लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) लखनऊ के नेतृत्व को लेकर स्थिति साफ हो गई है। पद्मश्री प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद को लगातार दूसरी बार विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया है। KGMU New Vice Chancellor से जुड़ी नई नियुक्ति में किसी नए चेहरे के बजाय मौजूदा कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद पर ही दोबारा भरोसा जताया गया है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने उन्हें अगले तीन वर्षों के लिए फिर कुलपति नियुक्त किया है। नियुक्ति आदेश 9 अगस्त 2026 को जन भवन से जारी किया गया। नया कार्यकाल उनके दोबारा पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगा।
यह नियुक्ति KGMU के इतिहास में खास मानी जा रही है। प्रो. सोनिया नित्यानंद विश्वविद्यालय की पहली ऐसी कुलपति बन गई हैं, जिन्हें लगातार दूसरा कार्यकाल मिला है। उनके पहले तीन वर्षों के कार्यकाल में विश्वविद्यालय को NAAC से A++ ग्रेड मिला, NIRF मेडिकल रैंकिंग में KGMU 19वें स्थान से छलांग लगाकर देश में आठवें पायदान पर पहुंचा और सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की कई योजनाएं आगे बढ़ीं। अब दूसरे कार्यकाल में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाएं, हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट, बोन मैरो ट्रांसप्लांट का विस्तार, नई OPD और पैरामेडिकल कॉलेज जैसी योजनाएं उनकी प्राथमिकताओं में हैं।
KGMU New Vice Chancellor: एक नजर में नई नियुक्ति
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुलपति | प्रो. सोनिया नित्यानंद |
| विश्वविद्यालय | किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ |
| नियुक्ति | लगातार दूसरा कार्यकाल |
| नियुक्ति आदेश | 9 अगस्त 2026 |
| नया कार्यकाल | तीन वर्ष |
| नियुक्ति करने वाली कुलाधिपति | राज्यपाल आनंदीबेन पटेल |
| पहला कार्यकाल | अगस्त 2023 से |
| विशेषज्ञता | क्लिनिकल हीमैटोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, स्टेम सेल रिसर्च |
| प्रमुख सम्मान | पद्मश्री 2025 |
| दूसरे कार्यकाल का प्रमुख फोकस | AI हेल्थकेयर, डिजिटलीकरण, मरीज सेवाएं, शोध और सुपर स्पेशियलिटी विस्तार |
नियुक्ति उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं KGMU की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने King George’s Medical University Act, 2002 की धारा 16(1) के तहत मंजूर की है। प्रो. सोनिया नित्यानंद ने पहली बार अगस्त 2023 में KGMU की कमान संभाली थी।
लगातार दूसरी बार कुलपति बनकर प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बनाया इतिहास
KGMU के लंबे इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी कुलपति को लगातार दूसरा कार्यकाल मिला है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूची में प्रो. सोनिया नित्यानंद से पहले लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी, प्रो. आरके धीमन, प्रो. एमएलबी भट्ट, प्रो. रविकांत, प्रो. डीके गुप्ता सहित कई शिक्षाविद कुलपति की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, लेकिन लगातार दूसरे कार्यकाल की उपलब्धि पहली बार प्रो. नित्यानंद के नाम दर्ज हुई है।
प्रो. नित्यानंद KGMU की दूसरी महिला कुलपति भी हैं। उनसे पहले प्रो. सरोज चूरामणि गोपाल मार्च 2008 से फरवरी 2011 तक कुलपति रही थीं। मेडिकल कॉलेज के विश्वविद्यालय बनने से पहले भी महिलाओं ने संस्थान का नेतृत्व किया था, लेकिन विश्वविद्यालय के रूप में दूसरी महिला कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद बनीं।
लगातार दूसरा कार्यकाल मिलने का एक व्यावहारिक महत्व भी है। विश्वविद्यालय में कई बड़ी परियोजनाएं पहले से निर्माण या योजना के चरण में हैं। ऐसे में नेतृत्व में निरंतरता के कारण नई प्रशासनिक टीम को योजनाओं को शुरुआत से समझने में समय नहीं देना पड़ेगा। प्रो. नित्यानंद ने भी दूसरे कार्यकाल में लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और मरीज सेवाओं, अकादमिक गुणवत्ता तथा शोध को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता बताई है।
कौन हैं प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद?
