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जानें मासिक शिवरात्रि से जुड़ी हर बात
Masik Shivratri July 2026: धर्म ग्रंथों के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि व्रत किया जाता है। मान्यता है कि ये व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस बार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 दिन रहेगी जिसके चलते ये व्रत कब करें, इसे लेकर कन्फ्यूजन हो रहा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट से जानें जुलाई 2026 में मासिक शिवरात्रि की सही डेट, पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त की डिटेल…
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जुलाई 2026 में कब करें मासिक शिवरात्रि व्रत?
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मासिक शिवरात्रि 2026 पूजा मुहूर्त
मासिक शिवरात्रि में महादेव की पूजा रात में 4 बार की जाती है, लेकिन ऐसा न कर पां तो निशिता काल में एक बार पूजा करके भी आप इस व्रत का पूरा फल पा सकते हैं। 12 जुलाई, रविवार को निशिता काल का शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 07 मिनिट से 12 बजकर 47 मिनिट तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 40 मिनिट का समय मिलेगा।
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कैसे करें मासिक शिवरात्रि व्रत? जानें पूजा विधि-मंत्र
- 12 जुलाई, रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। पूरे दिन व्रत के नियमों का पूरी श्रद्धा से पालन करें।
- रात में शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की सभी सामग्री एक स्थान पर रख लें। सबसे शिवलिंग का गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें।
- इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, और चंदन अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाकर धूप-दीप से पूजा करें। पूजा में बिल्व पत्र जरूर चढ़ाएं। इसके बिना महादेव की पूजा अधूरी मानी जाती है।
- पूजा करते समय मन ही मन में ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। भगवान शिव को अपनी इच्छा अनुसार भोग लगाएं।
- इसके बाद विधि-विधान से भगवान शिव की आरती करें। रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करना भी शुभ माना जाता है।
- अगले दिन सुबह यानी 13 जुलाई, सोमवार की सुबह व्रत का पारण कर जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें।
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शिवजी की आरती लिरिक्स हिंदी में (ऊं जय शिव ओंकारा)
ऊं जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज, दशभुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघाम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमंडलु, चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुःखहारी, जगपालनकारी॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये, ये तीनों एका॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
काशी में विश्वनाथ विराजत, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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