Aug 27, 2026 05:53 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

मुख्य बातें
- LPG: रसोई गैस कनेक्शन पर रोक अभी भी जारी है, जबकि सरकार ने LPG पर से अन्य कई तरह के बैन महीनों पहले हटा लिए थे
- मार्च से आवेदन अटके पड़े हैं
- जबकि, 5 किलो और 10 किलो सिलेंडर सहारा तो बने हैं, लेकिन पर लोग पक्का कनेक्शन चाहते हैं

नया LPG कनेक्शन कब मिलेगा?
दिल्ली देश में लोग अब भी नए अमेरिका से एलपीजी आयात बढ़ा, फिर भी रसोई गैस सिलेंडर के नए कनेक्शन पर अभी भी ब्रेक है। चाहे आप इंडेन के लिए अप्लाई करें या भारत गैस के लिए या फिर एचपी गैस पर आवेदन दें, अभी हर जगह से आपको निराशा ही हाथ लगेगी। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई के डिस्ट्रीब्यूटरों का कहना है कि मार्च के मध्य से उन्होंने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलो वाले सिलेंडर का कोई नया कनेक्शन जारी नहीं किया है।
नए कनेक्शन पर क्या है सरकार का ताजा बयान
पश्चिम एशिया संकट के चरम पर लगाई गई दूसरी पाबंदियां हटने के महीनों बाद भी नए एलपीजी कनेक्शन के आवेदन रुके हुए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जवाब देते हुए कहा, “मौजूदा भू-राजनीतिक हालात के चलते नए एलपीजी कनेक्शन जारी करना फिलहाल रोक दिया गया है। अभी डिस्ट्रीब्यूटर मौजूदा उपभोक्ताओं को रिफिल सप्लाई देने को प्राथमिकता दे रहे हैं ताकि जरूरी सेवाएं बाधित न हों।” मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह “अस्थायी कदम” है और हालात स्थिर होते ही नए कनेक्शन फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
डिस्ट्रीब्यूटरों ने इस पर क्या कहा
फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑफ इंडिया (FLDI) के महासचिव पवन सोनी ने द हिंदू को बताया कि फिलहाल सप्लाई की स्थिति ठीक है, लेकिन लंबी अवधि में ऐसी ही रहेगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “कोई नहीं जानता कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कितने जहाज एलपीजी लेकर आ पाएंगी, क्योंकि पश्चिम एशिया की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। साथ ही मांग के हिसाब से भंडारण क्षमता का भी कुशलता से प्रबंधन करना होगा।”
नए कनेक्शन के लिए हर दिन आ रहे अप्लीकेशन
ऑल-इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन की पश्चिम बंगाल इकाई के उपाध्यक्ष बिजन बिहारी विश्वास के मुताबिक, राज्य भर में हर डिस्ट्रीब्यूटर के पास औसतन 100 से 120 नए कनेक्शन के आवेदन लंबित हैं। उन्होंने कहा, “लेकिन हमने देखा है कि ज्यादातर आवेदक अस्थायी तौर पर फ्री-ट्रेड एलपीजी सिलेंडर लेने के बजाय नए घरेलू कनेक्शन का इंतजार करना पसंद करते हैं।”
कनेक्शन नहीं है तो क्या है वैकल्पिक व्यवस्था
देश भर के कई डिस्ट्रीब्यूटरों ने इंतजार कर रहे लोगों को अस्थायी उपाय के तौर पर पांच किलो वाले फ्री-ट्रेड (FTL) सिलेंडर और 10 किलो वाले कंपोजिट सिलेंडर लेने की सलाह दी है। फिलहाल पांचों बड़े शहरों में इन छोटे सिलेंडरों की मांग अलग-अलग है। दिल्ली के एक डिस्ट्रीब्यूटर ने कहा, “स्वाभाविक है कि जब नए कनेक्शन नहीं मिल रहे तो इनकी बिक्री बढ़ी है।”
चेन्नई के एक OMC के अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हमने डिस्ट्रीब्यूटरों से कहा है कि जो भी नया कनेक्शन मांगे, उसे 5 किलो का एफटीएल कनेक्शन जारी करें।” अधिकारी ने आगे कहा, “दस किलो के सिलेंडर उपलब्ध तो हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि हर डिस्ट्रीब्यूटर के पास हों।”
मुंबई और दिल्ली दोनों जगहों पर 5 किलो एफटीएल सिलेंडर की बिक्री में तेजी देखी गई है। हालांकि, कोलकाता के डिस्ट्रीब्यूटरों का कहना है कि वहां मांग खास ज्यादा नहीं है।
अब LPG की कोई कमी नहीं, फिर नए कनेक्शन क्यों नहीं
पश्चिम एशिया संघर्ष से पहले भारत अपनी एलपीजी जरूरत का 60 फीसदी आयात करता था, जिसमें से 90 फीसदी होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता था। संकट के दौरान भारत ने कम आयात के असर को कम करने के लिए अपना घरेलू उत्पादन बढ़ाया।
हालांकि, पश्चिम एशिया में बार-बार तनाव बढ़ने की वजह से डिस्ट्रीब्यूटरों को नए कनेक्शन जारी करने की मंजूरी नहीं मिल पाई है। फिलहाल भारत अपनी एलपीजी जरूरत का 67 फीसदी अमेरिका से आयात करता है, जो पहले के पश्चिम एशियाई स्रोतों की तुलना में कहीं लंबी समुद्री यात्रा वाला रास्ता है।
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Drigraj Madheshia
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
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