August 10, 2026

Jharkhand JPSC-JSSC विवाद में ED की एंट्री का क्या मतलब? CGL परीक्षा से PMLA केस तक पूरा मामला समझिए

Time Published: Monday, August 10, 2026, 10:54 [IST]

Jharkhand JPSC JSSC Protests: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ परीक्षा रद्द करने की मांग तक सीमित नहीं रह गया है। विवाद में ED की एंट्री ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। मामले में वित्तीय लेनदेन की जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी देखी जा रही है।

ED ने PMLA के तहत केस दर्ज कर लिया है। अब एजेंसी परीक्षा भर्ती में हुए कथित वित्तीय लेनदेन, भ्रष्टाचार और पैसों के इस्तेमाल की कड़ी की जांच करेगी। वहीं दूसरी तरफ छात्र JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की CBI जांच की मांग पर अब भी अड़े हैं।

Jharkhand JPSC-JSSC Protests

9 अगस्त को सरकार और छात्रों के बीच तीसरे दौर की बातचीत हुई। सरकार ने दावा किया कि छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगों पर सहमति बन गई है। लेकिन CGL परीक्षा रद्द करने के मुद्दे पर बात अटक गई। यही वह मुद्दा है, जिसने आंदोलन को फिर से सड़क पर ला दिया है।

ED की एंट्री क्यों हुई?

मामले में सबसे बड़ा नया अपडेट ED से जुड़ा है। परीक्षा भर्ती में कथित वित्तीय गड़बड़ी और पैसों के लेनदेन की जांच के लिए PMLA के तहत मामला दर्ज किया गया है। ED का फोकस अब यह पता लगाने पर होगा कि अगर परीक्षा भर्ती में अवैध पैसे का इस्तेमाल हुआ, तो पैसा कहां से आया, किसके जरिए चला और इसका फायदा किसे मिला।

यहां एक बात समझना जरूरी है। ED की जांच का दायरा मुख्य तौर पर मनी ट्रेल और अपराध से जुड़े पैसों तक जाता है। ED की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक PMLA मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध से हासिल रकम से जुड़े मामलों की जांच का कानूनी आधार है। यानी छात्रों की जिस मांग में परीक्षा भर्ती के पीछे पैसों के खेल की जांच की बात कही जा रही थी, अब उस हिस्से में ED की जांच खास मायने रखती है।

CBI जांच बनाम ED जांच, असली टकराव यहीं है

छात्र JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ पूरे मामले की CBI जांच चाहते हैं। सरकार का कहना है कि CGL परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत हुई थी। इसलिए राज्य सरकार के स्तर से इसे सीधे रद्द करने या CBI जांच का आदेश देने की स्थिति नहीं है।

सरकार ने इसके बदले कथित वित्तीय लेनदेन की जांच ED से कराने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में निगरानी कमेटी, परीक्षा सुधार के लिए एक्सपर्ट कमेटी और 90 दिनों के भीतर कार्रवाई आगे बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। लेकिन छात्रों ने यह फॉर्मूला स्वीकार नहीं किया। उनके लिए CGL परीक्षा रद्द करना आंदोलन की सबसे बड़ी मांगों में शामिल है।

17 दिन से सड़क पर छात्र, आज विधानसभा घेराव

रांची में आंदोलन अब काफी बड़ा रूप ले चुका है। छात्र पिछले 17 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार, 10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। इनपुट के मुताबिक, हजारों छात्र पुरानी विधानसभा के पास जुटने लगे थे। प्रशासन ने भी बड़े स्तर पर सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

विधानसभा के आसपास कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई है। कंटीले तार लगाए गए हैं। CCTV से निगरानी की जा रही है। वाटर कैनन और राइट कंट्रोल वैन तैयार रखी गई हैं। दूसरे जिलों से भी पुलिस बल बुलाया गया है। रांची में करीब 2 हजार जवानों की तैनाती की जानकारी दी गई है। प्रदर्शन स्थल और विधानसभा के बीच सुरक्षा की कई परतें बनाई गई हैं। हजारीबाग से रांची आने वाली बसों को रोके जाने की बात भी सामने आई है।

सरकार बोली- 98% मांगें मानी, छात्र बोले- लिखित आदेश चाहिए

10 अगस्त की बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगों पर सहमत है। सरकार के मुताबिक, 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों में कथित गड़बड़ियों को दो अलग-अलग एंगल से देखा जाएगा। आपराधिक पहलुओं की जांच CID करेगी। वहीं अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूतों के आधार पर ED से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा।

