
शिवजी के गले में सांप क्यों है?Image Credit source: pexels
Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है. इसी महीने नाग पंचमी का पर्व भी आता है, जब नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है. भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर में आपने अक्सर उनके गले में सर्प लिपटा हुआ देखा होगा. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि महादेव के गले में ही नाग क्यों विराजमान रहते हैं? धार्मिक मान्यताओं में इसके पीछे कई गहरे अर्थ बताए गए हैं. आइए विस्तार से जानते हैं.
भगवान शिव के गले में क्यों रहता है नाग?
हिंदू धर्म में सर्प को केवल एक सामान्य जीव के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि उसे शक्ति, रहस्य, कुंडलिनी और संरक्षण से जोड़कर भी देखा जाता है. भगवान शिव के गले में नाग का होना उनकी निर्भयता और प्रकृति पर नियंत्रण का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव मृत्यु और भय से परे हैं. सर्प को आमतौर पर भय का प्रतीक माना जाता है, लेकिन महादेव ने उसे अपने गले में धारण कर यह संदेश दिया कि जो व्यक्ति भय पर विजय प्राप्त कर लेता है, उसके लिए मृत्यु का डर भी समाप्त हो जाता है.
नाग शिव के गले में होने का क्या है धार्मिक अर्थ?
भगवान शिव के गले में लिपटा सर्प कई प्रतीकों को दर्शाता है. सबसे प्रमुख अर्थ समय और मृत्यु से जुड़ा माना जाता है. सर्प अपनी केंचुली छोड़ता है और नया रूप धारण करता है. इसे जीवन के निरंतर परिवर्तन और पुनर्निर्माण का प्रतीक माना जाता है. वहीं, शिव को कालों का काल कहा जाता है. उनके गले में नाग का होना इस बात का संकेत माना जाता है कि महादेव काल और मृत्यु से भी ऊपर हैं.
वासुकि नाग का शिव से क्या संबंध है?
धार्मिक कथाओं में भगवान शिव के गले में विराजमान नाग को वासुकि नाग बताया गया है. समुद्र मंथन की कथा में भी वासुकि नाग के विशेष में बताया गया है. देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन के लिए वासुकि नाग को मंदराचल पर्वत के चारों ओर रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया था. समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला तो उसकी तीव्रता से पूरी सृष्टि संकट में पड़ गई. तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया. इसी वजह से उनका नाम नीलकंठ पड़ा. भगवान शिव और नाग के संबंध को इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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