Pune News: पुणे ग्रामीण के चाकण MIDC में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या, खराब सड़कें, बड़े-बड़े गड्ढे और बुनियादी सुविधाओं की कमी अब उद्योगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है. इन समस्याओं से परेशान करीब 20 लघु उद्योग कंपनियां चाकण से अपना कारोबार दूसरी जगह स्थानांतरित करने की तैयारी में हैं. इन कंपनियों ने सातारा जिले के खंडाला MIDC में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए करीब 17 से 20 एकड़ जमीन की मांग की है.
चाकण MIDC की इन कंपनियों का कहना है कि पिछले लंबे समय से सड़क और ट्रैफिक की समस्या को लेकर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा रही है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. अब कंपनियों ने मिलकर एक संगठन बनाया है और सरकार के सामने खंडाला में जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है.
खराब सड़क और ट्रैफिक से उद्योग परेशान
चाकण MIDC पुणे के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है. यहां मर्सिडीज-बेंज, फॉक्सवैगन, स्कोडा और हुंडई जैसी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों से जुड़े कई उद्योग काम करते हैं. बड़ी कंपनियों के साथ बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्योग भी यहां उत्पादन और सप्लाई चेन से जुड़े हुए हैं.
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लघु उद्योगों का आरोप है कि चाकण में लगातार ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है. कई जगह सड़कों पर बड़े गड्ढे हैं और बारिश के दौरान सड़कें कीचड़ और पानी से भर जाती हैं. इससे माल की आवाजाही प्रभावित होती है और कर्मचारियों को भी आने-जाने में परेशानी होती है. लगातार होने वाले हादसे भी उद्योगों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं.
उद्योग संचालकों का कहना है कि बड़े उद्योगों के पास अपनी लॉजिस्टिक और दूसरी व्यवस्थाएं होती हैं, लेकिन छोटे और मझोले उद्योग सीमित संसाधनों में काम करते हैं. ऐसे में सड़क और ट्रैफिक की समस्या का सीधा असर उनके कारोबार पर पड़ता है.
20 कंपनियों ने बनाया संगठन
चाकण MIDC से संभावित पलायन की तैयारी कर रही कंपनियों ने मिलकर एक संगठन बनाया है. इस संगठन के माध्यम से सातारा जिले के खंडाला MIDC में जमीन और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है. फेडरेशन ऑफ चाकण MIDC लघु उद्योग संगठन की ओर से राज्य सरकार के सामने इस संबंध में प्रस्ताव रखा गया है.
संगठन ने खंडाला MIDC के फेज-2 में करीब 17 से 20 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है. कंपनियों की ओर से इस संबंध में आवेदन भी दिए गए हैं. संगठन का कहना है कि यदि जमीन उपलब्ध कराई जाती है तो चाकण में काम कर रही कंपनियां खंडाला में नए सिरे से अपने उद्योग स्थापित कर सकती हैं.
1000 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा
उद्योग संगठन के अनुसार, अगर करीब 20 कंपनियां चाकण से बाहर चली जाती हैं तो इसका बड़ा आर्थिक असर पड़ सकता है. संगठन की ओर से करीब 1000 करोड़ रुपए के कारोबार पर असर पड़ने और लगभग 4000 कर्मचारियों के रोजगार पर संकट आने का दावा किया गया है.
हालांकि, खंडाला में प्रस्तावित नए औद्योगिक क्षेत्र को लेकर दिए गए प्रस्ताव में अलग-अलग आंकड़े भी सामने आए हैं. प्रस्ताव के अनुसार, 20 से अधिक उद्योगों के लिए करीब 290 करोड़ रुपए के निवेश का अनुमान लगाया गया है. वहीं, इन उद्योगों के जरिए लगभग 2,000 से 3,000 लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया गया है.
खंडाला में कौन-कौन से उद्योग लगेंगे?
