Apple के प्रोडक्ट्स आजकल मार्केट में काफी ज्यादा पसंद किए जाते हैं. लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर iPhone की कीमत इतनी ज्यादा क्यों होती है जबकि कई iPad मॉडल उससे कम कीमत में मिल जाते हैं? दोनों ही Apple के डिवाइस हैं, दोनों में दमदार प्रोसेसर और प्रीमियम डिजाइन मिलता है, फिर कीमत में इतना अंतर क्यों? इसकी वजह सिर्फ स्क्रीन का आकार नहीं बल्कि Apple की पूरी प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी है. आइए जानते हैं क्यों ऐसा है.
दरअसल, iPhone को Apple अपने सबसे जरूरी और प्रीमियम प्रोडक्ट्स में रखता है. कंपनी इसमें बेहतर कैमरा सिस्टम, कॉम्पैक्ट बॉडी, प्रीमियम मटेरियल, सेलुलर कनेक्टिविटी और कई खास हार्डवेयर फीचर्स देती है.
iPhone ऐसा डिवाइस है जिसे लोग रोजाना कॉल, मैसेज, कैमरा, पेमेंट, सोशल मीडिया और इंटरनेट जैसे कामों के लिए इस्तेमाल करते हैं. इसलिए Apple इसके लिए ज्यादा कीमत वसूलने की कंडिशन में रहता है.
iPad की कीमत कम रखने की अलग रणनीति
iPad का बाजार थोड़ा अलग है. Apple के पास iPad की कई कैटेगरी हैं, एंट्री-लेवल मॉडल से लेकर iPad Air और iPad Pro तक. बेस मॉडल की कीमत कम रखकर Apple ज्यादा लोगों को अपने इकोसिस्टम में लाने की कोशिश करता है.
यानी हर iPad सस्ता नहीं है. iPad Pro जैसे हाई-एंड मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं, खासकर बड़ी स्क्रीन, ज्यादा स्टोरेज और बेहतर कॉन्फिगरेशन के साथ.
iPhone में कॉम्पैक्ट बॉडी के अंदर ज्यादा टेक्नोलॉजी
iPhone का आकार छोटा होता है लेकिन इसके अंदर काफी सारी टेक्नोलॉजी को लिमिटेड जगह में फिट करना पड़ता है. कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, प्रोसेसर, मॉडेम, स्पीकर, सेंसर और दूसरे कंपोनेंट्स को बेहद छोटे डिजाइन में पैक किया जाता है.
दूसरी तरफ, iPad की बड़ी बॉडी इंजीनियरिंग के लिहाज से कुछ चीजों को आसान बनाता है. बड़ी बैटरी और बड़ी स्क्रीन को एक साथ इकट्ठा करने के लिए ज्यादा जगह उपलब्ध होती है.
Cellular मॉडल भी बढ़ाते हैं कीमत
एक और बड़ा अंतर मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी का है. कई iPhone मॉडल सेलुलर नेटवर्क के लिए तैयार होते हैं. iPad में Wi-Fi मॉडल भी उपलब्ध हैं जिनकी कीमत Cellular मॉडल के मुकाबले में कम होती है.
यही वजह है कि अगर कोई सिर्फ Wi-Fi वाला iPad खरीदता है तो उसकी कीमत देखकर उसे लग सकता है कि Apple ने iPhone के मुकाबले में iPad को बहुत सस्ता बना दिया है.
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कीमत सिर्फ हार्डवेयर से तय नहीं होती
किसी डिवाइस की कीमत केवल उसके प्रोसेसर या स्क्रीन की लागत से तय नहीं होती है. इसमें रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सॉफ्टवेयर, कैमरा टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन, मार्केटिंग, सर्विस नेटवर्क और Apple की ब्रांड वैल्यू भी शामिल होती है. iPhone Apple के लिए सिर्फ एक हार्डवेयर प्रोडक्ट नहीं बल्कि उसके पूरे इकोसिस्टम का एंट्री गेट भी है.
असली खेल Apple की प्राइसिंग स्ट्रैटेजी का है
Apple अलग-अलग ग्राहकों के लिए अलग-अलग कीमत वाले प्रोडक्ट रखता है. कम कीमत वाला iPad छात्रों और नॉर्मल यूजर्स को आकर्षित करता है जबकि महंगा iPhone उन ग्राहकों को टारगेट करता है जो स्मार्टफोन में प्रीमियम फीचर्स चाहते हैं. इसलिए iPad बड़ा है तो महंगा होना चाहिए और iPhone छोटा है तो सस्ता, ये सोच सही नहीं है. Apple कीमत तय करते समय डिवाइस के इस्तेमाल, फीचर्स, कनेक्टिविटी, मार्केट पोजिशन और यूजर्स की पेमेंट क्षमता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखता है.
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