August 26, 2026

बिहार से नेटवर्क मार्केटिंग पैटर्न पर MBBS की डील: देशभर में फैलाए एजेंट्स; अमेरिका, दुबई जैसे देशों से करवाते हैं 1 करोड़ का ट्रांजेक्शन - Bihar News

NRI कोटे से किसी भी स्कोर पर MBBS सीट दिलवा देंगे। 30 हजार आप इंडिया में हमें दे दीजिएगा। बाकी का 1 करोड़ अमेरिका, दुबई से कैंडिडेट के अकाउंट में डलवाएंगे। कोई नहीं कह पाएगा कि NRI नहीं है।

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मैं बिहार से हूं। एमपी में 11 साल से रह रहा हूं। अब तक 3 हजार से ज्यादा डॉक्टर बना चुका हूं। अपना नेटवर्क तो पूरे देश में फैला है। जहां जिस कॉलेज में बोलिएगा MBBS की सीट लॉक करा दूंगा।

कोई भी ऐसा राज्य नहीं जहां अपनी सेटिंग से कॉलेज की सीट फिक्स न हो जाए। हम लोगों ने ऐसी नेटवर्किंग बनाई है, एक कॉल पर एडमिशन होता है। पैसा खर्च कीजिए किसी भी कोटे से सेट करा दूंगा। हम लोग ऐसे काम नहीं करते हैं, पैसा देकर पहले ही कॉलेजों से सीट होल्ड करा लेते हैं..।

ऐसे दावे देश के अलग-अलग राज्यों में बैठे एजेंट्स कर रहे हैं जो MBBS की सीट बेच रहे हैं। हर एजेंट का कनेक्शन बिहार से है। बिहार के एजेंट्स ने पूरे देश में नेटवर्क मार्केटिंग की तरह अपना जाल फैला दिया है।

ऑपरेशन MBBS पार्ट 3 में पढ़िए और देखिए बिहार के एजेंट्स ने देश में कैसे खड़ा किया MBBS की सीट बेचने वाला नेटवर्क..।

भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम ने इन्वेस्टिगेशन के दौरान देश के 6 से अधिक राज्यों में बात की है। हर राज्य में MBBS सीट की डील करने वाला एजेंट्स बिहार का निकला।

रिपोर्टर्स के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि देश के अलग-अलग राज्यों में कैसे नेटवर्क मार्केटिंग की तरह एजेंट्स ने अपना जाल फैलाया और कैसे MBBS की सीट बेच रहे हैं।

इन्वेस्टिगेशन में सबसे बड़ा नाम प्रिंस का सामने आया जो बिहार के बेगूसराय का रहने वाला है, लेकिन पूरे देश में अपना नेटवर्क खड़ा कर रखा है। वो खुद मध्य प्रदेश के भोपाल में रहता है, वहीं से MBBS की पूरी डील करता है।

इनपुट मिला कि फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर वह अब तक 3000 से अधिक डॉक्टर बना चुका है, इसी कमाई से भोपाल में खुद हॉस्पिटल चलाता है।

प्रिंस से मिलने भास्कर रिपोर्टर अंडर कवर बनकर 1100 किमी दूर भोपाल के सलैया पहुंचे। बातचीत में खुद प्रिंस ने ही पूरा खुलासा कर दिया।

रिपोर्टर - मैं बिहार से आया हूं, एडमिशन के संबंध में बात करनी है। प्रिंस - बढ़िया है, हो जाएगा। अपना तो काम ही यही है, देश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में जाइए अपना आदमी मिलेगा।

रिपोर्टर - आप बिहार से भोपाल कैसे पहुंच गए। प्रिंस - मैने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, नौकरी नहीं लगी तो यही काम शुरू कर दिया। अब तक तीन हजार से अधिक छात्र-छात्राओं का डॉक्टरी में एडमिशन करा चुका हूं।

रिपोर्टर - तब तो आपकी पूरी सेटिंग होगी? प्रिंस - एमपी और बिहार नहीं देश में कोई भी मेडिकल कॉलेज ऐसा नहीं है, जहां अपनी सेटिंग नहीं है।

