Aug 20, 2026 05:41 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
मुख्य बातें
- इंडियन ऑयल ने 2027 में LPG आयात करने के लिए अल्जीरिया की सोनाट्रैक के साथ एक डील पक्की कर ली है
- डील के तहत इंडियन ऑयल हर महीने एक बड़े गैस कैरियर के जरिए करीब 45,000 से 55,000 मीट्रिक टन LPG आयात करेगी

इंडियन ऑयल ने LPG सप्लाई को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया
भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने अपनी LPG सप्लाई को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इससे ना सिर्फ घरेलू एलपीजी सिलेंडर को लेकर दबाव कम होगा बल्कि आयात के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम होगी। आइए डिटेल में जान लेते हैं।
क्या है फैसला?
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक खबर के मुताबिक इंडियन ऑयल कॉर्प ने 2027 में LPG आयात करने के लिए अल्जीरिया की सोनाट्रैक (Sonatrach) के साथ एक डील पक्की कर ली है। इस खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि डील के तहत इंडियन ऑयल हर महीने एक बड़े गैस कैरियर के जरिए करीब 45,000 से 55,000 मीट्रिक टन LPG आयात करेगी। इसमें मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होगा, जिसका इस्तेमाल भारत में बड़े पैमाने पर खाना पकाने के लिए किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी रिटेलर कंपनियां - इंडियन ऑयल कॉर्प, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प और भारत पेट्रोलियम कॉर्प, अमेरिका से LPG आयात करने के लिए एक संयुक्त टेंडर जारी कर सकती हैं।
रॉयटर्स से एक सूत्र ने बताया कि कुछ साल पहले तक इंडियन ऑयल का सोनाट्रैक के साथ एक तय समय का समझौता था लेकिन बाद में कंपनी ने मिडिल ईस्ट से खरीदारी शुरू कर दी। एक दूसरे सूत्र ने बताया कि अल्जीरिया की LPG की कीमतें सऊदी अरामको की कॉन्ट्रैक्ट कीमत से कम हैं। इसके साथ ही, इंडियन ऑयल का सोनाट्रैक के साथ समझौता 'फ्री-ऑन-बोर्ड' (FOB) आधार पर कार्गो उठाने का है। इसका मतलब है कि कार्गो को जहाज पर लोड करने के बाद आगे की समुद्री ढुलाई और उससे जुड़े जोखिम खरीदार की जिम्मेदारी होती है। कहने का मतलब है कि इंडियन ऑयल सस्ती कीमतों पर एलपीजी आयात करने की तैयारी में है।
मिडिल ईस्ट पर निर्भरता घटाने की कोशिश
बता दें कि भारत लंबे समय से अपनी LPG जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर रहा है लेकिन हाल के महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से चिंता बढ़ी है। इस दौरान भारत को LPG की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कुछ स्तर पर आपूर्ति प्रबंधन और राशनिंग जैसे कदमों का सहारा लेना पड़ा। वहीं, इस संकट की वजह से घरेलू स्तर पर एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। इसके अलावा, बुकिंग और डिलीवरी से जुड़े नियमों को सख्त किया गया। इस माहौल के बाद अब सरकार और तेल कंपनियां LPG आयात के स्रोतों को ज्यादा से ज्यादा देशों तक फैलाने की कोशिश कर रही हैं।
