टो, पा, पी, पू — उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र
ष, ण, ठ — हस्त नक्षत्र
पे, पो — चित्रा नक्षत्र
16 जुलाई से 23 जुलाई तक
दिनांक 16 को आधा दिन सुखद रहेगा पश्चात् 18 तक समय ठीक नहीं है। आपके परिवार के बीच आपकी छवि बिगड़ेगी। मेहमानों के आगमन से परेशानी होगी। सार्वजनिक सम्पर्क होशियारी से करें। किसी प्रतियोगिता में असफलता प्राप्त होगी। आपको बहादूरी रखकर परिस्थिति का सामना डटकर करना होगा क्योंकि भाग्य भी बहादुर व मेहनती लोगों का ही साथ देता है। 19, 20 को सरकारी विजय सूचक समय है। खर्च में बेतहाशा वृद्धि होगी जिसे आपको कंट्रोल करना होगा। आपकी चतुराई तथा अच्छे व्यवहार से आप हर संकट से उभरने में सफल रहेंगे। आर्थिक रूप से यह समय लाभदायक है । 21, 22 को विदेश में स्थित परिचितों से सम्पर्क साधने या यात्रा करने का समय बनेगा। 23 को अपना काम शांति से कर पाएंगे।
ग्रह स्थिति
मासारम्भ में चन्द्रमा धनु राशि का चतुर्थ भाव में, राहु कुंभ राशि का षष्टम भाव में, शनि मीन राशि का सप्तम भाव में, मंगल वृषभ राशि का नवम भाव में, सूर्य मिथुन राशि का दशम भाव में, बुध + बृहस्पति + शुक्र कर्क राशि का ग्यारहवे भाव में, केतु सिंह राशि का बारहवे भाव में है।
कन्या राशि की शुभ-अशुभ तारीख़ें
| 2026 | शुभ तारीख़ें | सावधानी रखने योग्य अशुभ तारीख़ें |
| जनवरी | 3, 4, 7, 8, 9, 25, 26, 30, 31 | 7, 16, 17, 18, 25, 26, 27 |
| फरवरी | 1, 2, 5, 6, 7, 10, 11, 28 | 3, 4, 13, 14, 21, 22, 23 |
| मार्च | 1, 5, 6, 9, 10, 11, 27, 28 | 2, 3, 12, 13, 14, 21, 22, 30, 31 |
| अप्रैल | 1, 2, 5, 6, 7, 23, 24, 28, 29, 30 | 8, 9, 10, 17, 18, 19, 26, 27 |
| मई | 3, 4, 21, 22, 26, 27, 30, 31 | 6, 7, 15, 16, 23, 24 |
| जून | 17, 18, 22, 23, 26, 27, 28 | 2, 3, 11, 12, 13, 20, 29, 30 |
| जुलाई | 14, 15, 19, 20, 23, 24, 25 | 1, 8, 9, 10, 17, 18, 26, 27, 28 |
| अगस्त | 11, 12, 16, 17, 20, 21 | 5, 6, 13, 14, 23, 24 |
| सितम्बर | 7, 8, 12, 13, 16, 17, 18 | 1, 2, 10, 19, 20, 21, 28, 29, 30 |
| अक्टूबर | 4, 5, 6, 9, 10, 11, 13, 14, 15 | 7, 8, 16, 17, 18, 25, 26, 27 |
| नवम्बर | 1, 2, 6, 7, 10, 11, 28, 29 | 3, 4, 13, 14, 22, 23 |
| दिसम्बर | 1, 2, 6, 7, 10, 11, 28, 29 | 1, 10, 11, 12, 19, 20, 21 |
कन्या राशि का वार्षिक भविष्यफल
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कन्या राशि वाले जातकों के लिए यह साल उपलब्धियों से परिपूर्ण रहेगा। सातवें स्थान का शनि स्वास्थ्य में लाभ दिलायेगा। पुराने कष्ट व रोगों से छुटकारा मिलेगा। वर्षारंभ में उच्च का चन्द्रमा तीव्र महत्वाकांक्षी बनायेगा । कन्या राशि वालों के लिए यह साल नई सौगातें लेकर आने वाला है। शनि की आपकी राशि पर दृष्टि के प्रभाव से स्वास्थ्य में उतार चढ़ाव रहेगा। व्यापार व कारोबार में विवेक व बुद्धिमता से निर्णय लें। रोजी-रोजगार व नौकरी के उचित अवसर मिलेंगे। क्रोध व आवेश पर नियंत्रण रखें। जल्दबाजी व आवेश में गलत निर्णय हो सकता है। इस वर्ष गम्भीर