October 16, 2026

Maa Katyayani Ki Aarti: चारभुजाओं वाली माता कात्यायनी की पूजा में जरूर पढ़ें यह आरती, पूरी होगी हर मनोकामना

Maa Katyayani Ki Aarti: आज 16 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है. इस दिन दुर्गा माता के छठे स्वरूप माता कात्यायनी की पूजा करते हैं. शारदीय नवरात्रि के दौरान देवी मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिनमें से एक माता कात्यायनी भी होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कात्यायनी माता की उपासना करने से भक्त साहसी बनता है और सौंदर्य बढ़ता है. उनकी पूजा करते समय कात्यायनी माता की आरती जरूर करें. इस आर्टिकल में पढ़ें कात्यायनी माता की आरती, चालीसा के लिरिक्स और शक्तिशाली मंत्र. 

पढ़ें माता कात्यायनी की आरती (Katyayni Mata Aarti Lyrics in Hindi)

जय जय अम्बे जय कात्यायनी. जय जग माता जग की महारानी॥

बैजनाथ स्थान तुम्हारा. वहां वरदाती नाम पुकारा॥

कई नाम हैं कई धाम हैं. यह स्थान भी तो सुखधाम है॥

हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी. कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥

हर जगह उत्सव होते रहते. हर मन्दिर में भगत है कहते॥

कत्यानी रक्षक काया की. ग्रन्थि काटे मोह माया की॥

झूठे मोह से छुडाने वाली. अपना नाम जपाने वाली॥

बृहस्पतिवार को पूजा करिये. ध्यान कात्यानी का धरिये॥

हर संकट को दूर करेगी. भण्डारे भरपूर करेगी॥

जो भी मां को भक्त पुकारे. कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥

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कात्यायनी माता के मंत्र

1.मां कात्यायनी का मूल मंत्र

ऊं देवी कात्यायन्यै नमः॥

2.मां कात्यायनी का ध्यान मंत्र

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

3.विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने का मंत्र

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥

4.मां कात्यायनी की स्तुति का मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

5.मां कात्यायनी की आराधना का मंत्र

ऊं ह्रीं कात्यायन्यै स्वाहा॥

मां कात्यायनी के मंत्र जाप की विधि

  • मां कात्यायनी के सामने दीपक जलाएं और लाल या पीले फूल अर्पित करें.
  • श्रद्धा के साथ किसी एक मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करें.
  • पूजा के अंत में मां से सुख, शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें.

माता कात्यायनी की चालीसा ( Lyrics of Katyayni Mata ki Chalisa in Hindi)

दोहा

जय कात्यायनी मां,

जय महिषासुर मारिणी.

सुर नर मुनि आराधित,

जय मंगल करिणी॥

चौपाई

जय जय अंबे जय कात्यायनी.

जय महिषासुर घातिनी दानी..

ब्रह्मा, विष्णु, शिव जी ध्यावैं.

शक्ति शक्ति सब जगत बनावैं॥

रक्तदंतिका और अन्नपूर्णा.

मां कात्यायनी हैं सम्पूर्णा॥

कात्यायन ऋषि मुनि के आश्रय.

कात्यायनी मां सबके बासय॥

भय, संकट हरिणी तुही माता.

भक्तों के दुःख हरती आपा॥

जो कोई तेरी शरण में आवे.

मनवांछित फल वह नर पावे॥

ध्यान धार जो कोई नारी.

कात्यायनी पूर्ण सुखकारी..

कुमारी पुजा जो नित ध्यावें.

अविवाहित जीवन न बितावे॥

हर युग में मां तू सहाय.

जो भी भक्त करे मन लाय॥

कात्यानी मां तेरी महिमा.

सतयुमग त्रेता हो या द्वापर..

सिंह सवारी मां भवानी.

जय-जय-जय अम्बे भवानी॥

कात्यायनी चालीसा का पाठ करने के लाभ

  • विवाह में सफलता और शीघ्र विवाह के लिए कात्यायनी माता की आराधना की जाती है.
  • संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए महिलाएं कात्यायनी चालीसा पढ़ सकती है.
  • कात्यायनी माता की चालीसा का नियमित पाठ करने से शरीर के पुराने से पुराने रोग उबर जाते हैं. इससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों ही संतुलित रहते हैं.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)