धर्म एवं ज्योतिष न्यूज़ डेस्क, 2 अक्टूबर 2026: भाद्रपद शुक्ल अष्टमी दिनांक 18 सितंबर 2026 से प्रारंभ हुए महालक्ष्मी व्रत का उद्यापन आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी 3 अक्टूबर और पारण 4 अक्टूबर को होगा। हम यहां पर उद्यापन पूजा का मुहूर्त समय, सामग्री, विधि एवं पारण की विधि इत्यादि को सरल हिंदी में बता रहे हैं:-
3 अक्टूबर तो उदयातिथि थी नहीं है फिर महालक्ष्मी व्रत के उद्यापन क्यों?
भारत में दूसरों का व्रत 16 दिन तक चलता है। इसका उद्यापन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है। इस दिन "गजलक्ष्मी" अर्थात हाथी पर सवार महालक्ष्मी का पूजन किया जाता है। 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:00 बजे से अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। इस हिसाब से 3 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो रही है। वैष्णव मान्यता के अनुसार यह उदया तिथि नहीं है लेकिन अष्टमी तिथि का समापन 4 अक्टूबर को सुबह सूर्योदय से पूर्व 05:52 बजे हो रहा है। इसलिए दोनों दोनों में उदयातिथी नहीं मिल रही है। अतः 3 अक्टूबर को दिनभर और रात भर अष्टमी तिथि होने के कारण, महालक्ष्मी व्रत का उद्यापन किया जाएगा।
महालक्ष्मी, गज लक्ष्मी हाथी पूजा का शुभ मुहूर्त
- मध्याह्न पूजा के लिए: 11:46 AM से 12:34 PM तक।
- मुख्य गज लक्ष्मी पूजा समय: गोधूलि 06:05 PM से 07:18 PM तक।
- दीपदान एवं कथा वाचन: प्रदोष काल 06:05 PM से 08:32 PM तक।
'व्रतराज' ग्रंथ के अनुसार, जो साधक 16 दिनों तक पूर्ण नियम से अथवा केवल अंतिम दिन (अष्टमी तिथि) को भक्तिभाव से गजलक्ष्मी का पूजन करता है, उसके कुल में आठों पीढ़ियों तक दरिद्रता का वास नहीं होता।
1. आवश्यक पूजन सामग्री की पूरी सूची
मुख्य प्रतिमा एवं मण्डप हेतु:
- मिट्टी या धातु के हाथी पर विराजमान माँ गज लक्ष्मी की मूर्ति (या चित्र)।
- तांबे या पीतल का कलश, 1 जटावाला नारियल, लाल चुनरी, आम/अशोक के 5 या 8 पत्ते।
- वेदी एवं वस्त्र: चौकी, लाल सूती/रेशमी कपड़ा, पूजा हेतु अक्षत (चावल)।
- 16 की संख्या में अनिवार्य सामग्री (16 अंक का विधान):
- 16 दूर्वा (दूब घास) तथा 16 अक्षत के दाने,
- 16 कमल के फूल (या लाल गुलाब/गेंदे के फूल)16 लौंग,
- 16 छोटी इलायची तथा 16 सुपारी,
- 16 शृंगार सामग्री: सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, काजल, मेहंदी, महावर, शीशा, कंघी, पायल, इत्र, वस्त्र इत्यादि।
- 16 पकवान / नैवेद्य: पुआ (ठेकुआ), खीर, पूरी, हलवा, पंजीरी, 16 प्रकार की मिठाइयाँ/मेवे।
- 16 फल: (जैसे केला, अनार, सेब आदि मिलाकर कुल 16 फल)।
दैनिक पूजन सामग्री:
- रोली, चंदन, हल्दी, अष्टगंध, अबीर, गुलाल।
- गाय का शुद्ध घी, रुई की बत्ती, दीपक, धूपबत्ती, कर्पूर।
- गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)।
- 16 गांठों वाला धागा (डोरा): जो व्रत के प्रथम दिन धारण किया गया था।
उद्यापन हेतु पूर्व तैयारी (स्टेप-बाय-स्टेप)
एक दिन पूर्व या सुबह ही संपन्न करें.ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) या घर के मंदिर की अच्छे से सफाई करें। पूजा स्थान पर चौक (अल्पना या रंगोली) बनाएँ और लाल कपड़ा बिछाकर चौकी तैयार रखें।
16 पुआ (ठेकुआ) या पूड़ी-खीर का भोग ताजा एवं शुद्धता से बनाएँ। सभी 16 शृंगार सामग्री, 16 दूर्वा और 16 फलों की अलग-अलग ढेरी बनाकर थाली में सजा लें।
चंद्रमा को अर्घ्य देने हेतु.अर्घ्य देने के लिए एक तांबे के पात्र में जल, दूध, अक्षत और फूल मिलाकर रखें। साथ ही 16 सुहागिन महिलाओं या ब्राह्मणी को दान देने के लिए वस्त्र, शृंगार और भोजन की टोकरी (बायना) तैयार रखें।