प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद देश की जानी-मानी क्लिनिकल हीमैटोलॉजिस्ट और मेडिकल साइंटिस्ट हैं। उनकी विशेषज्ञता रक्त रोगों, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, इम्यूनोलॉजी और स्टेम सेल रिसर्च में है। भारत सरकार की पद्म पुरस्कार संबंधी आधिकारिक जानकारी में उन्हें देश में क्लिनिकल हीमैटोलॉजी और बोन मैरो/हीमैटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के क्षेत्र को विकसित करने वाले अग्रणी विशेषज्ञों में शामिल किया गया है। उन्हें भारत की पहली महिला बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ के रूप में भी वर्णित किया गया है।
उनका KGMU से रिश्ता केवल कुलपति पद तक सीमित नहीं है। उन्होंने इसी संस्थान से मेडिकल की पढ़ाई की। KGMU के आधिकारिक सीवी के मुताबिक उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से MBBS और 1989 में इंटरनल मेडिसिन में MD की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद स्वीडन के करोलिंस्का हॉस्पिटल/इंस्टीट्यूट, स्टॉकहोम से इम्यूनोलॉजी में PhD की।
यानी जिस संस्थान में कभी उन्होंने मेडिकल छात्र के रूप में पढ़ाई की, उसी संस्थान में अब उन्हें लगातार दूसरी बार सर्वोच्च प्रशासनिक जिम्मेदारी मिली है।
प्रो. सोनिया नित्यानंद का शैक्षणिक और प्रशासनिक सफर
| अवधि/वर्ष | प्रमुख जिम्मेदारी |
|---|---|
| 1980 के दशक | किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से MBBS |
| 1989 | इंटरनल मेडिसिन में MD |
| 1990-1993 | मेडिकल शिक्षा और क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी से जुड़ी जिम्मेदारियां |
| 1990 के दशक | करोलिंस्का इंस्टीट्यूट, स्वीडन में उच्च अध्ययन |
| 1996 | इम्यूनोलॉजी में PhD |
| 1993 से आगे | SGPGIMS में इम्यूनोलॉजी और हीमैटोलॉजी से जुड़ा कार्य |
| 2003 | SGPGIMS में प्रोफेसर एवं हीमैटोलॉजी विभागाध्यक्ष |
| बाद के वर्ष | स्टेम सेल रिसर्च सेंटर की प्रमुख |
| 2018-2021 | SGPGIMS में प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभालीं |
| 2021 | डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की निदेशक नियुक्त |
| अगस्त 2023 | KGMU की कुलपति बनीं |
| 2025 | चिकित्सा क्षेत्र में पद्मश्री |
| अगस्त 2026 | लगातार दूसरी बार KGMU कुलपति नियुक्त |
उनके आधिकारिक प्रोफाइल में SGPGIMS में असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, स्टेम सेल रिसर्च सेंटर प्रमुख, चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की अतिरिक्त जिम्मेदारी और बाद में डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक पद तक का लंबा अनुभव दर्ज है।
यूपी में हीमैटोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका
प्रो. सोनिया नित्यानंद का चिकित्सा क्षेत्र में सबसे अहम योगदान रक्त रोगों और बोन मैरो ट्रांसप्लांट से जुड़ा माना जाता है। सरकारी पद्म सम्मान प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने 1993 में SGPGIMS में उत्तर प्रदेश की पहली हीमैटोलॉजी यूनिट विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय क्लिनिकल हीमैटोलॉजी भारत में तेजी से विकसित हो रही सुपर स्पेशियलिटी थी।
इसके बाद 1999 में SGPGIMS में बोन मैरो/हीमैटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट कार्यक्रम स्थापित किया गया। आगे चलकर वहां क्लिनिकल और लैबोरेटरी हीमैटोलॉजी तथा बोन मैरो ट्रांसप्लांट का व्यापक केंद्र विकसित हुआ। 2005 में उन्होंने स्टेम सेल रिसर्च सुविधा स्थापित करने में भी भूमिका निभाई, जिसे बाद में पूर्ण स्टेम सेल रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित किया गया।
