Kishore Kumar का ये दर्दभरा गीत 41 साल पहले अनिल कपूर पर फिल्माया गया था जिसके बोल आज भी नौजवानों के दर्द को बयां करते हैं।
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41 सालों से सदाबहार है किशोर कुमार ये गाना
HighLights
41 सालों से सदाबहार है किशोर कुमार ये गाना
अनिल कपूर पर फिल्माया गया दुखभरा गीत
नौजवानों का दर्द करता है बयां
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के दिग्गज सिंगर किशोर कुमार (Kishore Kumar) ने फिल्म इंडस्ट्री को कई यादगार और सदाबहार गाने दिए हैं। लेकिन बात जब दुखभरे और जिंदगी के मायने सिखाने वाले गीतों की आती है तो उनकी आवाज सीधे दिल पर लगती है।
बीते कल की यादों से जुड़े हैं इसके बोल
एक ऐसा गाना किशोर कुमार ने लगभग 4 दशक पहले गाया था जिसकी कंपोजिशन और लिरिक्स दिल को छूने वाले हैं। इस गीत की लाइनें बीते हुए कल की यादों और अधूरे सपनों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की प्रेरणा और मुश्किलों से हार ना मानकर जिंदगी से मुकाबला करने की प्रेरणा देते हैं।
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अनिल कपूर ने दिखाया नौजवानों का दर्द
इतना ही नहीं गाने के बोल और इसकी फिल्मिंग सिखाती है असली जीना वही है जो आप दूसरों की खुशी के लिए जीते हो। अनिल कपूर (Anil Kapoor) ने बखूबी नौजवानों के दर्द को इस गाने के जरिए पर्दे पर उतारा है। उनकी आंखों में बीते कल की यादें, अधूरे सपनों की टीस और अपनों के लिए जीने की ललक साफ दिखाई देती है।
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जिस गाने की हम बात कर रहे हैं वह 1985 में रिलीज हुई फिल्म साहेब (Saaheb) का है जिसके बोल हैं- क्या खबर क्या पता, क्या खुशी है गम है क्या (Kya Khabar Kya Pata)।
बप्पी लाहिरी ने दिया म्यूजिक
दिलचस्प बात ये है कि उस दौर में अपने डिस्को और डांस गानों के लिए पहचाने जाने वाले बप्पी लाहिरी (Bappi Lahiri) ने इस गाने की धीमी और दर्दभरी धुन तैयार की थी। वहीं इस गीत के म्यूजिक डायरेक्टर थे।
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80 के दशक के आम रोमांटिक या जोश भरे गानों से अलग, यह गाना जिंदगी की खट्टी-मीठी सच्चाइयों, आंसुओं और खुशियों पर सोचने का मौका देता है। वहीं किशोर कुमार (Kishore Kumar) ने इस गाने को अपनी आवाज देकर इसे अमर बना दिया है।
साहेब के बारे में
'साहेब' 1985 में रिलीज हुई ड्रामा फिल्म है, जिसके डायरेक्टर अनिल गांगुली हैं। यह 1981 में आई बंगाली फिल्म 'साहब' का रीमेक है, जिसे बिजॉय बोस ने डायरेक्ट किया था।
इस फिल्म में अनिल कपूर, अमृता सिंह, राखी, देवेन वर्मा, उत्पल दत्त, बिस्वजीत, विजय अरोड़ा, ए. के. हंगल और दिलीप धवन ने काम किया है।
फिल्म की कहानी 'साहब' के बारे में है, जो परिवार का सबसे छोटा बेटा है और फुटबॉल पर ध्यान देता है। इस वजह से, परिवार के सभी लोग उसे हमेशा बेकार समझते हैं। हालांकि, जब हालात ऐसे बनते हैं, तो वह अपनी बहन की शादी के लिए पैसे जुटाने के मकसद से अपनी किडनी दे देता है, और इसके लिए उसे अपना फुटबॉल करियर छोड़ना पड़ता है।