रिपोर्टर - आपके साथ तो बहुत लोग काम करने वाले होंगे? प्रिंस - पूरा नेटवर्क है, बिहार के लोग देश के हर राज्य में हैं, सब एक दूसरे से जुड़े हैं। MBBS एडमिशन के लिए हम लोगों की मार्केटिंग की पूरी चेन है।

रिपोर्टर - स्टूडेंट्स का पता कैसे चलता है? प्रिंस - अलग-अलग शहरों में लोग हैं, स्टूडेंट्स की जानकारी जुटाते हैं, फिर नंबर और मार्क्स देखकर उन्हें आगे भेज देते हैं। हम लोग भी कैंडिडेट्स के इंटरेस्ट के हिसाब से उन्हें कॉलेज दिला देते हैं।

रिपोर्टर - काउंसलिंग तो करानी ही पड़ती होगी? प्रिंस - प्रक्रिया तो सभी पूरी की जाती है, लेकिन कोटा तो अपना पहले से सेट करके रखा जाता है। कैंडिडेट्स के आधार पर डॉक्यूमेंट्स तैयार करा दिए जाते हैं।

रिपोर्टर - इसमें तो बहुत लोगाें और बड़ी सेटिंग की जरूरत पड़ती होगी। प्रिंस - NRI डॉक्यूमेंट्स और कॉलेज तक पहुंचाने की प्रक्रिया में अलग-अलग लोग जुड़ते हैं।

प्रिंस बोला- छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ में ही एडमिशन करवा दूंगा

प्रिंस ने अंडर कवर रिपोर्टर्स से डील के दौरान MBBS सीट बेचने में कमाई का पैकेज भी बताया। प्रिंस ने दावा किया कि 220 नंबर पाने वाले स्टूडेंट्स के लिए NRI कोटे से MBBS में एडमिशन का पैकेज करीब 1 से 1.5 करोड़ तक का है।

हॉस्टल का खर्च अलग से देना होगा। प्रिंस ने छत्तीसगढ़ की सेटिंग का दावा करते हुए बताया कि वहां 1 करोड़ में ही MBBS में एडमिशन करा देंगे।

प्रिंस का दावा है कि हर कोटे के लिए उसकी सेटिंग है। पहले से ही कॉलेज से सीट को लेकर डील हो जाती है। इसके बाद काउंसलिंग शुरू होते ही सीट की डीलिंग भी शुरू हो जाती है।

किसी कैंडिडेट्स के परिवार में कोई NRI हो या ना हो, प्रिंस डॉक्यूमेंट्स से उसे NRI बनवा देगा। इतना ही नहीं NRI स्पॉन्सर की व्यवस्था भी प्रिंस खुद करता है।

दावा किया कि स्टूडेंट यादव है तो यादव सरनेम वाला NRI स्पॉन्सर भी ढूंढकर दिया जाएगा। प्रिंस ने बताया कि कागजों में NRI स्पॉन्सर छात्र की पढ़ाई का खर्च उठाने वाला दिखेगा, जबकि असली पैसा छात्र का परिवार देगा।

प्रिंस से डील करने के बाद हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम को प्रदीप का इनपुट मिला। प्रदीप बिहार के कटिहार का रहने वाला है, फिलहाल वो नोएडा में रहता है। प्रदीप के बारे में जानकारी मिली कि वो बिहार और यूपी के अधिकतर स्टूडेंट्स की कॉलेज में सेटिंग नोएडा में बैठकर करता है।

प्रदीप का दावा- राजस्थान और बंगाल में सेटिंग

भास्कर के अंडर कवर रिपोर्टर्स ने प्रदीप से दो स्टूडेंट्स के एडमिशन के लिए अलग-अलग डील की। हमने बताया कि 215 और 220 स्कोर वाले स्टूडेंट्स का MBBS में एडमिशन कराना है।

प्रदीप ने भी वही रास्ता बताया जो बाकी एजेंट्स ने बताया। प्रदीप ने दावा किया कि MBBS में जितनी भी NRI कोटे की सीट होती है, हम लोग ही उसकी सेटिंग करते हैं। अगर कॉलेज एजेंट्स से अलग हो जाए तो ये सीट भर ही नहीं पाएंगी।