इसके बाद फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए मामला तेजी से आगे बढ़ाने और 90 दिनों में चार्जशीट दाखिल करने की बात कही गई है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। लेकिन छात्रों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन काफी नहीं है। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो ने मंत्रियों से बातचीत में साफ कहा कि जब तक मांगें लिखित रूप में पूरी नहीं होतीं, अनशन खत्म नहीं होगा।

JPSC में तीन सदस्यों का इस्तीफा, पहले चेयरमैन भी छोड़ चुके पद

आंदोलन के बीच JPSC में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। आयोग के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे राज्यपाल को भेजे गए थे और उन्हें मंजूरी मिल गई।

इससे पहले 22 जुलाई को JPSC चेयरपर्सन एल खियांग्ते भी पद छोड़ चुके हैं। फिलहाल भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच CID कर रही है। इसी जांच के तहत आयोग के सदस्यों से पूछताछ भी हो रही है। इनपुट के मुताबिक, 10 अगस्त को डॉ अजीता भट्टाचार्य से पूछताछ होनी है।

देवेंद्र महतो की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टरों ने अस्पताल जाने को कहा

देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। 10 अगस्त तड़के करीब 3 बजे उनकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई। डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची और इलाज किया। रांची सदर अस्पताल की मेडिकल टीम ने भी भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की जांच की।

डॉक्टर एपी सिन्हा के मुताबिक, अनशनकारियों को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने मौके से जाने से इनकार किया। इसके बाद जरूरी इलाज धरनास्थल पर ही किया गया। इस बीच अभिनेता पीयूष मिश्रा भी देवेंद्र नाथ महतो से मिलने पहुंचे। उन्होंने छात्रों का हौसला बढ़ाने के लिए 'आरंभ है प्रचंड' गाया।

हेमंत सोरेन बोले- 'हमने चोरी पकड़ ली है'

आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने अधिकार के लिए आंदोलन करना चाहिए और उन्हें न्याय मिलेगा। सीएम सोरेन ने कहा, "छात्र आंदोलन करें और अपने हक-अधिकार मांगें, क्योंकि हमने गड़बड़ी पकड़ ली है। नौजवानों को न्याय मिलेगा और जिसने भी गड़बड़ी की है, उसे कड़ी सजा मिलेगी।"

यानी सरकार अब खुद भी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर कार्रवाई की बात कर रही है। फर्क सिर्फ जांच के तरीके और CGL परीक्षा को लेकर है।

जयराम महतो ने भी खोला मोर्चा, CBI जांच की मांग

JLKM विधायक जयराम महतो भी छात्रों के समर्थन में एक दिन के उपवास पर बैठे। उनका कहना है कि मामले की CBI जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "सरकार को शायद पता है कि इस मामले में दोषी कौन हैं। यह छोटा मामला नहीं है। अगर लाखों रुपये में सीटों के सौदे के आरोप हैं, तो इसकी पूरी जांच जरूरी है। इतनी बड़ी रकम का खेल किसी एक सामान्य अधिकारी के स्तर पर अकेले होना मुश्किल है।" यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि अब आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, अब आगे क्या?

JPSC-JSSC भर्ती विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। उपलब्ध इनपुट के मुताबिक, वकील सत्यम सिंह ने बताया कि राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन की ओर से PIL दाखिल की गई है। याचिका में मामले में दखल और छात्रों की मांगों पर कार्रवाई की अपील की गई है।

सरकार ने छात्रों से सुझाव लेने के लिए ईमेल आईडी [email protected] और फीडबैक नंबर जारी करने की भी जानकारी दी है। अब पूरा मामला तीन मोर्चों पर आगे बढ़ता दिख रहा है। पहला, CID की आपराधिक जांच। दूसरा, कथित वित्तीय लेनदेन पर ED की जांच। और तीसरा, छात्रों की CGL परीक्षा रद्द कर CBI जांच कराने की मांग।

यही तीसरा मुद्दा फिलहाल सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ है। सरकार कह रही है कि उसके हाथ में परीक्षा रद्द करने का अधिकार नहीं है। छात्र कह रहे हैं कि जब तक CGL पर फैसला नहीं होगा, आंदोलन नहीं रुकेगा। इसलिए 10 अगस्त का विधानसभा घेराव सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं है। यह अब इस बात की परीक्षा भी है कि सरकार और छात्र संगठन इस लंबे विवाद का अगला रास्ता कैसे तय करते हैं।