Published: Friday, July 31, 2026, 19:02 [IST]
Jammu Kashmir Pakistani Drone: जम्मू-कश्मीर के खौर सेक्टर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान की ओर से भेजे गए एक संदिग्ध निगरानी ड्रोन को मार गिराकर बड़ी सुरक्षा चुनौती को टाल दिया। चकला गांव के पास रक्षा प्रतिष्ठानों के ऊपर मंडरा रहे इस ड्रोन से 64 जीबी का माइक्रो एसडी कार्ड बरामद हुआ, जिसमें भारतीय सेना के संवेदनशील ठिकानों, बंकरों और एलओसी के पास की तस्वीरें व वीडियो मिले हैं।
शुरुआती जांच में ड्रोन चीन निर्मित डीजेआई मैविक सीरीज का संशोधित क्वाडकॉप्टर प्रतीत हो रहा है। घटना ने एक बार फिर सीमा पर ड्रोन आधारित जासूसी के बढ़ते खतरे और उससे निपटने की जरूरत को उजागर कर दिया है।
खौर सेक्टर में कैसे पकड़ा गया जासूसी ड्रोन?
सेना को खौर सेक्टर के चकला गांव के पास एक ड्रोन महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के आसपास संदिग्ध तरीके से उड़ता दिखाई दिया। खतरे को भांपते हुए जवानों ने तुरंत कार्रवाई की और ड्रोन को मार गिराया। बरामद ड्रोन की जांच में पता चला कि उसे निगरानी मिशन के लिए संशोधित किया गया था। सुरक्षा एजेंसियां अब उसके उड़ान मार्ग, कंट्रोल सिस्टम और ऑपरेशन से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं।
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मेमोरी कार्ड से क्या मिला सबसे बड़ा सुराग?
ड्रोन से मिले 64 जीबी लेक्सर माइक्रो एसडी कार्ड ने जांच एजेंसियों को अहम सुराग दिए हैं। शुरुआती जांच में कार्ड से भारतीय सेना के बंकरों, रक्षा ठिकानों और एलओसी के पास के संवेदनशील इलाकों की तस्वीरें और वीडियो मिले हैं। इससे आशंका मजबूत हुई है कि ड्रोन का मकसद केवल उड़ान भरना नहीं, बल्कि सैन्य गतिविधियों की खुफिया जानकारी जुटाकर सीमा पार भेजना था।
क्यों बढ़ रही है सीमा पर ड्रोन की चुनौती?
बीते कुछ वर्षों में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। पहले इनका उपयोग हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए किया जाता था, लेकिन अब निगरानी और जासूसी भी बड़ा उद्देश्य बन गया है। छोटे आकार, कम ऊंचाई और आधुनिक तकनीक वाले ड्रोन पारंपरिक रडार से बच निकलते हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
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भारत कैसे कर रहा है ड्रोन खतरे का मुकाबला?
भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियां सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम, जैमिंग तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी को लगातार मजबूत कर रही हैं। स्वदेशी एंटी-ड्रोन तकनीक के विकास पर भी तेजी से काम चल रहा है ताकि संदिग्ध ड्रोन को समय रहते पहचानकर निष्क्रिय किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी क्षमता बढ़ाने के साथ स्थानीय सतर्कता और खुफिया समन्वय भी भविष्य में ऐसे प्रयासों को रोकने में अहम भूमिका निभाएंगे।