व घातक बीमारी की संभावना व आशंका नहीं है। शत्रुओं का शमन आप बड़ी ही चतुराई, साहस व विवेक के साथ करेंगे। व्यापार व काम-काज की स्थिति को सुदृढ़ करेंगे। कार्यक्षेत्र में नौकरी में आपका रुतबा, रुबाब व दबदबा बढ़ेगा। काफी लम्बे समय से अटके हुए काम शीघ्रता से पूरे हो जाएंगे, हालांकि कार्यसिद्धि के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रयास करने पड़ेंगे। चौथे भाव में चतुष्ग्रह युति के फलस्वरूप ससुराल से सम्बन्धित कोई अप्रिय या अशुभ समाचार सुनने को मिल सकता है।
इस वर्ष आपका पूरा ध्यान अपने आर्थिक पक्ष को सुदृढ़ पर रहेगा। छठे भाव में राहु के कारण शत्रुओं की संख्या अधिक रहेगी व बलवान शत्रुओं की स्थितियां रहेंगी। विशेषकर गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें। आर्थिक मामलों में सावधानी रखें। अगर आप सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा बनते हैं, तो आपकी आलोचना डायमंड राशिफल
या निंदा हो सकती है, हिसाब किताब को एकदम साफ सुथरा व व्यवस्थित रखें। इस वर्ष धन तो आयेगा, खर्चा भी होगा। नौकरी में बॉस व अधिकारी आप पर मेहरबान रहेंगे। उनकी मेहरबानियों के फलस्वरूप आपको नई जिम्मेदारी या पदभार सौंपा जा सकता है। रिश्तेदार व मित्रों से किसी भी प्रकार की अपेक्षा या उम्मीद नहीं करें, क्योंकि यह अपेक्षा या उम्मीद ही निराशा का कारण बन सकती हैं। विद्यार्थियों का मन जरूर अध्ययन से भटकेगा। अविवाहित जातकों के विवाह की बात चल सकती है। नौकरी में इच्छानुसार तबादला या प्रमोशन के योग बनते हैं। हां किसी कानूनी मामले में आपको विशेषज्ञ से सलाह मशवरा लेना पड़ सकता है। प्रेम सम्बन्धों में सावधानी रखें। प्रेम सम्बन्धों का कहीं न कहीं प्रभाव आपके पारिवारिक जीवन पर पड़ सकता है। आपकी राशि का स्वामी बुध है, अतः ऐसे व्यक्ति व जातक व्यापार कुशल व व्यापार प्रवीण होता है। कारोबार में आप नए-नए प्रयोग लाएंगे, तथा इन प्रयोगों का लाभ आपको आगे चलकर मिलेगा। आपका पूरा ध्यान माकेर्टिंग व क्वालिटी पर रहेगा, और व्यापार में यह दोनों चीजें ही आपकी सफलता की सीढ़ी रहेंगी।
शारीरिक सुख एवं स्वास्थ्य:-
इस साल प्रमुख रूप से शारीरिक सुख एवं स्वास्थ्य के मामले में आप भाग्यशाली ही रहेंगे। हल्की-फुल्की बीमारियों के अलावा स्वास्थ्य वर्ष पर्यंत अच्छा ही रहेगा। बुरी आदतें, बुरी संगत व बुरे लोगों से दूर रहें। किसी भी प्रकार के नशे पत्ते का सेवन आपके स्वास्थ्य में गिरावट का कारण बन सकता है। इस वर्ष राहु छठे भाव में स्थिति है। कहीं न कहीं दुव्यर्वसन करना राहु को जाग्रत करने जैसा है। अप्रैल से अगस्त के मध्य घर के किसी वरिष्ठ सदस्य या माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर आपको अस्पताल भागना पड़ सकता है। क्रोध व आवेश पर काबू रखें।
व्यापार, व्यवसाय व धन:-
