August 6, 2026

International Renewable Energy Conference: मध्यप्रदेश बना ग्रीन एनर्जी हब, अब 24x7 हरित ऊर्जा पर फोकस

दिल्ली ऊर्जा सम्मेलन में CM मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य में बड़ा योगदान देगा और ग्रीन एनर्जी हब बन रहा है।

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में आयोजित 7वें अंतर्राष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी-2026 में भाग लेते हुए कहा कि मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक देश के 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में पूरी प्रतिबद्धता के साथ योगदान देगा। उन्होंने कहा कि राज्य नवकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और हरित औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा देश के प्रमुख ग्रीन एनर्जी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

दिल्ली मेट्रो से पहुंचे सम्मेलन, दिया हरित परिवहन का संदेश

सम्मेलन में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एयरपोर्ट से शिवाजी स्टेडियम तक दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन से यात्रा की। उन्होंने इसे स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का प्रतीक बताया। दिल्ली मेट्रो अपने संचालन में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का उपयोग करती है। इसी वजह से मुख्यमंत्री ने मेट्रो यात्रा को हरित ऊर्जा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संदेश देने का माध्यम बनाया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश की ऊर्जा उपलब्धियों का प्रेजेंटेशन

नई दिल्ली में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी, भूटान के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री एच.ई. ल्योनपो जेम त्शेरिंग, श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणाथिलका, मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव सहित कई देशों के ऊर्जा विशेषज्ञ, नीति निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों, निवेश अवसरों और भविष्य की कार्ययोजना को विस्तार से प्रस्तुत किया।

12 साल में 25 गुना बढ़ी मध्यप्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में राज्य की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता 438 मेगावाट से बढ़कर 11,000 मेगावाट तक पहुंच गई है। यह लगभग 25 गुना वृद्धि है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान राज्य सरकार ने नवकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो ऊर्जा भंडारण और बायोमास से जुड़ी नई नीतियां लागू की हैं, जिससे निवेश और तकनीकी नवाचार को नई गति मिली है।

रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना बनी देश के लिए मिसाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि 750 मेगावाट क्षमता वाली रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना ने देश में पहली बार ऐसा उदाहरण पेश किया, जब सौर ऊर्जा का टैरिफ कोयला आधारित बिजली से भी कम रहा। इस परियोजना को वर्ल्ड बैंक ग्रुप प्रेसिडेंट्स अवार्ड फॉर एक्सीलेंस मिल चुका है। इतना ही नहीं, इसकी केस स्टडी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाई जाती है।

उन्होंने बताया कि 1,500 मेगावाट क्षमता वाली आगर-शाजापुर-नीमच सौर परियोजना में 2.14 रुपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड न्यूनतम सौर टैरिफ हासिल हुआ है। इस परियोजना से भारतीय रेलवे को आठ राज्यों में हरित ऊर्जा की आपूर्ति की जा रही है।

देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना भी मध्यप्रदेश में

डॉ. यादव ने कहा कि 278 मेगावाट क्षमता वाली देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना का लोकार्पण 25 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। उन्होंने बताया कि ‘सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना’ के अंतर्गत करीब 14,900 मेगावाट क्षमता के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें किसानों और एमएसएमई क्षेत्र की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली है।

बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर तेजी से काम

ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता को मजबूत करने के लिए राज्य में बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मुरैना में 440 मेगावाट सौर ऊर्जा और 880 मेगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता वाली परियोजना प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना है, जिसमें प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली खरीद समझौते किए गए हैं। इसके अलावा 4 घंटे, 6 घंटे और 24 घंटे की सौर-सह-ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि हर समय स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सके।

रूफटॉप सोलर और पीएम सूर्य घर योजना से बड़ा विस्तार

मुख्यमंत्री ने बताया कि रूफटॉप सोलर योजना के तहत 1,300 सरकारी भवनों पर 48 मेगावाट क्षमता विकसित की जा रही है। वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश के लगभग 1.5 लाख घरों में 566 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

मध्यप्रदेश बन रहा निवेशकों की पहली पसंद

डॉ. यादव ने कहा कि राज्य की निवेश-अनुकूल नीतियां, मजबूत आधारभूत संरचना और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता मध्यप्रदेश को तेजी से ग्रीन एनर्जी हब बना रही है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मध्यप्रदेश की हरित ऊर्जा क्षमता और निवेश संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। आने वाले वर्षों में प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी सराहा मध्यप्रदेश का योगदान

केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा तथा शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश जल्द ही 300 गीगावाट स्थापित गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता का आंकड़ा पार कर लेगा। प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से 50 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और सभी राज्यों को ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वच्छ ऊर्जा के व्यापक उपयोग पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

4 घंटे, 6 घंटे और 24 घंटे ऊर्जा भंडारण मॉडल क्या हैं?

4 घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना

ये परियोजनाएं दिन में उत्पादित सौर ऊर्जा को संग्रहित कर शाम के समय बढ़ती बिजली मांग को पूरा करती हैं और ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाती हैं।

6 घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना

लंबी अवधि तक ऊर्जा उपलब्ध कराने वाली ये परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग, मांग प्रबंधन और ग्रिड स्थिरता में अहम भूमिका निभाती हैं।

24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा एवं स्टोरेज परियोजना

सौर ऊर्जा और दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण के संयोजन से विकसित ये परियोजनाएं उद्योगों, वितरण कंपनियों और डेटा सेंटर जैसे बड़े उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम हैं।

NRED और रूम्सल की अहम भूमिका

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग (NRED) राज्य में ऊर्जा नीतियों के निर्माण, निवेश प्रोत्साहन, परियोजना विकास और ऊर्जा संक्रमण कार्यक्रमों के समन्वय का प्रमुख विभाग है। वहीं रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (RUMSL), मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड और सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) का संयुक्त उपक्रम है। यह संस्था बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा, फ्लोटिंग सोलर, हाइब्रिड ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विकास और क्रियान्वयन की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रही है।