भाद्रपद मास की मासिक शिवरात्रि 9 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है। चतुर्दशी तिथि 9 सितंबर दोपहर 12:30 बजे से शुरू होगी और 10 सितंबर सुबह 10:33 बजे तक रहेगी। जानें निशीथ काल और पूजा विधि।
Masik Shivratri 2026
- Published: 09 Sep 2026, 08:57 AM IST
- Last Updated: 09 Sep 2026, 08:57 AM IST
Masik Shivratri 2026: भगवान शिव की आराधना के लिए खास मानी जाने वाली भाद्रपद मास की मासिक शिवरात्रि आज यानी 9 सितंबर को मनाई जा रही है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और रात में निशीथ काल के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। पंचांग के अनुसार, इस बार शिव पूजा के लिए निशीथ काल रात 11:55 बजे से 12:41 बजे तक रहेगा।
आज है भाद्रपद की मासिक शिवरात्रि
हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। भाद्रपद मास की मासिक शिवरात्रि इस बार 9 सितंबर 2026, बुधवार को पड़ रही है।
इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान शिव का ध्यान करते हैं, व्रत रखते हैं और रात के समय शिवलिंग का अभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धा के साथ शिव आराधना करने से भक्तों को मानसिक शांति और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होने की कामना की जाती है।
कब से कब तक रहेगी चतुर्दशी तिथि?
पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 9 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे शुरू होगी। इसका समापन 10 सितंबर 2026 को सुबह 10:33 बजे होगा।
मासिक शिवरात्रि की पूजा के लिए रात में पड़ने वाले निशीथ काल को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी आधार पर इस बार मासिक शिवरात्रि का व्रत 9 सितंबर को रखा जा रहा है।
मासिक शिवरात्रि पर निशीथ काल कब है?
9 सितंबर की रात भगवान शिव की पूजा के लिए निशीथ काल महत्वपूर्ण रहेगा।
निशीथ काल: रात 11:55 बजे से 12:41 बजे तक
इस अवधि में श्रद्धालु भगवान शिव का अभिषेक और पूजा कर सकते हैं। हालांकि, पूजा का स्थानीय समय स्थान के अनुसार कुछ अलग हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
मासिक शिवरात्रि पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
मासिक शिवरात्रि के दिन पूजा की शुरुआत भगवान शिव के ध्यान और व्रत के संकल्प के साथ की जा सकती है। इसके बाद शाम या रात में पूजा की तैयारी करें।
पूजा के दौरान सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद परंपरा के अनुसार दूध, दही, शहद और घी आदि से अभिषेक किया जा सकता है। अंत में दोबारा साफ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें।
इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और भगवान शिव की आरती करें।
पूजा की आसान विधि
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
- रात में शिवलिंग का जलाभिषेक करें।
- परंपरा के अनुसार दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें।
- ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
- भगवान शिव की आरती करें।
- अपनी मनोकामना के साथ सुख-शांति की प्रार्थना करें।
- मासिक शिवरात्रि पर क्यों की जाती है शिव पूजा?
धार्मिक परंपरा में मासिक शिवरात्रि को भगवान शिव की उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से भक्त भगवान शिव से अपने जीवन की परेशानियों को दूर करने और सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाना भी शिव पूजा की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं और पूजा की विधियों में क्षेत्र तथा परिवार की परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।
पूजा के समय इन बातों का रखें ध्यान
मासिक शिवरात्रि की पूजा में श्रद्धा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें और अभिषेक के बाद शिवलिंग को स्वच्छ जल से जरूर स्नान कराएं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा की विधि को लेकर अपने क्षेत्र और परिवार में प्रचलित परंपरा का पालन करें। निशीथ काल और अन्य पूजा मुहूर्त स्थान के अनुसार बदल सकते हैं।
नोट: तिथि, मुहूर्त और धार्मिक महत्व से जुड़े विवरण पंचांग एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों के पंचांग में समय में अंतर संभव है।