
विजयादशमी 2026Image Credit source: pexels
Vijayadashami 2026: सनातन संस्कृति में नवरात्रि का पावन पर्व और विजयादशमी का त्योहार इस बात का प्रतीक है कि अहंकार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है. पूरे नौ दिनों तक आदिशक्ति मां दुर्गा और महाबली असुर महिषासुर के बीच भयंकर संग्राम चला था, जिसके दसवें दिन यानी विजयादशमी पर देवी ने उसका वध कर तीनों लोकों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था. लेकिन इस पूरी पौराणिक कथा में सबसे दिलचस्प और विचारणीय बिंदु वह वरदान है, जिसे पाकर महिषासुर सातवें आसमान पर पहुंच गया था और खुद को अमर समझ बैठा था. आइए जानते हैं कि उस असुर ने ब्रह्मा जी से वास्तव में क्या मांगा था और उसकी कौन सी बड़ी भूल उसके सर्वनाश की वजह बनी.
कठोर तपस्या और अमरता पाने की जिद
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर बहुत ही महत्वाकांक्षी और पराक्रमी असुर था. वह संसार के सभी लोकों पर अपना आधिपत्य जमाना चाहता था. अमर होने की लालसा में उसने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए जंगल में सालों तक बेहद कठिन और घोर तपस्या की. उसकी इस अखंड साधना से प्रसन्न होकर आखिर में ब्रह्मा जी प्रकट हुए और उससे अपनी इच्छा अनुसार वरदान मांगने को कहा. बिना एक पल गंवाए महिषासुर ने हाथ जोड़कर कहा, हे सृष्टि के रचयिता, मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि इस संसार में मेरी कभी मृत्यु न हो और मैं हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो जाऊं.
सृष्टि का नियम और महिषासुर की चालाकी
भगवान ब्रह्मा ने महिषासुर की बात सुनकर उसे प्रेमपूर्वक समझाया कि यह ब्रह्मांड के नियमों के विरुद्ध है. इस धरती पर जिस भी प्राणी ने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु अटल है. इसलिए अमरता को छोड़कर कोई दूसरा वरदान मांग लो. जब महिषासुर को यह अहसास हुआ कि सीधी तरह से अमरता मिलना असंभव है, तो उसने अपने कुटिल दिमाग से एक चाल चली. उसने सोचा कि यदि वह मृत्यु से बचने का ऐसा रास्ता निकाल ले, जिस पर किसी का ध्यान न जाए, तो वह कभी नहीं मरेगा.उसने ब्रह्मा जी से कहा, प्रभु यदि मृत्यु होना ही तय है, तो मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि संसार का कोई भी देवता, असुर, दानव, यक्ष या कोई भी शक्तिशाली पुरुष मेरा वध न कर सके. मेरी मृत्यु केवल और केवल किसी स्त्री के हाथों ही हो.
स्त्री को कमजोर समझने की भूल और अहंकार
महिषासुर को लगता था कि इस ब्रह्मांड में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) सहित बड़े-बड़े योद्धा और देवता पुरुष हैं, जिन्हें हराना नामुमकिन है. उसकी नजर में स्त्री बेहद कोमल, नाजुक और दुर्बल होती है, जो कभी भी रणक्षेत्र में शस्त्र उठाने या युद्ध करने योग्य नहीं हो सकती. इसी अति-आत्मविश्वास और स्त्री जाति को कमजोर आंकने की भूल के कारण उसने मान लिया कि अब उसे कोई नहीं मार सकता और वह धरती पर अमर हो चुका है. वरदान मिलते ही उसने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और देवराज इंद्र को सिंहासन से बेदखल कर तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया.
त्रिदेवों के तेज से प्रकट हुई मां दुर्गा
महिषासुर के अत्याचार जब सहनशीलता की सीमा पार कर गए, तब सभी देवता अपनी रक्षा की गुहार लेकर भगवान विष्णु और शिव के पास पहुंचे. महिषासुर के उस विशेष वरदान की काट निकालने के लिए सभी त्रिदेवों और देवताओं ने अपने-अपने दिव्य तेज को एक जगह केंद्रित किया. इस अलौकिक ऊर्जा के मिलन से आदिशक्ति माँ दुर्गा प्रकट हुईं. देवताओं ने माता को अपने सबसे शक्तिशाली अस्त्र-शस्त्र और सवारी के रूप में सिंह भेंट किया.
नौ दिनों का महासंग्राम और अंत
मां दुर्गा ने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा. दोनों के बीच लगातार नौ दिनों तक घमासान युद्ध हुआ. महिषासुर ने अपनी मायावी शक्तियों से कई रूप बदले, लेकिन दसवें दिन मां दुर्गा ने अपने त्रिशूल से उसका वध कर दिया.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. .

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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