प्रदीप ने दावा किया कि 215-220 नंबर पर एडमिशन के लिए राजस्थान और बंगाल में सेटिंग है। प्रदीप ने ऑल इंडिया काउंसलिंग के अलावा राजस्थान और पश्चिम बंगाल में एडमिशन के विकल्प बताए।

उसने दावा किया कि राजस्थान और बंगाल में NRI दस्तावेज नहीं होने के बावजूद एडमिशन का रास्ता निकाला जाता है। डेढ़ लाख रुपए में लिस्ट क्लियर करा देंगे, इसके बाद NRI डॉक्यूमेंट्स के लिए साढ़े 4 लाख रुपए लेंगे।

इसके अलावा NRI के खाते से 10 लाख रुपए के बराबर अमेरिकी डॉलर ट्रांसफर कराने और विदेशी लेनदेन पर करीब 2 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज लगने की बात भी कही।

एजेंट्स की विदेशों में सेटिंग

प्रदीप से बातचीत में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। प्रदीप के मुताबिक NRI कोटे में एडमिशन के लिए विदेश से पैसे का ट्रांजेक्शन दिखाना पड़ता है। कॉलेज में एडमिशन के बाद वह विदेश में बैठे अपने आदमियों से ट्रांजेक्शन कराएगा। अमेरिका से फंड ट्रांजेक्शन कराने का एक नया ट्रेंड भी सामने आया।

प्रदीप ने बताया कि जितने भी एडमिशन NRI कोटे से होते हैं, इसमें फंड बाहर से ही आता है। प्रदीप ने बताया कि जितने भी एजेंट्स हैं, उनकी विदेशों में सेटिंग होती है।

वह वहां से ही पैसे ट्रांसफर कॉलेज के खातों में कराते हैं। प्रदीप ने बताया कि स्टूडेंट्स की सीट सेट करने के लिए नीट स्कोर में सेटिंग से लेकर काउंसलिंग, NRI डॉक्यूमेंट्स लिस्ट में नाम और पैसे के लेनदेन तक की अलग-अलग व्यवस्था बनानी पड़ती है।

प्रदीप से डील के दौरान ही निखिल यादव का मोबाइल नंबर मिला। निखिल बिहार के रक्सौल का रहने वाला है, लेकिन उसका नेटवर्क देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों तक फैला है।

वह दिल्ली में बैठकर MBBS की सीट बेच रहा है। प्रदीप और निखिल ने डील के दौरान बिहार के कई एजेंटस के नाम लिए जो देश के अलग-अलग राज्यों में बैठकर MBBS सीट की डील कर रहे हैं। इस तरह से एक एजेंट से दूसरे एजेंट तक पहुंचने पर नेटवर्क की एक और कड़ी सामने आई।

निखिल का दावा- कॉलेज पहले ही कोटे वाली सीट बेच देते हैं

कॉलेज से पहले ही हम लोगों की डील हो जाती है। कॉलेज पहले ही कोटे वाली सीट का रेट बता देते हैं। हम लोग उसका सौदा कर एडवांस देकर सीट होल्ड करा लेते हैं। इसके बाद एडमिशन के लिए स्टूडेंट्स को भेज देते हैं। कॉलेज से हिसाब किताब बाद में हो जाता है

स्टूडेंट एडमिशन के लिए आए तो उसे आगे कॉलेज तक ले जाने की व्यवस्था करा दी जाती है। जरूरत पड़ने पर दिल्ली से फ्लाइट से बेंगलुरु ले जाकर एडमिशन कराते हैं। MCC के NRI नियमों से हम लोगों को मदद मिलती है, इससे हम कम स्कोर के बाद भी स्टूडेंट्स को कोटे वाली सीट दिला देते हैं।

बिहार और बंगाल में NRI दाखिले से जुड़े कुछ नियम और डॉक्यूमेंट्स स्पष्ट नहीं होने के कारण कॉलेजों से बातचीत में दिक्कत आ रही है। जबकि दूसरे राज्यों में प्रक्रिया पूरी तरह आसान है।

बड़ी ही आसानी से हम एडमिशन की पहले से ही डील करके रखते हैं। हम लोगों के नेटवर्क में हर व्यक्ति का अपना-अपना काम तय है। कोई छात्र और उसके परिवार से संपर्क करता है, कोई NRI डॉक्यूमेंट्स बनवाता है तो कोई स्पॉन्सर फिक्स कर विदेश से पैसे का ट्रांजेक्शन करने की सेटिंग करता है। इसी में से कुछ को कॉलेज तक पहुंचाने और वहां बातचीत कराने की जिम्मेदारी दी जाती है।

