October 26, 2026

अनंत सिंह के निष्कासन पर बढ़ा विवाद, कोर्ट जाने की तैयारी में समर्थक; JDU के फैसले को देंगे चुनौती

Anant Singh: मोकामा विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद बिहार की राजनीति में विवाद गहराता जा रहा है। पार्टी के इस फैसले के खिलाफ अब अनंत सिंह के समर्थकों ने कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। समर्थकों का आरोप है कि जेडीयू ने विधायक का पक्ष सुने बिना ही उनके खिलाफ कार्रवाई की। वहीं, अनंत सिंह ने भी अपने निष्कासन पर सवाल उठाए हैं।

अनंत सिंह के समर्थकों ने जेडीयू नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए निष्कासन की कार्रवाई को अनुचित बताया है। उनका कहना है कि किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले विधायक को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था। समर्थकों का आरोप है कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने अनंत सिंह की बात सुने बिना ही उन्हें निष्कासित करने का फैसला लिया। इसी आधार पर समर्थक अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।

दरअसल, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव को लेकर जेडीयू के भीतर विवाद शुरू हुआ था। पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के मुकाबले जन सुराज पार्टी समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन करने को लेकर अनंत सिंह और पार्टी नेतृत्व के बीच टकराव बढ़ गया। इसके बाद मामला पार्टी अनुशासन से जुड़ गया और जेडीयू ने अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।

जेडीयू से निष्कासित किए जाने के बाद अनंत सिंह ने पार्टी के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उनसे कोई गलती नहीं हुई है और उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वह अपने राजनीतिक रुख पर कायम हैं। अनंत सिंह ने आगामी चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में जेडीयू महज 12 सीटों पर सिमट जाएगी और पार्टी का खाता तक नहीं खुलेगा। उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है।

पार्टी से निष्कासन के बावजूद अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपना सम्मान बरकरार रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के प्रति उनका सम्मान हमेशा बना रहेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर पार्टी ने उचित फैसला लिया है और गलत करने पर कार्रवाई की है, तो उन्हें इस पर कुछ नहीं कहना है। उनके इस बयान में जेडीयू के फैसले को लेकर नाराजगी और नीतीश कुमार के प्रति सम्मान, दोनों पहलू नजर आते हैं।

अनंत सिंह के निष्कासन के बाद उनके समर्थकों की ओर से अदालत जाने की तैयारी ने इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है। एक ओर पार्टी अनुशासन का सवाल है, तो दूसरी ओर कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर समर्थक सवाल उठा रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अनंत सिंह के समर्थक अदालत में क्या कदम उठाते हैं और जेडीयू नेतृत्व इस मामले पर क्या रुख अपनाता है।