Jharkhand Government: झारखंड सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत बड़ा फैसला लिया है. अब कक्षा 6 से सभी स्कूलों में स्किल एजुकेशन अनिवार्य होगी, जिससे छात्रों को व्यावहारिक और रोजगार आधारित शिक्षा मिलेगी.
Jharkhand Government: झारखंड सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत बड़ा फैसला लिया है. अब कक्षा 6 से सभी स्कूलों में स्किल एजुकेशन अनिवार्य होगी, जिससे छात्रों को व्यावहारिक और रोजगार आधारित शिक्षा मिलेगी.
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Jharkhand Government: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) 2023 के तहत झारखंड सरकार ने स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव किया है. अब राज्य के सभी सरकारी और अन्य श्रेणी के स्कूलों में कक्षा 6 से स्किल एजुकेशन (कौशल शिक्षा) अनिवार्य होगी. इसका उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही व्यावहारिक, तकनीकी और रोजगार से जुड़ी शिक्षा देना है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें.
कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाया जाएगा 'कौशल बोध-1'
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निर्देश के अनुसार, कक्षा 6 से 8 तक के सभी विद्यार्थियों के लिए 'कौशल बोध-1' विषय अनिवार्य रहेगा. इस विषय की पढ़ाई के लिए हर सप्ताह 4 से 5 पीरियड तय किए गए हैं. पूरे शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को कुल 110 घंटे इस विषय की पढ़ाई कराई जाएगी. इस विषय को पढ़ाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से विज्ञान और गणित के शिक्षकों को दी गई है. इसका उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी विकसित करना है.
शिक्षकों को भी मिलेगा आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण
नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. माइनिंग इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, आईटी और आईसीटी से जुड़े विशेषज्ञ शिक्षकों को नई तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं. प्रशिक्षण के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल तकनीक और आधुनिक शिक्षा पद्धति पर खास जोर दिया जा रहा है. इससे शिक्षक विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जुड़ी जानकारी बेहतर तरीके से दे सकेंगे.
कक्षा 9 और 10 में भी होगा कौशल विकास
नई व्यवस्था के तहत कक्षा 9 के विद्यार्थियों को व्यावसायिक (वोकेशनल) और सामान्य शिक्षा को साथ लेकर पढ़ाया जाएगा. वहीं, कक्षा 10 के छात्र उसी कौशल विषय की पढ़ाई जारी रखेंगे, जिसे उन्होंने कक्षा 9 में चुना होगा. फिलहाल कक्षा 11 और 12 के पाठ्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि, कौशल शिक्षा से जुड़ी किताबें स्कूलों तक पहुंचाई जा रही हैं. शुरुआत में यह व्यवस्था सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस और अन्य चयनित स्कूलों में लागू की जाएगी.
स्किल एजुकेशन से छात्रों को क्या मिलेगा फायदा?
स्किल एजुकेशन के जरिए विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जाएगा. इससे कम उम्र में ही तकनीकी और रोजगार से जुड़े कौशल विकसित होंगे.
बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और आधुनिक कार्यशैली की शुरुआती जानकारी मिलेगी. साथ ही उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता, रचनात्मक सोच और नए विचारों पर काम करने की आदत भी विकसित होगी.
इसके अलावा विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार करियर विकल्पों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे. व्यावसायिक शिक्षा से जुड़ने के कारण भविष्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. नई शिक्षा नीति के अनुसार यह बदलाव छात्रों को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप तैयार करेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगा.
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