसमें 17 की बजाय 11 प्रमुख बच्चों के टीकों को मान्यता दी गई थी. इसके अलावा ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि एक साल के बच्चों को टीके एक ही दिन में देने की बजाय अलग-अलग विजिट में दिया जाना चाहिए. ट्रंप ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक साल की उम्र में बच्चों को एक ही दिन सारे टीके देने की बजाय पांच अलग-अलग विजिट में टीके दिए जाने चाहिए.

सबसे ज्यादा चर्चा MMR वैक्सीन को लेकर हो रही है. फिलहाल MMR वैक्सीन दो डोज के जरिए तीनों बीमारियों से सुरक्षा देती है, लेकिन नए ऑर्डर में इसे अलग-अलग एकल टीकों में तोड़कर ज्यादा विजिट और ज्यादा इंजेक्शन के जरिए देने की सिफारिश की गई है.

कहां है मुश्किल?

दिलचस्प बात है कि जिस अलग-अलग MMR वैक्सीन की सिफारिश की जा रही है, वह अमेरिका में मौजूद ही नहीं है. व्हाइट हाउस के फैक्ट शीट के मुताबिक भले ही मीजल्स, मम्प्स और रूबेला के लिए अलग-अलग वैक्सीन देने की सिफारिश की गई हो, लेकिन फिलहाल अमेरिका में ये अलग-अलग वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं हैं. एक बाल रोग विशेषज्ञ ने साफ कहा कि पीडियाट्रिक क्लीनिक में इस तरह का अलग मीजल्स टीका ऑर्डर करना संभव ही नहीं है.

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के मुताबिक, MMR के हर हिस्से के लिए अलग वैक्सीन बनाने में करीब एक दशक का समय लग सकता है. फिलहाल यह सिफारिश व्यावहारिक तौर पर लागू नहीं की जा सकती.

डॉक्टरों और विशेषज्ञों का विरोध क्यों?

रिपब्लिकन सीनेटर और खुद पेशे से डॉक्टर बिल कैसिडी ने इसे सीधे तौर पर गलत करार दिया. कैसिडी ने कहा कि राष्ट्रपति के पास इस तरह के बदलाव करने की विशेषज्ञता नहीं है, और वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हैं.

विशेषज्ञों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि टीकों को अलग-अलग देने से फायदे की बजाय नुकसान ज्यादा हो सकता है्. इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है कि MMR या अन्य टीकों को अलग-अलग देने से कोई फायदा होता है, बल्कि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, बच्चों की डोज छूटने की आशंका बढ़ सकती है, और टीकाकरण की लागत भी बढ़ जाएगी.

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अंकित गुप्ता

अंकित गुप्ता

नवाबों के शहर लखनऊ में जन्‍मा. डीएवी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से MBA. लिखने की चाहत और खबरों से आगे की कहानी जानने का जुनून पत्रकारिता में लाया. 2008 में लखनऊ के पहले हिन्‍दी टेबलॉयड ‘लखनऊ लीड’ से करियर से शुरुआत की. फीचर सेक्‍शन में हाथ आजमाया. फ‍िर बाबा गोरखनाथ के नगरी गोरखपुर से दैनिक जागरण के आइनेक्‍स्‍ट से जुड़ा. शहर की खबरों और हेल्‍थ मैगजीन में रिपोर्टिंग के लिए 2013 में राजस्‍थान पत्र‍िका के जयपुर हेडऑफ‍िस से जुड़ा. यहां करीब 5 साल बिताने के बाद डिजिटल की दुनिया में नई शुरुआत के लिए 2018 में दैनिक भास्‍कर के भोपाल हेड ऑफ‍िस पहुंचा. रिसर्च, एक्‍सप्‍लेनर, डाटा स्‍टोरी और इंफोग्राफ‍िक पर पकड़ बनाई. हेल्‍थ और साइंस की जटिल से जटिल खबरों को आसान शब्‍दों में समझाया. 2021 में दैनिक भास्‍कर को अलविदा कहकर TV9 ग्रुप के डिजिटल विंग से जुड़ा. फ‍िलहाल TV9 में रहते हुए बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर ‘नॉलेज’ सेक्‍शन की कमान संभाल रहा हूं. एक्‍सप्‍लेनर, डाटा और रिसर्च स्‍टोरीज पर फोकस भी है और दिलचस्‍पी भी.

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