कारोबार के हालात दिन-प्रतिदिन सुधरेंगे। व्यापार व्यवसाय में विस्तार को लेकर आपने जो योजना बनाई है। वह हल्के-फुल्के बदलाव के बाद पूरी होने जा रही हैं, कई बार कारोबार में मुश्किलें व परेशानियां आएंगी, लेकिन 2 जून से 31 अक्टूबर के मध्य लाभ स्थान में उच्च के गुरु के कारण आप हर मुश्किल हर परेशानी का हल निकाल लेंगे। आप नौकरी में कठोर परिश्रम व कड़ी मेहनत से अपने बॉस व अधिकारी को प्रसन्न कर ही लेंगे। बॉस व अधिकारी की प्रसन्नता नौकरी में आपकी सफलता की कुंजी रहेगी। सहकर्मी व भागीदार आपके काम में आपकी पूरी-पूरी सहायता करेंगे। कर्मचारियों की गतिविधियों व कार्यकलाप पर पूरी नजर रखें। वर्ष पर्यंत सातवे स्थान में शनि की स्थिति है अतः भागीदार से भी रुपयों- पैसों के मामले में पारदर्शिता रखें, तथा विश्वास नहीं रहे, छोटी से छोटी चीज भी कागज पर लें। सेवा व सेवक के अधिपति शनिदेव वर्ष पर्यंत सातवे स्थान में हैं, तथा 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के मध्य वक्र स्थिति में चलायमान रहेंगे। इस दरम्यान कर्मचारी व सेवक आप पर हावी हो सकते हैं, तथा साथ ही व्यापार व व्यवसाय में लिए गए अपने निर्णयों पर एक बार पुनः विचार करने की आवश्यकता है। क्रोध इस समय नहीं करें, व्यापर में क्रोध आपका सबसे बड़ा शत्रु हो सकता है। जुलाई से दिसम्बर के मध्य टैक्स से जुड़ी समस्या सरकारी विभाग की कोई समस्या, इनकम टैक्स, जी. एस. टी., नगर निगम जैसी कोई समस्या पैदा हो सकती है। नौकरी में कोई झूठा आरोप या कलंक लग सकता है। सम्पत्ति के रख रखाव पर खर्चा होगा।
घर, परिवार संतान व रिश्तेदार:-
पारिवारिक रूप से यह साल अच्छा रहेगा। शनि वर्ष पर्यंत सातवे स्थान में है। अतः घर-परिवार में वर्ष के अंत तक कोई शुभ प्रसंग व मांगलिक आयोजन की रूपरेखा बन सकती है। 27 जुलाई से 31 अक्टूबर के मध्य वक्री शनि के कारण कभी-कभार पारिवारिक तनाव, पति-पत्नी में वैचारिक विरोध गतिरोध के स्वर मुखर हो सकते हैं। इस वर्ष संतान की शिक्षा करियर, विवाह आदि से सम्बन्धित शुभ समाचार प्राप्त होंगे। साथ ही समाज में कीर्ति व वाहवाही हो ऐसा कोई काम आपके हाथों से होगा। इस वर्ष रिश्तेदारों से कोई खास लाभ के योगायोग नहीं हैं, रिश्तेदार आपसे मदद की उम्मीद करेंगे, तथा पीठ पीछे आपकी बुराई या आलोचना भी करेंगे।
विद्याध्यन, पढ़ाई व करियर :-
इस साल कठोर परिश्रम व कड़ी मेहनत करके अपनी योग्यता का लोहा मनवा लेंगे। 2 जून से 31 अक्टूबर के मध्य लाभ स्थान में बृहस्पति के कारण नौकरी से सम्बन्धित परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, विभागीय परीक्षा में सफलता मिल जायेगी। इस जॉब इन्टरव्यू, समय कन्या राशि के जातक सामाजिक रूप से काफी व्यस्त रहेंगे, समाजिक व्यस्तता का प्रभाव आपके अध्ययन पर न पड़े, इस बात का आपको विशेष ध्यान रखना पड़ेगा। देवगुरु बृहस्पति अतिचारी होकर एकादश स्थान में 2 जून से 31 अक्टूबर तक आएंगे, इस दौरान विद्यार्थियों को अनुकूल परिणाम मिलेंगे। प्रेम-प्रसंग व व्यर्थ के कामों को छोड़कर पूर्ण रूप से एकाग्रचित होकर अपने अध्ययन में ध्यान केन्द्रित करें। नौकरी से सम्बन्धित परीक्षा में सफलता का योग बना हुआ है। बच्चों पर अधिक अध्ययन व पढ़ाई का ज्यादा दबाव व तनाव नहीं बनाएं। अपनी इच्छा व मर्जी को भी उन पर थोपे नहीं। करियर में इस वर्ष नया ऑफर व अवसर सुलभ हो सकता है।
