Updated On: Jul 31, 2026 | 12:33 PM IST
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सार
ITR Fine: इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की डेडलाइन 31 जुलाई है। अगर आपने इसे मिस कर दिया है तो आपको 1000 रुपये से 5000 रुपये तक जुर्माना देना होगा। 31 दिसंबर तक बिलेटेड रिटर्न भरें।

इनकम टैक्स रिटर्न (सोर्स- सोशल मीडिया)
विस्तार
ITR Fine Know How Much Penalty You Will Pay For Missing July 31: नौकरीपेशा, पेंशनभोगी और छात्रों के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 पूरी तरह से निर्धारित की गई है। बहुत से लोग आखिरी समय पर अपना रिटर्न जमा करने में किसी न किसी कारणवश पूरी तरह से विफल रह जाते हैं। ऐसे में आयकर विभाग के सख्त नियमों के अनुसार समय सीमा खत्म होने के बाद रिटर्न फाइल करने पर आपको लेट फीस भरनी पड़ती है। इसलिए सभी करदाताओं को किसी भी भारी जुर्माने से बचने के लिए समय रहते अपना यह जरूरी काम पूरा कर लेना चाहिए।
आयकर कानून के अनुसार जो टैक्सपेयर्स इस डेडलाइन को मिस कर देते हैं, वे बाद में भी अपना टैक्स रिटर्न बहुत आराम से दाखिल कर सकते हैं। डेडलाइन के बाद अपनी फाइलिंग करने पर आपको अपनी कुल आय के स्तर के आधार पर एक तय लेट फीस का पूरा भुगतान करना ही होगा। यह विलंब शुल्क इस बात पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं करता है कि आप अपना आईटीआर भरने के लिए कौन सा फॉर्म चुनते हैं। ऐसे में सभी टैक्सपेयर्स को डेडलाइन मिस करने के बाद होने वाले भारी वित्तीय नुकसान को बहुत अच्छे से समझना जरूरी है।
जुर्माने की तय रकम
आयकर विभाग के नियमों के अनुसार 31 जुलाई की समयसीमा बीत जाने के बाद रिटर्न जमा करने पर विलंब शुल्क दो मुख्य श्रेणियों में तय किया जाता है। अगर किसी करदाता की कुल वार्षिक आय 5 लाख रुपये या उससे कम है, तो उसे 1,000 रुपये का विलंब शुल्क देना होगा। वहीं अगर आपकी कुल वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक है, तो आपको 5,000 रुपये का भारी जुर्माना अपनी जेब से देना पड़ेगा। जिन लोगों की आय बुनियादी छूट सीमा से कम है, उन्हें आमतौर पर यह फीस नहीं देनी पड़ती है।
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बिलेटेड रिटर्न भरने का मौका
अगर आप किसी कारण से 31 जुलाई 2026 की समयसीमा चूक जाते हैं, तो आपको अपना बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने का एक और शानदार मौका मिलता है। आंकलन वर्ष 2026-27 के लिए यह बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 मुख्य रूप से तय की गई है। इस दौरान अपना रिटर्न जमा करते समय भी आपको अपनी आय के अनुसार 1,000 रुपये या 5,000 रुपये का तय विलंब शुल्क जरूर चुकाना होगा। इसलिए इस समय सीमा से पहले अपना टैक्स रिटर्न भर लेना हर किसी के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद रहता है।
डेडलाइन मिस करने के अन्य नुकसान
देरी से रिटर्न फाइल करने पर केवल लेट फीस ही नहीं लगती बल्कि टैक्सपेयर्स को कई अन्य बड़े वित्तीय नुकसान भी भारी मात्रा में उठाने पड़ते हैं। अगर आपका कोई भी टैक्स रिफंड बनता है तो देरी से फाइल करने पर यह प्रक्रिया पूरी तरह अटक सकती है और बहुत समय लग सकता है। इसके अलावा अगर आपने अपना पूरा टैक्स जमा नहीं किया है तो बकाया राशि पर मासिक दर से अतिरिक्त भारी ब्याज भी जुड़ना शुरू हो जाता है। आप अपने विशिष्ट वित्तीय घाटों को अगले वर्षों में सेट-ऑफ करने का बड़ा अवसर भी गंवा देते हैं।
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ई-वेरिफिकेशन है बेहद अनिवार्य
टैक्सपेयर्स को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि केवल इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर देना ही पूरी प्रक्रिया बिल्कुल भी नहीं मानी जाती है। अपना रिटर्न ऑनलाइन सबमिट करने के बाद तय समयसीमा यानी 60 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन करना भी बेहद अनिवार्य होता है। अगर आप तय समय में अपना ई-वेरीफाई नहीं करते हैं तो आपके रिटर्न को वैध नहीं माना जाएगा और उसे तुरंत खारिज कर दिया जाएगा। नेट बैंकिंग या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए आप अपना ई-वेरिफिकेशन बहुत ही आसानी से पूरा कर सकते हैं।