हैदराबाद से लेकर बंगाल तक सेटिंग

निखिल ने तेलंगाना के हैदराबाद और पश्चिम बंगाल में एडमिशन कराने का दावा किया। उसने कहा, देश का कोई भी राज्य हो और वहां का कोई भी मेडिकल कॉलेज हो, सब कोई जानता है।

निखिल का दावा है कि राजस्थान में तीसरे राउंड की काउंसलिंग में बड़ा ऑप्शन निकलेगा। कॉलेजों से लगातार बातचीत हो रही है। डीम्ड कॉलेजों में NRI और मैनेजमेंट सीटों को लेकर पहले से ही सेटिंग हो गई है।

निखिल ने कहा कि किसी कॉलेज से सीधे फोन पर एडमिशन की बात नहीं होती। पहले काउंसलिंग, रजिस्ट्रेशन और NRI डॉक्यूमेंट्स की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इसके बाद कैंडिडेट्स को कॉलेज ले जाकर संबंधित लोगों से आमने-सामने बातचीत करा दी जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि कोई भी एजेंसी किसी को नहीं पकड़ पाए। ऐसा करने से कॉलेज और एजेंट्स दोनों सेफ होते हैं।

निखिल का दावा है कि देश में फैले बिहार के एजेंट्स कोटे वाली सीट की पहले से ही डील कर लेते हैं। कोटे की जितनी भी सीट होती है वह सेटिंग से ही भरती है।

अगर एजेंट्स हाथ नहीं डाले तो कॉलेज की सीटें खाली जाएंगी और कॉलेज एक्सपोज भी हो जाएंगे। सबसे अधिक डील NRI कोटे की होती है। इस कोटे से एडमिशन सबसे आसान होता है।

एजेंट्स कॉलेज की फीस अलग से दिलवाते हैं, अपना कमीशन वह अलग से लेते हैं। हॉस्टल के करीब 2 लाख रुपए सालाना खर्च में भी एजेंट्स अपना कमीशन फिक्स कर लेते हैं।

निखिल बोला- एडमिशन के पहले 35-40 लाख लगेंगे

निखिल ने बताया कि कैंडिडेट्स के पैरेंट्स को पहले एडमिशन के बाद पहले साल कम से कम 35 से 40 लाख रुपए तैयार रखने पड़ते हैं। उसने कुछ कॉलेजों के लिए करीब 95 लाख रुपए के पैकेज का भी जिक्र किया।

बातचीत में उसने हैदराबाद के महेश्वरा और राजा राजेश्वरी कॉलेज का नाम लिया। वहां हाल में उसने एक कैंडिडेट्स की बुकिंग और दूसरे की प्रक्रिया चलने का दावा किया।

एक लड़की के लिए करीब 95 लाख रुपए के पैकेज में एडमिशन होने की बात भी कही। निखिल ने कहा कि वह केवल फोन पर कॉलेज का नंबर देकर कैंडिडेट्स को भेजने के बजाय खुद फ्लाइट से कॉलेज ले जाएगा और वहां संबंधित लोगों से आमने-सामने बातचीत कराएगा।

एजेंट से एजेंट तक जुड़ती गई कड़ियां

प्रिंस, प्रदीप और निखिल से बातचीत अलग-अलग जगहों पर हुई, लेकिन तीनों की बातचीत को जोड़ने पर एक जैसा तरीका सामने आया। पहले छात्र के नंबर और कैटेगरी की जानकारी ली जाती है।

इसके बाद उसके लिए कॉलेज और कोटे का विकल्प बताया जाता है। NRI दस्तावेज नहीं होने पर स्पॉन्सर की व्यवस्था की बात होती है और फिर काउंसलिंग से लेकर कॉलेज तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेने का दावा किया जाता है।

भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि यह काम सिर्फ एक एजेंट तक सीमित नहीं है। इसके लिए पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। नेटवर्क में शामिल अधिकतर लोग बिहार के हैं।