प्रेम-प्रसंग एवं मित्र:-
इस वर्ष पंचमेश शनि सातवें स्थान में है । अतः प्रेम प्रसंग व सम्बन्ध अपने मुकाम विवाह तक पहुंचेंगे। लेकिन सावधान प्रेम- प्रसंग व सम्बन्ध 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के मध्य शनि के वक्रत्वकाल में बदनामी व अयपश का कारण बन सकते हैं तथा पारिवारिक जीवन पर प्रेम संबंधों का विपरित प्रभाव रह सकता है। मित्रों का सर्किल बहुत ही व्यापक और मजबूत होगा, मित्र इस साल आपके काम आएंगे, तथा किसी मित्र की तरफ आपका हाथ भी मदद के लिए बढ़ेगा।
वाहन खर्च व शुभकार्य:-
इस साल किसी शुभ कार्य या मांगलिक प्रसंग की रूपरेखा बन सकती है। संतान की शिक्षा, विवाह व किसी शुभ आयोजन पर इस वर्ष बड़ी धनराशि खर्च होने की संभावना है। इस बड़े खर्च को व्यवस्थित करने के लिए आप अन्य मामलों में अपना हाथ तंग रखेंगे। मितव्यता से खर्च करेंगे। इस वर्ष वर्षारंभ में मंगल+बुध का योग बना है, जो वाहन पर खर्चा करायेगा। वाहन को तकनीकी रूप से दुरुस्त रखने के लिए वाहन की देखभाल, रख रखाव पर खर्चा होगा। तथा भूमि, भवन के लिए अप्रैल से अगस्त के मध्य ऋण लेना पड़ सकता है। व्यवसाय में नई मशीनरी व तकनीक की जरूरत रहेगी। आप उस मशीन या तकनीक को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
हानि, कर्ज व अनहोनी:-
इस वर्ष धनहानि होने की संभावना व योग नहीं है। बशर्ते की आप अपनी तरफ से कोई गलती नहीं कर दें । व्यापार में कोई चूक हो सकती है, क्वालिटी के मामले में आप पिछड़ सकते हैं, जिसका खामियाजा आपको भुगतना पड़ सकता है। कारोबार में हर छोटी से छोटी चीज को स्वयं चैक करें। राहु की छठे भाव में स्थिति के प्रभाव से शत्रु व षडयंत्रों से भी परेशानी रहेगी। गुप्त शत्रु अप्रत्यक्ष रूप से आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं। व्यापार में नए लोगों से उधार नहीं करें। पूर्व में लिया गया उधार चुकता हो जायेगा। साथ ही बच्चों के हाथ में वाहन नहीं सौपें तथा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग से बचें अन्यथा कोई अनहोनी घटित हो सकती है।
यात्राएं :-
इस साल बारहवें स्थान में केतु के कारण धर्म स्थल व तीथ्र स्थल पर यात्रा का कार्यक्रम परिवार के साथ बन सकता है।
उपाय:-
आप कन्या राशि के जातक हैं। कन्या राशि के जातकों को वर्ष की शुभता में वृद्धि के लिए गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना चाहिए। ॐ गं गणपते नमः मंत्र की भी 1 माला कर सकते हैं। बुधवार को हरा चारा गाय को दें। पेरीडोट रत्न बुधयंत्र में जड़वाकर गले में धारण करें।
कन्या राशि की चारित्रिक विशेषताएं
कन्या राशि का स्वामी बुध है। यह बुद्धि व ज्ञान का परिचायक ग्रह है तथा वाणी का ओज, वाक् चातुर्यता को परिलक्षित करता है।
