पटना में बारिश, LNJP अस्पताल परिसर में घुटनों तक पानी: जलजमाव में कंधे के सहारे वार्ड तक पहुंचे मरीज, डॉक्टरों का चेंबर भी जलमग्न; फैली गंदगी - Patna News
पटना31 मिनट पहले
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“पूरे अस्पताल में पानी ही पानी है। घुटने तक पानी जमा है। आने-जाने में बहुत परेशानी हो रही है। इलाज से ज्यादा मुश्किल अस्पताल तक पहुंचने में हो रही है।”, यह कहना है बख्तियारपुर से नस का इलाज कराने आईं मालती देवी का।
दरअसल, रातभर हुई तेज बारिश के बाद शनिवार सुबह पटना के लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल में मरीजों का स्वागत डॉक्टरों ने नहीं, बल्कि घुटनों तक भरे पानी ने किया।
अस्पताल परिसर में कदम रखते ही ऐसा लगा मानो किसी अस्पताल नहीं, बल्कि जलमग्न परिसर में जा रहे हों। मेन गेट से लेकर ओपीडी, वार्ड और डॉक्टरों के चेंबर तक बारिश का पानी भर चुका था।
मरीज, उनके परिजन और अस्पताल कर्मी पानी भरे रास्ते, गलियारे से चलते हुए अस्पताल के भीतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे।
दैनिक भास्कर की टीम ने LNJP अस्पताल पहुंचकर वहां जलजमाव का जायजा लिया। इस दौरान हमने परेशान मरीजों और उनके परिजनों से बात की। देखिए अस्पताल की स्थिति पर पूरी रिपोर्ट…
मूसलाधार बारिश के चलते पटना का LNJP अस्पताल परिसर में घुटनों तक पानी भर गया।
इलाज कराने आए थे, जलजमाव से जूझना पड़ रहा है- बेबी देवी
LNJP बिहार का सबसे बड़ा सरकारी हड्डी रोग अस्पताल है। यहां हर दिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन शनिवार की सुबह अस्पताल इलाज से ज्यादा जलजमाव की वजह से चर्चा में रहा।
गर्दनीबाग की रहने वाली बेबी देवी भी अपने परिजन के इलाज के लिए अस्पताल पहुंची थीं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इलाज कराने आए लोगों को जलजमाव से जूझना पड़ रहा रहा है। अगर किसी गंभीर मरीज को स्ट्रेचर पर लाना पड़े, तो मुसीबत बढ़ सकती है।
व्हीलचेयर रुकी, परिजन बने सहारा
अस्पताल परिसर में सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हुई, जो चलने-फिरने में असमर्थ थे। कई जगह व्हीलचेयर पानी में फंस गईं। स्ट्रेचर ले जाने में कर्मचारियों को मशक्कत करनी पड़ी।
कुछ परिजनों ने मजबूरी में मरीजों को गोद या कंधे के सहारे उठाकर ओपीडी तक पहुंचाया, लेकिन अस्पताल के भीतर भी जलमग्न था। हर तरफ फर्श पर पानी ही पानी भरा हुआ था।
पैर का इलाज कराने आए मरीज को व्हीलचेयर की जगह स्ट्रेचर के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया।
डॉक्टरों के चेंबर तक पहुंचा पानी
पानी में फिसलन इतनी अधिक थी कि बुजुर्ग मरीज हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे थे। ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीजों और उनके परिजनों की चिंता भी साफ नजर आ रही थी।
स्थिति केवल अस्पताल परिसर तक सीमित नहीं रही। बारिश का पानी कई डॉक्टरों के चेंबर तक पहुंच गया। कुछ कमरों में पानी घुसने से चिकित्सा कार्य प्रभावित हुआ और मरीजों की जांच प्रक्रिया भी कुछ समय के लिए बाधित रही।
बारिश का पानी कई डॉक्टरों के चेंबर तक पहुंच गया।
अस्पताल के भीतर पानी में तैरती गंदगी, सफाई व्यवस्था चरमराई
अस्पताल के कई हिस्सों में गंदा पानी और कचरा तैरता दिखाई दिया। इससे संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। इलाज के लिए आए मरीजों को बीमारी से पहले जलजमाव और गंदगी से जूझना पड़ा।
अस्पताल परिसर के अंदर सफाई व्यवस्था पूरी तरगह चरमराई हुई दिखी।
नगर निगम की टीम पहुंची, शुरू हुई पानी निकासी
LNJP अस्पताल में जलजमाव की सूचना मिलने के बाद पटना नगर निगम की टीम अस्पताल पहुंची। मोटर पंप लगाकर पानी निकालने का काम शुरू किया गया।
कर्मचारियों ने नालियों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने की कोशिश की। ताकि अस्पताल परिसर से जल्द पानी निकाला जा सके।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव हुआ है। अस्पतालों सहित संवेदनशील स्थानों को प्राथमिकता देकर पानी निकाला जा रहा है।
जलजमाव से थमी पटना शहर की रफ्तार
बारिश का असर केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रहा। पटना की कई प्रमुख सड़कों पर पानी भरने से यातायात धीमा पड़ गया। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी हुई। कई जगह पानी में गाड़ी बंद हो गए। बाजारों में भी लोगों की आवाजाही कम रही और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।
देखिए शहर में जलजमाव की तस्वीर…
पटना के पत्थर की मस्जिद इलाके में जल जमाव के कारण रास्ते से गुजरना मुश्किल हो गया।
पटना के करबिगहिया इलाके के रास्तों में पानी भरने से गाड़ियों की आवाजाही धीमी हो गई।
पटना के न्यू पुनाईचक इलाके में रास्तों में भारी जल जमाव देखने को मिली।
हर साल वही तस्वीर, फिर भी नहीं बदले हालात
हर साल पटना में मानसून आते ही जलजमाव की समस्या सामने आने लगती है। यहां जगह-जगह जलजमाव की तस्वीरें नई नहीं हैं, लेकिन इस बार भी पहली तेज बारिश ने नगर निगम और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए।
राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पताल में गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। वहीं, घुटनों तक पानी भर जाना, शहर की जलनिकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को सामने लाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नालों की समय पर सफाई और स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था की कमी के कारण हर वर्ष यही हालात बनते हैं। बारिश खत्म होने के बाद पानी निकल जाता है, लेकिन व्यवस्था में सुधार की मांग अगले मानसून तक फिर ठंडी पड़ जाती है।
फिलहाल नगर निगम की टीम प्रभावित इलाकों में लगातार पानी निकालने के कार्य में जुटी हुई है। प्रशासन का दावा है कि जलजमाव वाले क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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