October 11, 2026

गौग्रास खाने से 15 गायों की मौत का दावा: 37 का इलाज जारी; भिवानी MLA घनश्याम के कार्यालय पर धरने पर बैठे गौरक्षक - Bhiwani News

भिवानी में विधायक घनश्याम सर्राफ के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए गौरक्षा दल के सदस्य।

भिवानी के विधायक घनश्याम सर्राफ के कार्यालय पर रविवार को गौ रक्षा दल ने धरना प्रदर्शन किया। गौ रक्षा दल का कहना है कि अमावस्या पर गौग्रास के कारण भिवानी में 15 गायों की मौत हो गई और 37 गाय अभी उपचाराधीन हैं। बार-बार अपील करने के बाद भी सीमित मात्रा स

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गौ रक्षा दल के प्रधान संजय परमार ने कहा कि श्राद्ध पक्ष की अमावस्या पर गौसेवा और गौग्रास के नाम पर अत्यधिक भोजन गौवंश के लिए जानलेवा साबित हुआ है। जरूरत से ज्यादा रोटी, खीर, पुरी, हलवा व अन्य तला हुआ गौग्रास खिलाए जाने के कारण अब तक 15 गायों की मौत हो गई।

इसके अलावा 37 अन्य गायों का स्थानीय महम गेट स्थित गौशाला में उपचार चल रहा है। इस घटना ने शहर के गौसेवकों और गौरक्षकों में भारी रोष पैदा कर दिया है। बेजुबान गौवंश की मौतों से आक्रोशित गौरक्षा दल के सदस्यों ने प्रधान संजय परमार के नेतृत्व में रविवार को भिवानी विधायक के आवास पर मृत गायों को लेकर धरना दिया और सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष जताया।

भिवानी के एमएलए घनश्याम सर्राफ के कार्यालय में धरने पर बैठे गौ रक्षा दल के सदस्य।

भिवानी के एमएलए घनश्याम सर्राफ के कार्यालय में धरने पर बैठे गौ रक्षा दल के सदस्य।

आश्वासन नहीं मिलने तक धरने पर रहेंगे

धरने पर बैठे गौरक्षकों ने सवाल उठाया कि आखिर बेकसूर गौवंश की मौतों का यह सिलसिला कब रुकेगा? गौसेवा के नाम पर बिना जानकारी और उचित व्यवस्था के अत्यधिक भोजन खिलाने वालों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाएगा? गौवंश की सुरक्षा के लिए सरकार सख्त कानून कब बनाएगी? गौरक्षकों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर जवाब नहीं मिलता और इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए ठोस आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे धरने से नहीं उठेंगे।

जरूरत से ज्यादा गौग्रास गायों के लिए जानलेवा

गौरक्षा दल के प्रधान संजय परमार ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि श्राद्ध पक्ष की अमावस्या पर गौवंश को गौग्रास खिलाने की परंपरा को लोग पुण्य कमाने का माध्यम मानते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में जरूरत से ज्यादा भोजन खिलाना कई बार बेजुबान पशुओं के लिए जानलेवा बन जाता है। जबकि उन्हें श्राद्ध अमावस्या से कई दिन पहले से जागरूक किया जाता है।

हर वर्ष इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं और निर्दोष गायों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इसके बावजूद न तो लोगों को जागरूक करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था दिखाई देती है और न ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नजर आता है।