कन्या राशि में उत्पन्न जातक अध्ययनशील होते हैं तथा कई विषयों के ज्ञानार्जन में उनकी रुचि रहती है। अतः समाज में सामान्यतया विद्वान के रूप में इनकी छवि रहती है। ये गुणवान व्यक्ति होते हैं, परन्तु स्त्रियों के प्रति इनके मन में अधिक आकर्षण रहता है। इनका भाग्य प्रबल रहता है तथा अल्प परिश्रम से ही इनके सांसारिक महत्त्व के कार्य सफल हो जाते हैं, जिससे भौतिक सुख-संसाधन एवं धनैश्वर्य की इनके पास प्रचुरता रहती है। ये अत्यंत बुद्धिमान होते हैं तथा अपनी तीक्ष्ण बुद्धि के द्वारा कठिन से कठिन समस्या का समाधान करने में समर्थ रहते हैं। अतः सरकारी कार्यों में प्रशासन के क्षेत्र में ये अपना योगदान प्रदान करते हैं तथा वहां सम्मानित एवं आदरणीय रहते हैं। ये भावुकता की अपेक्षा बुद्धि से कार्य लेते हैं, जिससे इनकी उन्नति का मार्ग सर्वदा प्रशस्त रहता है।
पिता के प्रति आपके मन में पूर्ण श्रद्धा होगी तथा उनकी सेवा करने में सर्वदा तत्पर रहेंगे। बाल्यावस्था में आपका समय संघर्षपूर्ण रहेगा। परन्तु मध्य अवस्था के बाद आप पूर्ण सुखी रहेंगे। पुत्र संतति से आप युक्त होंगे तथा इनसे आपको पूर्ण सुख सहयोग प्राप्त होगा। आप एक पराक्रमी पुरुष होंगे तथा स्वपराक्रम एवं योग्यता से सांसारिक कार्यों में सफलता अर्जित करेंगे। आप में तेजस्विता का भाव भी विद्यमान रहेगा। अतः अवसरानुकूल आपको उग्रता के भाव का यत्नपूर्वक परित्याग करना चाहिए। अन्य जनों के प्रति आपके मन में उदारता का भाव भी रहेगा। लेखन या कला संबंधी कार्यों में आपको सफलता मिलेगी।
धर्म के प्रति आपकी सामान्य श्रद्धा रहेगी तथा अल्प मात्र में ही धार्मिक कार्यकलापों को संपन्न करेंगे। मित्र वर्ग में आपका प्रभाव रहेगा तथा सभी लोग आपको सहयोग प्रदान करेंगे। आप अपने पराक्रम, तेजस्विता, बुद्धिमत्ता तथा योग्यता से इच्छित मान-सम्मान प्राप्त करेंगे तथा सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करेंगे। कन्या राशि पिंगल वर्ण व स्त्रीसंज्ञक राशि है। (कन्या राशि वाले पुरुषों में स्त्रियोचित, सुंदरता, कोमलता, लज्जा एवं वाणी माधुर्यता पाई जाती है।)
बुध एक साम्यवादी ग्रह है, अतः इस राशि वाले व्यक्ति पर सोहबत व वातावरण का असर पड़े बिना नहीं रहता । बुरी संगति इनको बुरा बना देती है व अच्छी संगति में ये अच्छे बन जाते हैं। आप गन्दे, बदचलन मित्र - मण्डली से बचें। क्योंकि दूसरे लोगों के प्रभाव, आकर्षण केन्द्र में आ जाना, आपकी सबसे बड़ी कमज़ोरी है।
कन्या राशि द्विस्वभाव, द्विपद व वायु तत्त्व प्रधान राशि है। इसका प्राकृतिक गुण विद्याध्ययन व शिल्पकला है। इनकी विशेषता है कि ये अपनी उन्नति व मान का पूर्ण ध्यान रखने की कोशिश करते हैं। कन्या राशि का स्वभाव व मूल गुण मिथुन जैसे ही हैं, परन्तु यदि जन्म कुण्डली में बुध की स्थिति खराब है तथा हाथ में बुध पर्वत पदच्युत हो, कनिष्ठिका कुछ टेढ़ी-मेढ़ी हो, तो ऐसे जातक में पुरुषार्थ शक्ति की न्यूनता पाई जाती है। ऐसे जातकों में शुक्राणुओं की कमी रहती है तथा इनकी दाढ़ी कभी भरपूर नहीं आती।
