July 17, 2026

IPS, RAW, सेना...आखिर कौन था यह शख्स? देहरादून पुलिस के खुलासे ने सबको चौंका दिया

UPSC में फेल होकर आखिर कैसे बना यह शख्स IPS और RAW एजेंट? देहरादून में पकड़े गए इस हाई-प्रोफाइल बहरूपिये की वर्दी के पीछे छिपे अपराध का खौफनाक सच कर देगा आपको हैरान!

Fake IPS Officer Arrested Dehradun: देहरादून में पुलिस ने एक ऐसे हाई-प्रोफाइल और सनसनीखेज जालसाज को बेनकाब किया है, जिसकी हकीकत जानकर हर कोई हैरान है। एक बड़े रिटायर्ड सैन्य अधिकारी का बेटा, जिसने कभी देश की सेवा के लिए देश की सबसे कठिन परीक्षा की तैयारी की थी, वो आज सलाखों के पीछे है। वजह? अधिकारी बनने का उसका जुनून इस कदर सनक में बदला कि उसने खुद को IPS अफसर, RAW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) एजेंट, मिलिट्री अधिकारी और यहां तक कि CRPF का सीनियर कमांडर घोषित कर दिया। सालों तक कानून की आंखों में धूल झोंकने वाले इस शातिर 'बहरूपिये' यशोवर्धन (35 वर्ष) को आखिरकार देहरादून पुलिस ने मसूरी रोड से गिरफ्तार कर लिया है। आइए जानते हैं इस फर्जी अफसर के काले कारनामों और उसकी गिरफ्तारी की पूरी सस्पेंस से भरी दास्तान।

बचपन का सपना या अपराध का शॉर्टकट? नाकामियों ने बनाया शातिर अपराधी

जांच अधिकारियों के सामने पूछताछ के दौरान आरोपी यशोवर्धन ने जो कहानी बयां की, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी जो एक रिटायर्ड सीनियर अधिकारी हैं, के घर पैदा होने के कारण उसे बचपन से ही लाल बत्ती और रौबदार यूनिफॉर्म का बेहद क्रेज था। उसने सालों तक UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) की परीक्षा पास करने के लिए दिन-रात एक किए। लेकिन जब बार-बार की कोशिशों के बाद भी कामयाबी हाथ नहीं लगी, तो निराशा ने उसे एक ऐसे रास्ते पर धकेल दिया जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं था। उसने परीक्षा पास करने के बजाय सीधे 'वर्दी' और 'रौब' खरीदने का फैसला किया। उसने अपनी नाकामी को छिपाने और समाज में अपनी झूठी धक जमाने के लिए अधिकारियों का रूप धरना शुरू कर दिया।

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खुफिया सूटकेस का राज: पुलिस के हाथ लगीं फर्जी आईडी, यूनिफॉर्म और सीक्रेट लोगो

जब राजपुर पुलिस ने यशोवर्धन को घेरा और उसकी तलाशी ली, तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। उसके पास से सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने वाला पूरा साजो-सामान बरामद हुआ। पुलिस ने उसके पास से जब्त किया:

  • पांच फर्जी पहचान पत्र (ID Cards): जो अलग-अलग खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के नाम पर तैयार किए गए थे।
  • आठ फर्जी विजिटिंग कार्ड: जिन पर उसका नाम बड़े-बड़े ओहदों के साथ छपा था।
  • 25 फर्जी लोगो (चिह्न): जिनका इस्तेमाल वह अपनी गाड़ियों और दस्तावेजों को असली दिखाने के लिए करता था।
  • तीन सेट मिलिट्री व पैरामिलिट्री यूनिफॉर्म: जिन्हें पहनकर वह लोगों पर रौब झाड़ता था।

शिकार का तरीका: कभी डराकर तो कभी रसूख दिखाकर ऐंठे लाखों रुपये

यशोवर्धन बेहद शातिर तरीके से शिकार चुनता था। वह जिस व्यक्ति से मिलता था, उसकी जरूरत के हिसाब से अपना भेष बदल लेता था। हाल ही में उसके खिलाफ दो बड़ी शिकायतें दर्ज हुईं, जिन्होंने इस पूरे साम्राज्य का भंडाफोड़ कर दिया:

  • जल्दबाजी का झांसा (15 लाख की ठगी): देहरादून के डाकरा निवासी अंशुल उपाध्याय ने राजपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि यशोवर्धन ने खुद को बड़ा प्रशासनिक अधिकारी बताकर उनकी दिवंगत मां के नाम पर एक कंपनी का रजिस्ट्रेशन जल्द कराने के बहाने 15 लाख रुपये ऐंठ लिए।
  • रक्षा मंत्रालय में नौकरी का झांसा (4.60 लाख की ठगी): इसके ठीक एक हफ्ते बाद, 15 जुलाई को कैनाल रोड की रहने वाली डॉ. अनुषा ने शिकायत दर्ज कराई। यशोवर्धन ने खुद को सेना का बड़ा अधिकारी बताते हुए उन्हें रक्षा मंत्रालय में 'डेटा साइंस कंसल्टेंट' की सरकारी नौकरी दिलाने का वादा किया और इसके एवज में 4.60 लाख रुपये ठग लिए।

देशभर में फैला फर्जी अफसरों का मकड़जाल: शाहजहांपुर से दिल्ली तक मची है सनसनी

यशोवर्धन का मामला कोई अकेला मामला नहीं है। इन दिनों देश के अलग-अलग कोनों से वर्दी और सरकारी ओहदों का दिखावा कर ठगी करने के कई सनसनीखेज मामले सामने आए हैं:

  • दिल्ली का 'फर्जी ADM': हाल ही में दिल्ली में एक शख्स ने खुद को ADM (अपर जिला अधिकारी) बताकर सरकारी नौकरी और जमीन दिलाने के नाम पर लोगों से 60 लाख रुपये ठग लिए। उसने लोगों का भरोसा जीतने के लिए एक असली PCS अधिकारी के नाम का सहारा लिया था।
  • शाहजहांपुर का '21 साल का ब्रिगेडियर': शाहजहांपुर में महज 21 साल के एक लड़के को सेना का ब्रिगेडियर बनकर एक सरकारी म्यूजियम इवेंट में रौब झाड़ते हुए पकड़ा गया। सेना के खुफिया विभाग को शक होने पर जाल बिछाकर उसे दबोचा गया।

कानून का शिकंजा: अब खुलेंगे यशोवर्धन के सारे गुप्त राज!

पुलिस की कड़ी पूछताछ में यशोवर्धन ने कबूल किया है कि अंशुल और डॉ. अनुषा तो सिर्फ मोहरे थे, उसने इनके अलावा भी कई और लोगों को अपना शिकार बनाया है और उनसे लाखों रुपये ऐंठे हैं। पुलिस अब उन सभी लोगों का पता लगा रही है जो इस 'फर्जी RAW एजेंट' और 'IPS' के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठे। देहरादून पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी प्रतीकों के गलत इस्तेमाल जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की तफ्तीश की जा रही है। इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कानून की नजरों से बच पाना किसी भी बहरूपिये के लिए मुमकिन नहीं है।

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