July 20, 2026

Kalash Sthapana Significance: हर शुभ काम में सबसे पहले क्यों स्थापित किया जाता है कलश? जानिए धार्मिक मान्यता

Kalash Sthapana Significance: हर शुभ काम में सबसे पहले क्यों स्थापित किया जाता है कलश? जानिए धार्मिक मान्यता

कलश स्थापना के लाभImage Credit source: pexels

Benefits of Kalash Sthapana: सनातन धर्म में किसी भी पूजा-पाठ, गृह प्रवेश, विवाह या मांगलिक कार्य की शुरुआत बिना कलश स्थापना के अधूरी मानी जाती है. चाहे दिवाली का बड़ा त्योहार हो, नवरात्रि के पावन नौ दिन हों या घर में कोई छोटी सी सत्यनारायण कथा, पूजा की चौकी पर सबसे पहले कलश को स्थापित किया जाता है. कलश को पवित्रता, सुख-समृद्धि, मंगल और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर शुभ काम की शुरुआत कलश से ही क्यों होती है और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं क्या हैं? आइए विस्तार से जानते हैं.

कलश में त्रिदेव का माना जाता है वास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश में त्रिदेव का निवास माना गया है. कहा जाता है कि कलश के ऊपरी भाग में भगवान विष्णु, मध्य भाग में भगवान शिव और सबसे नीचे के हिस्से में भगवान ब्रह्मा का वास होता है. यही कारण है कि कलश को सृष्टि, पालन और संहार की दिव्य शक्तियों का प्रतीक माना जाता है. इसके अलावा मान्यता है कि कलश में भरा गया जल सभी पवित्र नदियों का प्रतिनिधित्व करता है. इसलिए पूजा के समय इसमें गंगाजल या अन्य पवित्र जल मिलाने की परंपरा भी प्रचलित है.

क्यों की जाती है सबसे पहले कलश स्थापना?

शास्त्रों के अनुसार किसी भी शुभ कार्य से पहले कलश की स्थापना करने का उद्देश्य वातावरण को पवित्र और सकारात्मक बनाना होता है. माना जाता है कि इससे घर और पूजा स्थल में शुभ ऊर्जा का संचार होता है तथा नकारात्मकता दूर होती है. धार्मिक मान्यता है कि कलश स्थापना के बाद ही देवी-देवताओं का विधिवत आह्वान किया जाता है. इसलिए इसे हर मांगलिक कार्य का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण माना गया है.

कलश के आकार का मतलब

धार्मिक ग्रंथों में कलश के आकार को भी विशेष महत्व दिया गया है. इसका गोल आकार पृथ्वी और पूरे ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है. वहीं इसके अंदर भरा हुआ जल जीवन, सृजन और समृद्धि का संकेत देता है. कलश के ऊपर रखे जाने वाले आम के पत्ते और नारियल भी शुभता, उन्नति और पूर्णता के प्रतीक माने जाते हैं. यही कारण है कि पूजा में इनका विशेष स्थान होता है.

कलश स्थापना से क्या लाभ मिलने की मान्यता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार विधि-विधान से कलश स्थापना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और खुशहाली बनी रहती है और शुभ कामों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. इसके साथ ही माना जाता है कि कलश की उपस्थिति से पूजा का आध्यात्मिक महत्व बढ़ जाता है और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है. यही वजह है कि नवरात्रि, गृह प्रवेश, विवाह, सत्यनारायण कथा, यज्ञ और अन्य धार्मिक आयोजनों में कलश स्थापना को जरूरी माना जाता है.

कलश स्थापना के समय किन बातों का रखें ध्यान?

कलश स्थापना के लिए साफ और पवित्र जगह का चयन करें. कलश में साफ जल भरें और यदि हो सके तो उसमें गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाएं. इसके बाद आम के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल स्थापित करें. पूजा शुरू करने से पहले कलश का विधि-विधान से पूजन करें और देवी-देवताओं का आह्वान करें.

क्या कहती है धार्मिक मान्यता?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश केवल एक पूजा सामग्री नहीं, बल्कि शुभता, सृष्टि, समृद्धि और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है. यही कारण है कि सनातन परंपरा में हर शुभ कार्य की शुरुआत कलश स्थापना से की जाती है. मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और सभी मांगलिक कार्य सफलतापूर्वक पूरे होते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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