Jharkhand SIR Update: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत दावा-आपत्ति की समयसीमा 30 सितंबर को समाप्त हो गयी. झारखंड में करीब 63 लाख लोगों को नोटिस जारी किया गया है. अब समयसीमा नहीं बढ़ने की स्थिति में बीएलओ (BLO) लोगों के घर जाकर उनके सवालों का जवाब देंगे और कागजी कार्रवाई पूरी करेंगे.
60 दिन समय बढ़ाने का प्रस्ताव, अब तक नहीं हुआ फैसला
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के लिए दावा-आपत्ति की तिथि बुधवार को समाप्त हो गयी. यह तिथि 30 सितंबर तक थी. हालांकि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने इसका समय 60 दिन बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग को प्रस्ताव भेजा था, लेकिन आज तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ.
आयोग ने बैठक कर आंध्रप्रदेश व मेघालय में एसआइआर की तिथि बढ़ायी है. झारखंड में लगभग 63 लाख लोगों को नोटिस जारी किया गया है.
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए 6,42,347 लोगों ने भरा फॉर्म-6
झारखंड में मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए 6,42,347 लोगों ने फॉर्म-6 भरा है. इसमें विदेश में रहने वाले 106 भारतीय नागरिकों ने फॉर्म-6 ए भरा. वहीं, मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 12275 लोगों ने फॉर्म-7 भरा है.
मतदाता विवरण में संशोधन के लिए 4,36,782 आवेदन
मतदाता विवरण में संशोधन या एक ही परिवार के मतदाताओं को एक ही मतदान केंद्र से जोड़ने के लिए 4,36,782 लोगों ने फॉर्म आठ भरा है.
मतदाता सूची अपडेट: आगे क्या होगा?
अगर तिथि में बढ़ोतरी नहीं होती है, तो पहले से ही मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दे रखा है कि उनके नोटिस के निराकरण के लिए बीएलओ घर-घर जायेंगे. अगर तिथि में 60 दिनों की बढ़ोतरी होती है, तो मतदाताओं को इन कार्यों के लिए समय मिल जायेगा. ऐसे में नये तय समय में ये कार्य करने होंगे.
अंतिम दिन ऐसे रहे हालात
अंचल कार्यालयों में भारी भीड़
एसआइआर के लिए बड़गाईं, कांके, सदर, अरगोड़ा, रातू समेत रांची के अंचलों में दिनभर कतारें लगी रहीं.
बुजुर्गों और किरायेदारों की परेशानी
बुजुर्गों को यह डर सता रहा है कि 2003 के पुराने कागजात उनके पास नहीं हैं, जिससे कहीं उनका नाम वोटर लिस्ट से कट न जाए. वहीं, एक किराएदार को मकान मालिक से एनओसी (NOC) मिलने में दिक्कत आ रही है, जिस कारण वे भी परेशान हैं.
ग्रामीण व आदिवासी बस्तियों में जागरूकता की कमी
ओरमांझी के इरबा, हरचंडा, चुटूपालू जैसी बस्तियों में जानकारी के अभाव और कागजात नहीं होने से नये मतदाता परेशान हैं.
पलायन बनी बाधा
बड़े पैमाने पर लोगों के काम की तलाश में बाहर जाने की वजह से बीएलओ के लिए घर-घर जाकर लोगों का सत्यापन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है. कई बार तो लोग मिलते ही नहीं हैं.
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