बिहार से बच्चों की अधिक डिमांड होती है, इसलिए इस नेटवर्क में यूपी बिहार के एजेंट्स का सिक्का चलता है। कॉलेज भी उनके संपर्क में रहते हैं ताकि कोई सीट खाली नही जाए।

इन्वेस्टिगेशन में यह भी साफ हो गया कि कहीं कोई एजेंट फंसे नहीं, इसका भी बहुत ख्याल रखा जाता है। इसलिए एक एजेंट दूसरे एजेंट का नंबर देता है और आगे की प्रक्रिया के लिए दूसरे एजेंट से बात कराई जाती है। यानी पूरा सिस्टम एक तरह से नेटवर्क मार्केटिंग चेन की तरह काम करता दिखाई देता है।

एक तरफ ऐसे लोग हैं जो स्टूडेंट और उसके परिवार तक पहुंचते हैं। इसके बाद मार्क्स और बजट के हिसाब से एडमिशन का विकल्प बताया जाता है। फिर NRI डॉक्यूमेंट्स और स्पॉन्सर की व्यवस्था की बात करने वाला एजेंट सामने आता है।

आगे काउंसलिंग और रजिस्ट्रेशन कराने वाले लोग और आखिर में कॉलेज तक ले जाकर सीट और फीस पर बातचीत कराने का दावा करने वाले एजेंट जुड़ते हैं।

कम नंबर वाले स्टूडेंटस को तलाशते हैं एजेंट

हमारी इन्वेस्टिगेशन में एक और बात सामने आई वह कम स्कोर वाले स्टूडेंट्स पर टारगेट करने वाली थी। एजेंट्स का पूरा जोर कम नंबर वाले स्टूडेंट्स पर अधिक होता है।

215, 220 और इसके आसपास के नंबर बताए जाने पर एजेंटों ने अलग-अलग राज्यों और NRI कोटे के विकल्प बताने शुरू किए। इसके बाद बातचीत सीधे पैकेज और अतिरिक्त खर्च तक पहुंची।

ऐसा इनपुट भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को पहले ही मिला था, इसलिए रिपोटर्स अंडर कवर बनकर कम स्कोर वाले स्टूडेंट्स पर ही बात की।

एजेंट प्रिंस ने 220 नंबर पर 1.10 से 1.20 करोड़ रुपए के पैकेज की बात की और एजेंट प्रदीप ने 215-220 नंबर वाले छात्रों के लिए राजस्थान और बंगाल में सेटिंग बताई। निखिल ने डॉक्यूमेंटस, सर्विस, काउंसलिंग और कॉलेज तक पहुंचाने की कड़ी को जोड़ा और पैकेज की जानकारी दी।

एजेंट्स और कॉलेज की कड़ी बिहार से जुड़ी

भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बिहार, मध्य प्रदेश, बंगाल, राजस्थान, यूपी, दिल्ली में 50 से अधिक एजेंट्स से बात की है। इसमें 80 प्रतिशत बिहार के एजेंट्स निकले हैं। जो बिहार के रहने वाले नहीं हैं, वह बिहार के एजेंट्स के संपर्क में है।

इन्वेस्टिगेशन में यह साफ हो गया कि देश में कहीं भी MBBS की सीट बिक रही है, इसमें बिहार के एजेंट्स शामिल हैं। इन्वेस्टिगेशन में यह भी पता चला कि जो एजेंट पहले बिहार में काम करते थे, वह अब देश के अलग-अलग राज्यों में सेट हो गए हैं।

बिहार के रहने वाले 3 एजेंट प्रिंस, प्रदीप और निखिल ने राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में बड़ी सेटिंग होने का दावा किया है।

भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आए एजेंट्स की बातचीत के आधार पर यह नेटवर्क एक ऐसे मार्केटिंग सिस्टम की तरह काम करता दिखाई देता है, जिसमें छात्र को पहले संभावित ग्राहक के तौर पर जोड़ा जाता है और फिर उसके नंबर, कैटेगरी और बजट के हिसाब से अलग-अलग विकल्प बताए जाते हैं।

इसके बाद एजेंट से दूसरे एजेंट तक छात्र को पहुंचाने, NRI दस्तावेज और स्पॉन्सर की व्यवस्था करने तथा कॉलेज तक ले जाने की बात कही जाती है।

