बालोद में सिवनी से कलेक्ट्रेट जाने वाले मार्ग से लेकर नेशनल हाईवे-930 के किनारे तक तांदुला नहर का पानी परेशानी का कारण बना हुआ है। नहर की पुरानी लाइनिंग से रिसाव के कारण सड़क पर पानी जमा हो रहा है। इससे डामर उखड़ने के साथ गड्ढों में पानी भर रहा है।
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हाईवे किनारे दुकानों के सामने कीचड़ और जलभराव से भी लोग परेशान हैं। करीब एक महीने से समस्या बनी हुई है। स्थायी समाधान नहीं होने पर दुकानदारों ने जेसीबी की मदद से अस्थायी नाली बनाकर पानी को तांदुला नदी की ओर मोड़ा है।

पानी बंद होने के बाद होगी कलेक्ट्रेट मार्ग की मरम्मत
सिवनी से कलेक्ट्रेट जाने वाले मार्ग पर जगह-जगह डामर उखड़ चुका है। नहर का पानी लगातार बहने से सड़क की मरम्मत नहीं हो पा रही है। पीएमजीएसवाई के कार्यपालन अभियंता शत्रुघन ध्रुव के अनुसार, कलेक्टर ने समय-सीमा की बैठक में सड़क की मरम्मत के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि पानी का बहाव बंद किए बिना डामरीकरण करने पर सड़क दोबारा खराब हो सकती है। इसके लिए जल संसाधन विभाग को पानी रोकने के लिए डायवर्जन या नाली बनाने की जरूरत है।
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता पीयूष देवांगन के अनुसार, नहर की पुरानी लाइनिंग से पानी का रिसाव हो रहा है। रिसाव का वास्तविक स्थान स्पष्ट नहीं होने से समस्या दूर करने में दिक्कत आ रही है।
उन्होंने नई लाइनिंग की जरूरत बताई। विभाग के अनुसार, नहर करीब एक सप्ताह बाद बंद होगी। इसके बाद मरम्मत का काम किया जा सकता है। नवरात्रि के दौरान भारी वाहनों की आवाजाही को भी सड़क खराब होने की वजह बताया गया है।

हाईवे किनारे दुकानों के सामने भर रहा पानी
तांदुला जलाशय से रबी फसलों की सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने के बाद मुख्य नहर में जगह-जगह दरार और लीकेज की समस्या सामने आई है। करीब एक माह से नहर का पानी नेशनल हाईवे-930 के किनारे बह रहा है। इससे दुकानों के सामने कीचड़ और जलभराव हो रहा है।
दोपहिया वाहन चालक फिसल रहे हैं, जबकि बड़ी गाड़ियां भी फंस रही हैं। चाय-नाश्ते, पंचर और किराना दुकान संचालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। विभागीय कार्रवाई नहीं होने से परेशान कुछ दुकानदारों ने जेसीबी की मदद से अस्थायी नाली बनवाई, ताकि पानी को तांदुला नदी की ओर निकाला जा सके।

स्थायी समाधान का इंतजार
दुकानदारों ने सिंचाई विभाग से नहर की तत्काल मरम्मत कराने और हाईवे किनारे पक्की नाली बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि रिसाव से सिंचाई का पानी व्यर्थ बह रहा है और सड़क भी खराब हो रही है।
वहीं, कलेक्ट्रेट मार्ग की मरम्मत पानी का बहाव बंद होने के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में दोनों विभागों के बीच समन्वय बनाकर रिसाव रोकने और सड़क की मरम्मत की समय-सीमा तय करने की जरूरत है, ताकि लोगों को जलभराव और खराब सड़क से राहत मिल सके।