Jabalpur Congress (रिपोर्ट - देवजीत देव)मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी जबलपुर में दल-बदल की राजनीति ने नया मोड़ ले लिया है। कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए कुछ नेता अब फिर कांग्रेस में लौटने के रास्ते तलाश रहे हैं। लेकिन कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि इस बार किसी भी नेता को सीधे पार्टी में एंट्री नहीं मिलेगी। वापसी से पहले उनके पुराने रिकॉर्ड और पार्टी छोड़ने की वजह की जांच होगी।
वापसी से पहले होगी जांच
मध्यप्रदेश में आया राम-गया राम की राजनीति पर रोक लगाने की तैयारी चल रही है। कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए पार्टी बदलने वाले नेताओं की वापसी आसान नहीं होगी। पहले उनके पुराने कामकाज और रिकॉर्ड को देखा जाएगा। साथ ही यह भी जांच होगी कि उन्होंने कांग्रेस क्यों छोड़ी और अब वापस क्यों आना चाहते हैं।
जिला कमेटी की मंजूरी जरूरी
कांग्रेस (Congress) में वापसी के लिए सबसे पहले जिला स्तर पर प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके बाद जिला समन्वय समिति बहुमत के आधार पर फैसला करेगी कि संबंधित नेता को पार्टी में वापस लेना है या नहीं। समिति का फैसला प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) को भेजा जाएगा। प्रदेश नेतृत्व अंतिम फैसला करेगा।
सीधे नहीं होगा वापसी का फैसला
जबलपुर नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा (Saurabh Nati Sharma) के मुताबिक, समन्वय समिति की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव रखा जाएगा। संघर्ष के समय पार्टी छोड़कर गए किसी भी स्थानीय नेता की वापसी का फैसला सीधे नहीं होगा। पहले समिति में चर्चा होगी और फिर बहुमत से फैसला लिया जाएगा।
मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस पर साधा निशाना
इस पूरे मामले पर मप्र सरकार (MP Government) के PWD मंत्री राकेश सिंह (Rakesh Singh) ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नेताओं ने कांग्रेस में नेतृत्व की कमी और संगठन की कमजोरी के कारण पार्टी छोड़ी थी। उनके मुताबिक, आज भी कांग्रेस की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि बीजेपी में शामिल हुए नेता किसी सौदेबाजी के लिए नहीं आए हैं। वे पार्टी की नीतियों, परंपराओं और नेतृत्व की दिशा से प्रभावित होकर BJP में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास आज भी न तो कोई दिशा है और न ही काम करने की रफ्तार।
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अब समन्वय समिति की मीटिंग पर नजर
जबलपुर कांग्रेस के इस रुख से साफ है कि पार्टी में वापस आने के इच्छुक नेताओं को अब तय प्रक्रिया से गुजरना होगा। अब सभी की नजर जिला समन्वय समिति की मीटिंग पर है। इसी मीटिंग में तय होगा कि वापसी का प्रस्ताव रखने वाले कौन से नेताओं को मंजूरी मिलती है और किसे इंतजार करना पड़ेगा।
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