Krishna Janmashtami Katha: कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. साल 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में आधी रात के समय मथुरा की कारागार में हुआ था. उनके जन्म की कथा में कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनका हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है. आपने जन्माष्टमी से जुड़ी कई कथाएं सुनी होंगी. लेकिन क्या आपको पता है कि जन्म के वक्त श्रीकृष्ण ने चतुर्भुज रूप क्यों दिखाया था? आइए जानते हैं इसके पीछे की कथा.
धार्मिक मान्यता है कि जब भगवान कृष्ण ने देवकी के गर्भ से जन्म लिया, तब उन्होंने सामान्य नवजात शिशु का रूप नहीं धारण किया था. जन्म के समय उन्होंने भगवान विष्णु का चतुर्भुज रूप धारण कर देवकी और वसुदेव को दर्शन दिए थे. उनके चार हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित थे. ये दिव्य स्वरूप देखकर देवकी और वसुदेव समझ गए कि उनके सामने कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु प्रकट हुए हैं.
पूर्व जन्म की तपस्या से जुड़ी है कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवकी और वसुदेव अपने पूर्व जन्म में पृश्नि और सुतपा नाम के दंपति थे. दोनों ने भगवान विष्णु को पुत्र रूप में पाने की इच्छा से कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया था कि वे स्वयं उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे. ऐसा कहा जाता है कि इसी वरदान के कारण भगवान ने देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया. जन्म के समय चतुर्भुज रूप में दर्शन देकर भगवान ने उन्हें ये भी बताया कि वे वही दिव्य सत्ता हैं, जिन्हें पाने के लिए उन्होंने पूर्व जन्म में तपस्या की थी.
देवकी ने भगवान से की थी ये प्रार्थना
भगवान कृष्ण के जन्म के समय मथुरा के राजा कंस का अत्याचार चरम पर था. उसे आकाशवाणी के जरिए पता चल चुका था कि देवकी का आठवां पुत्र ही उसका वध करेगा. इसी डर से कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर रखा था और उनके बच्चों को भी मार दिया था.
ऐसे में भगवान का दिव्य चतुर्भुज रूप देखकर देवकी को चिंता हुई कि अगर कंस को उनके जन्म का पता चल गया, तो वह उन्हें भी नुकसान पहुंचा सकता है. उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि वे अपना ये दिव्य स्वरूप छिपाकर एक सामान्य नवजात शिशु का रूप धारण कर लें. माता-पिता की प्रार्थना स्वीकार करते हुए भगवान कृष्ण ने अपना चतुर्भुज स्वरूप त्यागकर साधारण बालक का रूप धारण कर लिया. इसके बाद भगवान की लीला शुरू हुई और वसुदेव उन्हें कंस से बचाने के लिए आधी रात को मथुरा से गोकुल लेकर निकल पड़े.
वसुदेव कृष्ण को लेकर पहुंचे गोकुल
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान की माया से कारागार के पहरेदार गहरी नींद में सो गए और जेल के दरवाजे अपने आप खुल गए. वसुदेव नवजात कृष्ण को टोकरी में लेकर यमुना पार करते हुए गोकुल पहुंचे. वहां उन्होंने कृष्ण को नंद बाबा और यशोदा के घर पहुंचाया.
इसी बाल रूप में भगवान कृष्ण का पालन-पोषण गोकुल में हुआ और आगे चलकर उन्होंने कंस का वध कर धरती को उसके अत्याचार से मुक्त कराया. इसलिए जन्माष्टमी पर भगवान के जन्म के साथ उनके चतुर्भुज रूप में दर्शन देने की ये कथा भी विशेष रूप से याद की जाती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

सना चौधरी
सना यूपी के गाजियाबाद की रहने वाली हैं. सना ने हाईटेक इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है. पढ़ाई के साथ-साथ कंटेंट ऑप्टिमाईजेशन और वीडियो एडिटिंग भी सीखा है. जिसके बाद सना ने अलग-अलग जगहों पर डिजिटल कॉन्टेंट राइटर और वीडियो एडिटर के तौर पर काम किया. इससे पहले सना Zee मीडिया में बतौर वीडियो और कंटेंट एडिटर काम कर चुकी हैं. उन्होंने जी न्यूज में सोशल मीडिया पेज मैनेज किया है. Zee के बाद सना ने टीवी9 भारतवर्ष की वेबसाइट TV9hindi.com में बतौर ट्रेनी ज्वाइन किया. सना को न्यूज़ एंकरिंग का भी शौक है.
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