Koderma News : NEET आंदोलन के बाद अब स्कूल स्तर पर भी उठी शिक्षा की आवाज, कोडरमा के सतगावां में छात्राओं का सड़क मार्च; भोजन, साफ-सफाई और शिक्षकों की कमी पर लगाए गंभीर आरोप
Koderma News : झारखंड के कोडरमा जिले के सतगावां स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं ने बेहतर शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर सड़क मार्च निकाला। आंदोलन के दौरान कई छात्राएं बेहोश हुईं।झारखंड के कोडरमा जिले के सतगावां प्रखंड से शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं ने बेहतर शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक और विद्यालय की बदहाल व्यवस्था के विरोध में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्राओं ने प्रखंड मुख्यालय तक मार्च निकालते हुए प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
यह आंदोलन केवल एक विद्यालय की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, संसाधनों की कमी और छात्राओं के अधिकारों से जुड़े बड़े सवालों को सामने लाता है। हाल के महीनों में देशभर में NEET परीक्षा को लेकर छात्रों के आंदोलन देखने को मिले थे, वहीं अब स्कूल स्तर पर भी शिक्षा के मुद्दे पर छात्र-छात्राएं खुलकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
प्रदर्शन कर रही छात्राओं का कहना है कि विद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों की भारी कमी है। कई विषयों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे उनकी पढ़ाई और भविष्य दोनों पर असर पड़ रहा है।
छात्राओं की प्रमुख मांगें थीं—
- सभी विषयों के लिए पर्याप्त शिक्षक नियुक्त किए जाएं।
- नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण कक्षाएं संचालित हों।
- विद्यालय की मूलभूत सुविधाओं में सुधार किया जाए।
- छात्रावास की व्यवस्था और सुरक्षा को बेहतर बनाया जाए।
छात्राओं का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
आंदोलन के दौरान छात्राओं ने केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि विद्यालय के दैनिक संचालन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रावास में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है और साफ-सफाई की व्यवस्था भी बेहद खराब है।
सबसे गंभीर आरोप यह रहा कि छात्राओं से लगभग एक महीने तक शौचालय की सफाई कराई गई। इसके अलावा खाना बनाने जैसे कार्य भी उनसे करवाए गए, जो विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है।
छात्राओं का कहना है कि शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यालय आने वाली बच्चियों से इस तरह के कार्य कराना अनुचित है और इससे उनकी पढ़ाई का समय भी प्रभावित होता है।
छात्राओं ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्याओं को पहली बार नहीं उठाया है। 15 अगस्त के कार्यक्रम के दौरान भी उन्होंने विद्यालय की अव्यवस्था, शिक्षकों की कमी और अन्य समस्याओं की जानकारी अधिकारियों को दी थी।
उस समय प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) की ओर से व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि छात्राओं का आरोप है कि आश्वासन के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं दिया। इसी वजह से उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
शुक्रवार को बड़ी संख्या में छात्राएं विद्यालय से निकलकर सड़क मार्च करते हुए प्रखंड मुख्यालय की ओर बढ़ीं। प्रदर्शन के दौरान तेज धूप, गर्मी और थकान के कारण कई छात्राएं अचानक सड़क पर बेहोश होकर गिर गईं।
स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से बेहोश छात्राओं को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। इस घटना ने आंदोलन को और गंभीर बना दिया तथा प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
पिछले कुछ समय में देशभर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ा है। NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में लाखों छात्र सड़क पर उतरे थे। उस आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया था कि नई पीढ़ी अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अब चुप रहने को तैयार नहीं है।
कोडरमा के सतगावां की छात्राओं का आंदोलन भी उसी व्यापक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। फर्क केवल इतना है कि यहां मुद्दा प्रतियोगी परीक्षा नहीं, बल्कि स्कूल की बुनियादी शिक्षा, शिक्षक और सम्मानजनक वातावरण का है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यालय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संसाधन उपलब्ध नहीं होंगे, तो उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में समान अवसर की बात अधूरी रह जाएगी।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (KGBV) का उद्देश्य ग्रामीण एवं वंचित वर्ग की बालिकाओं को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। झारखंड के दूरदराज इलाकों में ये विद्यालय बालिका शिक्षा की मजबूत कड़ी माने जाते हैं।
ऐसे में सतगावां विद्यालय से सामने आए आरोप चिंता का विषय हैं। यदि छात्राओं के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक विद्यालय की प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
फिलहाल आंदोलन के बाद प्रशासन की नजर पूरे मामले पर है। छात्राओं की मांग है कि केवल जांच और आश्वासन नहीं, बल्कि शिक्षकों की नियुक्ति, भोजन व्यवस्था में सुधार, साफ-सफाई की उचित व्यवस्था और छात्राओं से गैर-शैक्षणिक कार्य कराने की प्रथा पर तत्काल रोक लगाई जाए।
सतगावां की यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि आज की छात्राएं अपने अधिकारों और बेहतर शिक्षा के लिए संगठित होकर आवाज उठाने लगी हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस आंदोलन को केवल एक विरोध प्रदर्शन मानता है या इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार का अवसर बनाता है।