Israel Elections: युद्ध का फायदा मजबूत दक्षिणपंथी राजनीति को मिला है. हालांकि, बेंजामिन नेतन्याहू के ऊपर हार का खतरा मंडरा रहा है. इजराइल में युद्ध की वजह से वामपंथी दल कमजोर हो गए हैं.
Israel Elections: युद्ध का फायदा मजबूत दक्षिणपंथी राजनीति को मिला है. हालांकि, बेंजामिन नेतन्याहू के ऊपर हार का खतरा मंडरा रहा है. इजराइल में युद्ध की वजह से वामपंथी दल कमजोर हो गए हैं.
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Benjamin Netanyahu: (X/@IsraeliPM)
Israel Elections: आतंकवादी संगठन हमास के करीब 6 हजार लड़ाकों ने 7 अक्टूबर को इजराइल पर अटैक किया और घरों-बंकरों में छिपे लोगों को चुन-चुनकर मारा गया. कई लोगों को तो जिंदा जला तक डाला गया. 250 से अधिक लोगों को हमास के लड़ाके बंधक बनाकर अपने साथ गाजा ले गए. इजराइल ने इस हमले का कड़ा जवाब देते हुए गाजा पर अटैक कर दिया. इजराइल-हमास युद्ध अब राजनीति का एजेंडा भी बन गया है.
दरअसल, 27 अक्टूबर को इजराइल में आम चुनाव होने वाले हैं. खास बात है कि पहले के चुनावों में महंगाई, घरों की कीमतें और नेतन्याहू के खिलाफ जारी मुकदमें चुनावी मुद्दे हुआ करते थे लेकिन इस बार सुरक्षा, हमास, सेना और फलस्तीन सबसे ऊपर हैं.
कैसा है इजराइल का चुनावी माहौल
युद्ध का फायदा मजबूत दक्षिणपंथी राजनीति को मिला है. हालांकि, बेंजामिन नेतन्याहू के ऊपर हार का खतरा मंडरा रहा है. इजराइल में युद्ध की वजह से वामपंथी दल कमजोर हो गए हैं. वहीं, इस बार अरब पार्टियां भी कमजोर हो गईं हैं, पहले की तरह किंगमेकर की भूमिका निभाना उनके लिए इस साल मुश्किल लग रहा है.
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गाजा जंग के बाद देश में पहला चुनाव
इजराइल और हमास युद्ध के बाद यह इजराइल का पहला आम चुनाव है. इस चुनाव में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नेतन्याहू प्रधानमंत्री बनेंगे या फिर नहीं. 3 साल पहले, जिस हमले ने इजराइल की राजनीति बदल दी थी, अब उसी हमले के लिए नेतन्याहू की सरकार से जवाब मांगा जा रहा है. हमले के वक्त नेतन्याहू ही प्रधानमंत्री थे. उनको देश की सुरक्षा में चूक का जिम्मेदार माना गया है.
पूर्व आर्मी चीफ नेतन्याहू को दे रहे हैं कड़ी चुनौती
खास बात है कि इस बार नेतन्याहूं के सामने इजराइल के पूर्व आर्मी चीफ गादी आइजेनकोट से सीधी चुनौती मिल रही है. आइजेनकोट की पार्टी कई हालिया सर्वे में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के बराबर या उससे आगे दिख रही है. लिकुड पार्टी को जहां 22 से 23 सीटें मिलती दिख रहीं हैं तो वहीं आइजेनकोट की पार्टी को लगभग 22 सीटें मिलती दिख रहीं हैं.
क्या है सत्तारूढ़ गठबंधन के हाल
बता दें, जैसे लिकुड पार्टी बहुमत से काफी दूर है, ठीक वैसे ही लिकुड पार्टी के नेतृत्व वाला गठबंधन भी बहुमत का आंकड़ा छू नहीं पा रहा है. हाल में किए गए सर्वे के अनुसार, गठबंधन को करीब 52-55 सीटें मिल रही हैं, वहीं, सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए.
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