यही चिकित्सा और शोध का अनुभव अब KGMU में बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाओं के विस्तार और प्रिसीजन मेडिसिन जैसे क्षेत्रों की योजनाओं में भी दिखाई देता है।
2025 में पद्मश्री से सम्मानित हुईं
चिकित्सा विज्ञान, विशेषकर हीमैटोलॉजी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और स्टेम सेल रिसर्च में योगदान के लिए प्रो. सोनिया नित्यानंद को वर्ष 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। पद्म पुरस्कार से जुड़े सरकारी परिचय में उनकी चिकित्सा सेवाओं, शोध, नई पीढ़ी के हीमैटोलॉजिस्ट और स्टेम सेल वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों और विशेषज्ञ समितियों में योगदान का विशेष उल्लेख किया गया है।
उनके खाते में इंडियन नेशनल साइंस अकादमी यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड, DBT नेशनल बायोसाइंसेज करियर अवॉर्ड और कई शैक्षणिक उपलब्धियां भी दर्ज हैं। वह इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज और नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की फेलो भी रही हैं।
पहले कार्यकाल में KGMU को मिला NAAC A++ ग्रेड
प्रो. सोनिया नित्यानंद के पहले कार्यकाल की सबसे प्रमुख संस्थागत उपलब्धियों में KGMU को NAAC से A++ ग्रेड मिलना शामिल है। विश्वविद्यालय को 4 में से 3.67 CGPA के साथ सर्वोच्च A++ ग्रेड मिला। इससे पहले KGMU के पास A+ ग्रेड था।
NAAC मूल्यांकन में शिक्षा, शोध, बुनियादी ढांचा, प्रशासन, संस्थागत मूल्यों और अन्य मानकों का आकलन किया जाता है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट भी वर्तमान में KGMU को NAAC A++ मान्यता प्राप्त संस्थान के रूप में दर्ज करती है।
दूसरे कार्यकाल की घोषणा के बाद प्रो. नित्यानंद ने NAAC A++ को अपने पहले कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनाया है।
NIRF में 19वें से सीधे आठवें स्थान पर पहुंचा KGMU
KGMU की राष्ट्रीय रैंकिंग में भी पहले कार्यकाल के दौरान बड़ा सुधार दर्ज हुआ। शिक्षा मंत्रालय की NIRF 2024 मेडिकल रैंकिंग में KGMU देश में 19वें स्थान पर था। 2025 की मेडिकल रैंकिंग में विश्वविद्यालय 68.77 स्कोर के साथ आठवें स्थान पर पहुंच गया। यानी एक वर्ष में 11 स्थान की छलांग लगी।
KGMU की NIRF मेडिकल रैंकिंग
| वर्ष | मेडिकल श्रेणी में स्थान |
|---|---|
| NIRF 2024 | 19वां |
| NIRF 2025 | 8वां |
| सुधार | 11 स्थान |
NIRF 2025 में KGMU के Teaching, Learning & Resources के लिए 84.93, Research and Professional Practice के लिए 51.27 और Graduation Outcomes के लिए 90.30 अंक दर्ज किए गए।
इस सुधार ने KGMU को देश के शीर्ष 10 मेडिकल संस्थानों की सूची में पहुंचा दिया। अब दूसरे कार्यकाल में इस स्थिति को बनाए रखना और रैंकिंग को और बेहतर करना प्रशासन के सामने अहम लक्ष्य होगा।
मरीजों के लिए हेल्प डेस्क और रजिस्ट्रेशन सुविधाओं पर हुआ काम
प्रो. नित्यानंद ने अपने पहले कार्यकाल की उपलब्धियों में मरीज सेवाओं में किए गए बदलावों को भी शामिल किया है। उनके मुताबिक 24 घंटे काम करने वाले हेल्प डेस्क, रजिस्ट्रेशन सुविधाओं और हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड यानी HRF काउंटरों का विस्तार किया गया। जांच संबंधी काउंटरों को भी चौबीस घंटे उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
KGMU पर उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दूसरे राज्यों से आने वाले मरीजों का भी बड़ा दबाव रहता है। ऐसे में दूसरे कार्यकाल में डिजिटल व्यवस्था के जरिए रजिस्ट्रेशन, रिकॉर्ड, जांच और क्लिनिकल निर्णय की प्रक्रिया को आसान करना प्रमुख एजेंडे में शामिल किया गया है।
KGMU New Vice Chancellor का दूसरा कार्यकाल: AI बनेगा सबसे बड़ा एजेंडा
