लखनऊ3 घंटे पहले
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देश में बढ़ते प्रदूषण के बीच दमा (ब्रोंकियल अस्थमा) के मरीजों के बेहतर इलाज के लिए बीमारी की सही पहचान करना जरूरी है। इसके साथ ही यह पता लगाना भी जरूरी है कि मरीज को दमा किस प्रकार का है और शरीर में यह किस तरह असर कर रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बायोमार्कर, फीनोटाइपिंग, एंडोटाइपिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से मरीज की बीमारी को बेहतर तरीके से समझकर उसके अनुसार इलाज किया जा सकता है। इससे मरीजों को ज्यादा सटीक और व्यक्तिगत उपचार मिल सकेगा।
यह बात लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. प्रो. बीएनबीएम प्रसाद ने इंदौर में आयोजित 60वें इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड एप्लाइड इम्यूनोलॉजी सम्मेलन में कही।

सर्टिफिकेट प्राप्त करते हुए जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. प्रो. बीएनबीएम प्रसाद।
अस्थमा के मरीजों के लिए व्यक्तिगत इलाज पर जोर
24 से 27 सितंबर तक आयोजित सम्मेलन में डॉ. प्रसाद ने ‘फीनोटाइपिंग, एंडोटाइपिंग और बायोमार्कर की भूमिका’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि ब्रोंकियल अस्थमा देश में सांस संबंधी प्रमुख बीमारियों में शामिल है। घर के भीतर और बाहर बढ़ता प्रदूषण इस बीमारी के बोझ को बढ़ा रहा है। इससे मरीजों में गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु का खतरा भी बना रहता है।
उन्होंने कहा कि सभी अस्थमा मरीजों में बीमारी का स्वरूप और उपचार का असर एक जैसा नहीं होता। ऐसे में बीमारी के प्रकार, शरीर में उसकी सक्रिय प्रक्रिया और संबंधित बायोमार्कर की पहचान से मरीज के अनुरूप उपचार तय करने में मदद मिल सकती है। इससे इलाज को अधिक प्रभावी और सटीक बनाया जा सकता है।
एलर्जी के इलाज में एआई के इस्तेमाल पर भी चर्चा
सम्मेलन में डॉ. प्रसाद ने एलर्जी संबंधी बीमारियों के प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक और चिकित्सा अनुसंधान के इस्तेमाल से बीमारी की पहचान, मरीजों के आकलन और उपचार की प्रक्रिया को बेहतर बनाने की संभावनाएं हैं।
कोरोना काल में निभाई थी अहम भूमिका
डॉ. प्रसाद देश के जाने-माने पल्मोनोलॉजिस्ट हैं। वह पूर्व राष्ट्रपति के मानद सर्जन, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के चिकित्सक और केजीएमयू लखनऊ में पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन के प्रोफेसर रह चुके हैं। कोरोना महामारी के दौरान 2020 से 2022 तक उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग के सलाहकार के रूप में भी सेवाएं दीं।
कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान उन्होंने लखनऊ में गंभीर मरीजों के उपचार में सक्रिय भूमिका निभाई। कोविड आईसीयू में जाकर मरीजों का उपचार करने और व्यक्तिगत देखभाल के लिए भी उनकी भूमिका का उल्लेख किया जाता है।
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