एजेंट्स के दावों की पुष्टि अलग-अलग कॉलेजों या संबंधित संस्थानों से भी हुई है। हालांकि बातचीत में जिस तरह एक एजेंट से दूसरे एजेंट का नंबर मिलता गया और एडमिशन की पूरी प्रक्रिया अलग-अलग लोगों के जरिए संभालने की बात सामने आई, उससे इस नेटवर्क की आपसी कनेक्टिविटी का भी खुलासा होता है।

बिहार के एजेंट प्रिंस, प्रदीप और निखिल से बातचीत के दौरान ही बंगाल में MBBS सीट के लिए नेटवर्क चलाने वाली मौसम का इनपुट मिला। वह पश्चिम बंगाल से काम करती है, जबकि मौसम पूर्णिया की रहने वाली है।

मौसम ने दावा किया कि वह लंबे समय से बंगाल में रह रही है। मौसम से रिपोटर्स ने फोन पर बात की। NEET में 545 नंबर के स्कोर कार्ड के साथ रिपोर्टर्स ने बातचीत शुरु की।

मौसम का दावा- राजस्थान और बंगाल के कॉलेज का नेटवर्क है

मौसम ने कहा, देखिए 545 नंबर पर सामान्य तरीके से सरकारी मेडिकल कॉलेज एडमिशन मिलना मुश्किल है, लेकिन मेरे पास सरकारी कॉलेज में एडमिशन कराने का रास्ता है। इसके लिए फीस ज्यादा देनी होगी। कई कोटे हैं अपने पास।

हम किसी न किसी कोटे से स्टूडेंट्स की सीट सेट करा देंगे। राजस्थान और बंगाल के सरकारी कॉलेज के लिए मेरे पास नेटवर्क है। दोनों स्टेट में काम हो जाएगा।

सरकारी कॉलेज में एडमिशन लेने के कई फायदे हैं, एडमिशन तो पूरा जुगाड़ से होगा, लेकिन इसका फायदा स्टूडेंट्स को आगे मिलेगा। इसी वजह से लोग सरकारी कॉलेज के लिए इतना पैसा खर्च करने को तैयार होते हैं।

सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल से सेटिंग का दावा

बिहार की रहने वाली और बंगाल में नेटवर्क चलाने वाली मौसम ने दावा किया कि उसकी सेटिंग सरकारी कॉलेजों में तगड़ी है। वह सीधा प्रिंसपल से डील करा देगी।

मौसम ने कहा, आप बंगाल आइए एक लाख रुपए जमा कर दीजिए और फिर मैं प्रिंसपल से आमने-सामने डील करा दूंगी। इसके लिए कोलकाता आना पड़ेगा।

रिपोर्टर ने पूछा कि क्या कॉलेज में जाकर सीधे बात होगी? मौसम ने कहा कि हां, कॉलेज में बैठकर बात हो सकती है।

रिपोर्टर ने सवाल किया कि किस कॉलेज में बात होगी तो मौसम ने दावा किया कि राजस्थान के साथ पश्चिम बंगाल के कई सरकारी कॉलेजों में वह आमने-सामने बैठाकर डील करा देगी। मौसम ने राजस्थान और बंगाल के कई कॉलेजों का नाम लिया।

मौसम ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (कोलकाता), एसएसकेएम मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (कोलकाता), नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (कोलकाता) जैसे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन कराने का दावा किया।

रिपोर्टर ने पूछा कि अगर हमें कॉलेज में जाकर देखना हो तो क्या करना होगा? मौसम ने कहा कि सरकारी कॉलेज में आम आदमी सीधे जाकर इस तरह बातचीत नहीं कर सकता। उसके मुताबिक पहले उनके ऑफिस आना होगा और वहां से कॉलेज में ले जाकर मुलाकात कराई जाएगी।

पहले MCC रजिस्ट्रेशन, फिर कॉलेज ले जाने की बात

मौसम ने बातचीत में एक बात पर खास जोर दिया कि पहले MCC में रजिस्ट्रेशन करना होगा। उसने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन के आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती। रिपोर्टर ने पूछा कि क्या पहले कॉलेज में जाकर बात नहीं हो सकती?