दूसरे कार्यकाल में प्रो. सोनिया नित्यानंद की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता KGMU का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और AI आधारित हेल्थकेयर होगा। विश्वविद्यालय में Artificial Intelligence Centre स्थापित करने की योजना है। इसका इस्तेमाल AI-सक्षम स्वास्थ्य सेवा, क्लिनिकल निर्णय में सहायता और चिकित्सा नवाचार के लिए करने की तैयारी है।
इसका उद्देश्य केवल नई तकनीक दिखाना नहीं, बल्कि मरीजों की बड़ी संख्या को बेहतर ढंग से संभालना, उपचार व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान करना है। यदि यह योजना तय स्वरूप में लागू होती है तो मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, क्लिनिकल निर्णय और अस्पताल प्रबंधन के कई स्तरों पर डिजिटल तकनीक की भूमिका बढ़ सकती है।
Clinical Trials के लिए बनेगा Centre of Excellence
KGMU के दूसरे कार्यकाल के एजेंडे में Centre of Excellence for Clinical Trials भी शामिल है। इसका लक्ष्य क्लिनिकल रिसर्च और ट्रायल क्षमता को मजबूत करना है। मेडिकल विश्वविद्यालय के लिए यह योजना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे नई दवाओं, उपचार पद्धतियों और चिकित्सा तकनीकों से जुड़े शोध को एक व्यवस्थित प्लेटफॉर्म मिल सकता है।
प्रो. नित्यानंद की अपनी पृष्ठभूमि भी शोध आधारित रही है। वह स्टेम सेल, हीमैटोलॉजी, इम्यूनोलॉजी और ट्रांसलेशनल रिसर्च से लंबे समय तक जुड़ी रही हैं और कई राष्ट्रीय वैज्ञानिक तथा तकनीकी समितियों का हिस्सा रही हैं।
हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट शुरू करने की तैयारी
KGMU में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के तहत हार्ट ट्रांसप्लांट और लंग ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने की योजना दूसरे कार्यकाल की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में है। इसके साथ बोन मैरो ट्रांसप्लांट कार्यक्रम का विस्तार और प्रिसीजन मेडिसिन को आगे बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा गया है।
प्रिसीजन मेडिसिन में सामान्य उपचार पद्धति के बजाय मरीज की जैविक और क्लिनिकल विशेषताओं के आधार पर अधिक लक्षित इलाज पर जोर रहता है। KGMU जैसे बड़े मेडिकल विश्वविद्यालय के लिए इस दिशा में कदम शोध और सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।
महिलाओं के लिए Apex Centre और नई OPD की योजना
दूसरे कार्यकाल में अधूरी परियोजनाओं को पूरा करना भी प्राथमिकता में रहेगा। महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रस्तावित Apex Centre for Women’s Health पर काम आगे बढ़ाया जाना है। इस परियोजना के लिए निर्माण संबंधी प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है।
इसके अलावा KGMU में एक नए OPD कॉम्प्लेक्स और College of Paramedical Sciences के साथ छात्रावास विकसित करने की योजना है। विश्वविद्यालय विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि हासिल करने की प्रक्रिया भी चल रही है। प्रो. नित्यानंद के मुताबिक भविष्य में नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम, क्लिनिकल सेवाएं, शिक्षकों और कर्मचारियों के पद तथा बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन महत्वपूर्ण होगी।
DM Pain Medicine और Trauma Critical Care जैसे नए कोर्स की तैयारी
मेडिकल एजुकेशन के स्तर पर भी दूसरे कार्यकाल में सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रम बढ़ाने की योजना है। KGMU में DM Pain Medicine और DM Trauma Critical Care जैसे कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव है। साथ ही सुपर स्पेशियलिटी की सीटें बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
