बीमा नियामक IRDAI ने बीते 23 सितंबर को अपना परामर्श पत्र जारी किया था, जिसका टाइटल 'बीमा वितरण के अर्थशास्त्र को पुनर्गठित करने के लिए सुधार' था. इसके सामने आने के बाद इंश्योरेंस बिजनेस से जुड़ी कंपनियों के शेयर भरभराकर टूटे थे. अब इसे लेकर इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IBAI) ने प्रस्तावित बीमा डिस्ट्रीब्यूशन सुधारों पर चिंता जताई है. आईबीएआई ने चेतावनी दी गई है कि इन प्रस्तावित सुधारों से पॉलिसीधारकों के साथ रोजगार पर असर पड़ेगा.
IRDAI के फ्रेमवर्क का विरोध
गौरतलब है कि IBAI भारत के 798 लाइसेंस प्राप्त इंश्योरेंस ब्रोकर्स का प्रतिनिधित्व करता है. एसोसिएशन का कहना है कि वह पॉलिसीधारकों की सुरक्षा में सुधार, पारदर्शिता बढ़ाने और गलत बिक्री पर अंकुश लगाने के IRDAI के उद्देश्यों का समर्थन करता है, लेकिन बीमा डिस्ट्रीब्यूशन इकोनॉमिक्स को रेग्युलेट करने के लिए लाए जा रहे प्रस्तावित फ्रेमवर्क का विरोध करता है. प्रस्तावित बीमा रिफॉर्म पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी गई है कि सख्त कमीशन लिमिट पॉलिसीधारकों, रोजगार के साथ ही बीमा विकास पर असर डालेंगी.
किन ग्राहकों को बदलाव से नुकसान?
एसोसिएशन की चिंताओं में सबसे ऊपर बीमा प्रोडक्ट्स और डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों में प्रस्तावित 30 से अधिक कमीशन लिमिट हैं. अभी लाइफ इंश्योरेंस बेचने पर डिस्ट्रीब्यूटर को कमीशन के रूप में पहले साल 25 फीसदी से ज्यादा मिलता है, जबकि नए प्रस्ताव के मुताबिक ये घटकर सिर्फ 10 फीसदी आ जाएगा.
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IBAI के मुताबिक, नए प्रस्तावों से उन ग्राहकों को नुकसान हो सकता है जो अपनी इच्छा से बीमा प्रोडक्ट्स की तुलना करने, कवरेज पर बातचीत करने और क्लेम में सहायता के लिए ब्रोकर नियुक्त करते हैं. एसोसिएशन के अनुसार, बीमा ब्रोकरों को कानूनी रूप से बीमाकर्ताओं के बजाय ग्राहकों के हितों में काम करना होता है.
आंकड़ों का हवाला देते हुए IBAI ने कहा कि सामान्य बीमाकर्ताओं के खिलाफ 69% शिकायतें दावों से संबंधित हैं, जबकि इरडा पोर्टल पर दर्ज 63% शिकायतों का फैसला ग्राहकों के पक्ष में होता है. नए प्रस्ताव के तहत ग्राहकों द्वारा नियुक्त दलालों की भूमिका और कमीशन कम करने से दावों के दौरान पॉलिसीहोल्डर्स का सपोर्ट कमजोर हो सकता है.
रोजगार पर भी पड़ेगी मार
आईबीएआई ने ग्राहकों पर प्रस्तावित बीमा रिफॉर्म के असर के साथ ही यह चेतावनी भी दी कि ये इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में खासतौर पर छोटे शहरों और कस्बों में रोजगार को प्रभावित कर सकते हैं. एसोसिएशन के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक भारत के 27.18 लाख बिक्री केंद्रों में से 14.81 लाख को बीमा ब्रोकरों द्वारा कराया गया था. इनमें से कई कर्मचारी स्व-रोजगार वाले हैं और टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों में काम करते हैं.
IBAI ने उठाई ये मांग
इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से IRDAI से 2023 के व्यय प्रबंधन फ्रेमवर्क को बरकरार रखने का आग्रह किया है. इसके साथ ही कमीशन की अधिकतम सीमा को क्रेडिट से जुड़े और अन्य ऐसे मामलों तक सीमित करने का भी प्रस्ताव दिया है, जहां ग्राहकों के पास सीमित विकल्प होते हैं. इसके अलावा एसोसिएशन ने नए नियम बनाने से पहले नियामक प्रभाव के आकलन की भी डिमांड की है. IBAI ने कहा कि उसका रुख IRADI सुधारों के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह ऐसे उपायों की मांग करता है, जो बीमा वितरण और बाजार तक पहुंच को बनाए रखते हुए पॉलिसीधारकों को सीधे लाभ पहुंचाते हैं.
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