मौसम ने कहा कि पहले रजिस्ट्रेशन जरूरी है। उसके बाद ही कॉलेज में बात कराने का दावा किया। उसने यह भी कहा कि अगर रजिस्ट्रेशन करने में कोई परेशानी होती है तो उसका नेटवर्क फोन पर स्टेप-बाय-स्टेप मदद करेगा। कैफे जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने की बात भी कही।

बिहार के एजेंटस के देश में नेटवर्क एक्टिव होने का दावा रुपेश ने भी किया है। रुपेश पटना के बोरिंग रोड से एडमिशन की कड़ी जोड़ता है। कैंडिडेट्स बनकर अलग-अलग डेट्स में पहुंचे भास्कर के अंडर कवर रिपोर्टर्स से रूपेश ने एडमिशन के बहाने देश के कई राज्यों में सेटिंग का खुलासा किया।

रूपेश का दावा- ब्लैक मनी लाइए, एडमिशन में खप जाएगी

मेरा नेटवर्क बिहार के बाहर के मेडिकल कॉलेजों तक भी है। बैंगलुरु में भी अपना ऑफिस है। देश के किसी भी राज्य में एडमिशन चाहिए, यहां से ही सेटिंग हो जाएगी।

कर्नाटक के निजी मेडिकल कॉलेजों में 213 से 250 अंक वाले स्टूडेंट्स के लिए करीब 1 करोड़ से 1.50 करोड़ रुपए तक के बजट में काम हो जाएगा। करीब 1.40 करोड़ रुपए के एडमिशन में 36 लाख रुपए कॉलेज फीस और करीब 40 लाख रुपए ब्लैक में देने होंगे।

वहीं अगर 1.75 करोड़ रुपए के बजट में पहले साल करीब 84 लाख रुपए देने होंगे, जिसमें करीब 44 लाख रुपए कॉलेज फीस और करीब 40 लाख रुपए अलग से बलैक में देने होंगे।

पश्चिम बंगाल, राजस्थान, चेन्नई और पुडुचेरी में भी एडमिशन हो जाएगा। पश्चिम बंगाल में करीब 1.05 से 1.10 करोड़ रुपए, राजस्थान में करीब 1.05 करोड़ रुपए और हिमालयन मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 1.15 करोड़ रुपए का बजट हो सकता है।

बैंक गारंटी से बचने के लिए 2 साल की फीस पहले लेने का दावा

पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए रूपेश ने बैंक गारंटी की व्यवस्था भी बताई। कुछ कॉलेजों में फीस की बड़ी पैसे की बैंक गारंटी मांगी जाती है। परिवार के पास इतनी बड़ी बैंक गारंटी नहीं होने पर कॉलेज पहले ही दो साल की फीस लेने का विकल्प अपनाता है।

ऐसे मामलों में आधिकारिक फीस के साथ और पैसों डिमांड की जाती है। जब उससे पूछा गया कि अतिरिक्त पैसे कॉलेज के नाम पर लिए जाते हैं या नहीं, तो रूपेश ने दावा किया कि मेडिकल कॉलेज सीधे तौर पर ऐसा पैसे नहीं लेते।

उसके अनुसार, पैसा देने का तरीका अलग होता है और एजेंट के जरिए इसे मैनेज कराया जाता है। रूपेश ने यह भी दावा किया कि बेंगलुरु में उसका अपना ऑफिस है और एडमिशन से जुड़ी सारी व्यवस्था वहीं से कराई जाती है। रूपेश के इस खुलासे से बिहार के एजेंट्स के देश में फैले नेटवर्क का भी खुलासा हुआ।

बिहार के एजेंट्स ने हर स्टेट में तैयार किए लोकल एजेंट्स

इन्वेस्टिगेशन में यह सामने आया कि बिहार के एजेंट्स पूरे देश में फैले हैं। इन्वेंस्टिगेशन में यह भी खुलासा हुआ कि बिहार के रहने वाले एजेंट्स ने ही देश में कई लोकल एजेंट्स खडे किए हैं जो अलग-अलग राज्यों में MBBS की सीट बेच रहे हैं। लोकल एजेंट्स तैयार करने के पीछे बिहार के एजेंट्स की मंशा है कि उस स्टेट में उनका विरोध ना हो।