प्रस्ताव में खंडाला MIDC में कई तरह के MSME उद्योग स्थापित करने की योजना बताई गई है. इनमें प्रेस और फैब्रिकेशन, सरफेस कोटिंग, प्लास्टिक मोल्डिंग, फर्नीचर निर्माण, पैकेजिंग मटेरियल, मशीन फिटिंग और मशीनिंग जैसे उद्योग शामिल हैं. इसके अलावा ऑटो और नॉन-ऑटो मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी सेवाओं को भी इस प्रस्ताव में शामिल किया गया है.
प्रस्ताव के मुताबिक, नए उद्योगों से सातारा जिले में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं. प्रस्ताव में इन उद्योगों से करीब 140 से 150 करोड़ रुपए के टर्नओवर का अनुमान भी जताया गया है. इसके लिए खंडाला MIDC फेज-2 में 17 से 20 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है.
14 महीने से शिकायत, नहीं सुधरी स्थिति
दिशा एक्सपोर्ट्स के मालिक धनंजय शेडबाले के मुताबिक, उनकी कंपनी पिछले करीब 19 साल से चाकण में काम कर रही है और यहां करीब 140 कर्मचारी हैं. उनका कहना है कि पिछले 14 महीनों से खराब सड़क और ट्रैफिक की समस्या को लेकर MIDC अधिकारियों को कई पत्र लिखे गए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ.
छोटे उद्योग संगठन के अध्यक्ष शांतनु कुलकर्णी का कहना है कि चाकण से उद्योगों को स्थानांतरित करने के फैसले पर करीब सात से आठ महीने तक चर्चा हुई. उनका कहना है कि छोटे और मझोले उद्योगों के पास बड़े उद्योगों जैसी सुविधाएं नहीं होतीं, इसलिए सड़क, ट्रैफिक और परिवहन जैसी समस्याओं का असर सीधे उत्पादन और कारोबार पर पड़ता है.
सरकार से जमीन और सुविधाओं की मांग
फेडरेशन ने राज्य सरकार और MIDC से खंडाला में 17 से 20 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है. संगठन का कहना है कि अगर समय रहते चाकण में जरूरी बुनियादी सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में और उद्योग भी यहां से बाहर जाने पर मजबूर हो सकते हैं.
इस मामले को लेकर फेडरेशन की ओर से 12 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जा रही है. इसमें स्थानीय मजदूर यूनियन और ट्रक-टेंपो चालक यूनियन के प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात कही गई है.
चाकण के साथ सातारा को भी फायदा या नुकसान?
अगर कंपनियां वास्तव में चाकण से खंडाला स्थानांतरित होती हैं तो इसका असर दोनों क्षेत्रों पर पड़ेगा. चाकण में उद्योगों के जाने से स्थानीय रोजगार और कारोबार प्रभावित हो सकते हैं, जबकि खंडाला को नए निवेश और रोजगार के रूप में फायदा मिलने की उम्मीद है.
फिलहाल उद्योग संगठन की मांग सरकार और MIDC के स्तर पर विचाराधीन है. अब देखना होगा कि सरकार चाकण की सड़क, ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाओं को सुधारने के लिए क्या कदम उठाती है और कंपनियों की खंडाला में जमीन की मांग पर क्या फैसला होता है.

जयप्रकाश सिंह
जयप्रकाश सिंह का नाम देश के चुनिंदा क्राइम रिपोर्टर में आता है. लंबे समय से टीवी जर्नलिस्ट के तौर पर सेवाएं जारीं. करीब तीन दशकों से सक्रिय पत्रकारिता का हिस्सा. प्रोड्यूसर, एंकर और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में मुंबई से कार्यरत. इसके पहले 2012 से 2022 तक मुंबई में इंडिया टीवी के ब्यूरो चीफ रहे. 2005 से 2012 तक नेटवर्क18 ग्रुप के आईबीएन7 चैनल में डिप्टी ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाली. 2004 से 2005 तक सहारा समय मुंबई में बतौर सीनियर स्पेशल कॉरस्पॉन्डेंट काम किया. 2002 से 2004 तक मुंबई ब्यूरो में बीएजी फिल्म्स के चीफ रहे. नवभारत टाइम्स मुंबई में 1997 में जॉइन किया और यहां 2 साल काम किया. इससे पहले भी चार संस्थानों में काम किया.
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