Updated On: Aug 07, 2026 | 10:21 AM IST
विज्ञापन
सार
CJP Kya Bolti Public Campaign: छत्रपति संभाजीनगर में सीजेपी ने पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी गठित कर चुनाव से दूरी और शिक्षा, बेरोजगारी व जनहित के मुद्दों पर देशव्यापी जनआंदोलन का ऐलान किया।

CJP का क्या बोलती पब्लिक कैम्पेन (सोर्स: सोशल मीडिया)
विस्तार
CJP Kya Bolti Public Campaign In India: राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से चर्चा में आए कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) ने छत्रपति संभाजीनगर में संपन्न दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में अपने भविष्य की रणनीति तय कर दी है। नीट आंदोलन की पृष्ठभूमि से उभरे इस संगठन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उसका तत्काल लक्ष्य चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि देशभर में जनदबाव तैयार कर सरकारों और राजनीतिक दलों को शिक्षा, बेरोजगारी, संविधान, न्याय व्यवस्था और युवाओं के मुद्दों पर जवाबदेह बनाना होगा।
इसी उद्देश्य से पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया और सितंबर से देशव्यापी ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान शुरू करने की घोषणा की गई। राजनीतिक दृष्टि से छत्रपति संभाजीनगर में संपन्न हुवी यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पहली बार संगठन ने आंदोलन से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर का संगठनात्मक ढांचा खड़ा करने की औपचारिक शुरुआत की है।
बैठक में तय किया गया कि देश को पांच क्षेत्रों में विभाजित कर प्रत्येक क्षेत्र में संगठन का विस्तार किया जाएगा। इसके बाद राज्य, जिला और तहसील स्तर तक समितियों का गठन होगा।
सम्बंधित ख़बरें
पार्टी की जिम्मेदारियां बांटी गईं
दो दिवसीय बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन रहा। अभिजीत दीपके संगठन के प्रमुख के रूप में नेतृत्व करेंगे। आशुतोष रांका को राष्ट्रीय संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रत्ना सिंह विधिक मामलों का दायित्व संभालेंगी, जबकि वैष्णवी गौर नीति एवं शोध प्रकोष्ठ का नेतृत्व करेंगी। सौरव दास को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है। बैठक में संगठन के विस्तार, सदस्यता अभियान और विभिन्न प्रकोष्ठों के गठन पर भी सहमति बनी।
चुनाव नहीं, जनदबाव की राजनीति
बैठक में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दोहराया कि सीजेपी फिलहाल किसी राजनीतिक दल के रूप में चुनाव नहीं लड़ेगी। संगठन स्वयं को ‘पब्लिक प्रेशर ग्रुप’ के रूप में विकसित करेगा। उनका कहना था कि किसी एक व्यक्ति या दल से देश की सभी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। इसलिए समाज के विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों और युवाओं को साथ लेकर मुद्दा आधारित जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
शिक्षा और बेरोजगारी को बनाया सबसे बड़ा मुद्दा
बैठक में कहा गया कि देश में शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है और निजी शिक्षण संस्थानों की बढ़ती फीस आम परिवारों की पहुंच से बाहर हो चुकी है। मेडिकल और इंजीनियरिंग शिक्षा में भारी शुल्क तथा प्रबंधन कोटे के नाम पर बड़ी राशि वसूले जाने पर चिंता व्यक्त की गई। बेरोजगारी को भी राष्ट्रीय संकट बताते हुए कहा गया कि लाखों डिग्रीधारी युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संगठन ने शिक्षा को अधिकार और रोजगार को सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की घोषणा की।
संविधान, न्यायपालिका और मीडिया पर भी चर्चा
बैठक में भारतीय संविधान की मूल भावना, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, न्याय व्यवस्था में आम नागरिकों को समय पर न्याय और मीडिया की निष्पक्षता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। संगठन ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि केवल जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाएगा।
यह भी पढ़ेः- DGP दाते बोले- Gen-Z युवाओं से संवाद जरूरी, केस वापसी की प्रक्रिया शुरू, अभिजीत दीपके पुलिस के संपर्क में
राष्ट्रीय राजनीति पर क्या होगा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सीजेपी अपने घोषित एजेंडे के अनुसार युवाओं, विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने में सफल होती है, तो आने वाले समय में यह चुनावी दल बने बिना भी राजनीतिक दलों पर मुद्दा आधारित दबाव बनाने वाली प्रभावशाली शक्ति बन सकती है। छत्रपति संभाजीनगर की यह बैठक इसी दिशा में पहला संगठित प्रयास मानी जा रही है। हालांकि, संगठन की वास्तविक ताकत का आकलन उसके देशव्यापी अभियान और जनसमर्थन के विस्तार के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