इससे एक तरफ विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ सकती है, वहीं दूसरी तरफ KGMU में जटिल बीमारियों और गंभीर ट्रॉमा मरीजों के इलाज की क्षमता मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
रोबोटिक सर्जरी के बाद अब अगला कदम तकनीक आधारित चिकित्सा
पहले कार्यकाल में KGMU ने विभिन्न विभागों में रोबोटिक सर्जरी का विस्तार किया। विश्वविद्यालय के खरीद दस्तावेजों में भी जनरल सर्जरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में SSI Mantra आधारित रोबोटिक सर्जरी उपकरणों के उपयोग और विस्तार की प्रक्रिया दर्ज है।
अब दूसरे कार्यकाल में तकनीक के अगले चरण के रूप में AI, डिजिटल रिकॉर्ड, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट और प्रिसीजन मेडिसिन पर जोर दिया जा रहा है। इससे साफ है कि विश्वविद्यालय प्रशासन मेडिकल शिक्षा और उपचार दोनों में तकनीक की भूमिका बढ़ाना चाहता है।
दूसरे कार्यकाल में चुनौतियां भी कम नहीं
लगातार दूसरी नियुक्ति उपलब्धि जरूर है, लेकिन अगले तीन साल KGMU प्रशासन के लिए आसान नहीं होंगे। विश्वविद्यालय में निर्माणाधीन परियोजनाओं को समय से पूरा करना, मरीजों की सुविधाएं बेहतर करना, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखना महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
जुलाई 2026 में KGMU के दीक्षांत समारोह के दौरान कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने करीब दस वर्षों से निर्माणाधीन एक भवन को जल्द पूरा कराने, चार नए निर्माणाधीन भवनों की गुणवत्ता और डिजाइन की नियमित निगरानी करने तथा मरीजों के लिए स्ट्रेचर की संख्या और गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए थे। उन्होंने सुरक्षा के लिए CCTV कैमरों की संख्या 600 से बढ़ाकर 2,500 करने और छात्रावासों की व्यवस्थाओं तथा भोजन की गुणवत्ता में सुधार पर भी जोर दिया था।
इसलिए प्रो. सोनिया नित्यानंद का दूसरा कार्यकाल केवल नई परियोजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहेगा। उन्हें पहले से चल रहे निर्माण, मरीज सेवाओं, अस्पताल सुरक्षा, शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था को भी समान गति से आगे बढ़ाना होगा।
1905 में स्थापित KGMU अब नई तकनीक की ओर
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना 1905 में हुई थी और 1906 में इसके भवन की आधारशिला रखी गई। एक सदी से ज्यादा पुराने इस चिकित्सा संस्थान ने मेडिकल शिक्षा, उपचार और शोध के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। विश्वविद्यालय आज NAAC A++ संस्थान है और NIRF 2025 मेडिकल रैंकिंग में देश के शीर्ष 10 मेडिकल संस्थानों में शामिल है।
अब प्रो. सोनिया नित्यानंद को लगातार दूसरा कार्यकाल मिलने के बाद KGMU का अगला चरण AI आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल सिस्टम, सुपर स्पेशियलिटी विस्तार और बड़े शोध केंद्रों से जुड़ा दिखाई दे रहा है। उनके पहले कार्यकाल में NAAC A++ और NIRF रैंकिंग में बड़ी छलांग संस्थागत उपलब्धियों के रूप में सामने आईं। दूसरे कार्यकाल का आकलन इस बात से होगा कि AI Centre, Clinical Trials Centre of Excellence, महिला स्वास्थ्य के Apex Centre, नए OPD, पैरामेडिकल कॉलेज, हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट और अन्य प्रस्तावित योजनाएं कितनी तेजी से जमीन पर उतरती हैं।
तीन वर्षों का नया कार्यकाल प्रो. सोनिया नित्यानंद को उन योजनाओं को पूरा करने का अवसर देगा जो उनके पहले कार्यकाल में शुरू हुईं। साथ ही KGMU के सामने देश के शीर्ष मेडिकल संस्थानों में अपनी रैंकिंग और प्रतिष्ठा बनाए रखने, मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने और चिकित्सा शोध को नई तकनीक से जोड़ने की चुनौती भी रहेगी।
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