यदि आपका जन्म कन्या राशि में 'उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र' के (टो, पा, पी) अक्षरों में है, तो आपका जन्म छः वर्ष की सूर्य की महादशा में हुआ है। आपकी योनि - गौ, गण-मनुष्य, वर्ण-वैश्य, हंसक-भूमि, नाड़ी-आद्य, पाया-चांदी, प्रथम चरण का वर्ग-श्वान एवं अंतिम दो चरण का वर्ग-मूषक है। इस नक्षत्र में जन्मे जातक धनी व सुखी होते हैं। जातक आकर्षक व्यक्तित्व का धनी एवं शत्रुओं का नाश करने में दक्ष होता है। 'उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र' में जन्मे व्यक्ति की पुरुषार्थ शक्ति तेज़ रहेगी। आप मूलतः समझौतावादी व्यक्ति हैं। झगड़े व व्यर्थ के तर्क-वितर्क में आपका विश्वास नहीं, अपितु आप प्रेम व शांति से किसी विवाद को सुलझाना पसंद करेंगे।
यदि आपका जन्म कन्या राशि में 'हस्त नक्षत्र' के (पू, ष, ण, ठ) अक्षरों में है, तो आपका जन्म 10 वर्ष की चंद्र की महादशा में हुआ है। आपकी योनि-भैंस, गण-देव, वर्ण-वैश्य, हंसक-भूमि, नाड़ी-मध्य, पाया-चांदी, प्रथम चरण का वर्ग- मूषक, द्वितीय चरण का वर्ग-मेढ़ा और अंतिम दो चरणों का वर्ग श्वान है। हस्त वाले महत्त्वाकांक्षी होते हैं तथा अपनी बुद्धि एवं विद्याबल से खूब सम्पत्ति अर्जित करते हैं।
यदि आपका जन्म कन्या राशि में 'चित्र नक्षत्र' के प्रथम, द्वितीय चरण (पे, पो) में है, तो आपका जन्म सात वर्ष की मंगल की महादशा में हुआ है। आपकी योनि-व्याघ्र, गण-राक्षस, वर्ण-वैश्य, नाड़ी-मध्य, हंसक - भूमि, पाया-चांदी, वर्ग- मूषक है। चित्र नक्षत्र के जातक विचित्र वेशभूषा पहनते हैं। इनमें स्त्रियोचित वस्त्राभूषण पहनने का शौक होता है। ये लोग बहुत बुद्धिमान होते हैं तथा अपनी सुविधाओं में कटौती स्वीकार नहीं करते।
बुध सूर्य का सर्वाधिक निकटवर्ती ग्रह है। उदीयमान व अस्तांचल की ओर जाते हुए सूर्यकाल के समय ही इसके दर्शन संभव हैं। सूर्य के निकट होने से इनमें सूर्य के समान तेजस्विता होती है। कन्या राशि वाले जातक बहुत ही सुंदर व चतुर होते हैं। बुध कन्या राशि में उच्च का होता है। प्रायः कन्या राशि वाले व्यक्ति उच्च कोटि के विद्वान व लेखक होते हैं।
उपाय :- 4» रत्ती का 'ओनेक्स' रत्न 'बुध यंत्र' में जड़वाकर धारण करें। संकटनाशन गणेश स्त्रोत का पाठ करें। तुलसी के पौधे को रोज़ाना सींचे। गणपति जी को प्रत्येक बुधवार 11 दूर्वा चढ़ाएं। ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जाप करते हुए प्रत्येक दूर्वा गणपति जी को अर्पित करें।
कन्या राशि की प्रमुख विशेषताएं
- राशि – कन्या
- राशि चिन्ह – हाथ में धान व अग्नि लिए हुई कुँवारी कन्या
- राशि स्वामी – बुध
- राशि तत्त्व – पृथ्वी तत्त्व
- राशि स्वरूप – द्विस्वभाव
- राशि दिशा – दक्षिण
- राशि लिंग व गुण – स्त्री
- राशि जाति – वैश्य
- राशि प्रकृति व स्वभाव – सौम्य स्वभाव, वात प्रकृति
- राशि का अंग – उदर (पेट)
- अनुकूल रत्न – पन्ना
- अनुकूल उपरत्न – मूनस्टोन, जेड
- अनुकूल रंग – हरा
- शुभ दिवस – बुधवार, रविवार
- अनुकूल देवता – गणपति
- व्रत / उपवास – बुधवार
- अनुकूल अंक – 5
- अनुकूल तारीखें – 5, 14, 23
- मित्र राशियां – मेष, मिथुन, सिंह, तुला
- शत्रु राशियां – कर्क
- अनुकूल धातु – सोना
- व्यक्तित्व – सुसंस्कृत, विद्वान, यद्भीरु, आलोचक, लेखक
- सकारात्मक तथ्य – निरंतर क्रियाशीलता, व्यावहारिक ज्ञान
- नकारात्मक तथ्य – अत्यधिक चिंतन, दोष खोजने की प्रवृत्ति, कलहप्रियता