October 3, 2026

Indira Ekadashi 2026: इस एकादशी का नाम इंदिरा क्यों पड़ा? जानिए पौराणिक कथा

Indira Ekadashi 2026: इस एकादशी का नाम इंदिरा क्यों पड़ा? जानिए पौराणिक कथा

इंदिरा एकादशी 2026Image Credit source: PTI

Indira Ekadashi 2026 Date: आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है. वर्ष 2026 में इंदिरा एकादशी का यह पावन पर्व 6 अक्टूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा. यह एकादशी पितृ पक्ष के दौरान आती है, इसलिए इसका धार्मिक दृष्टि से बहुत बड़ा महत्व है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से पूर्वजों को मुक्ति मिलती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पावन एकादशी का नाम इंदिरा क्यों पड़ा? इसके पीछे राजा इंद्रसेन से जुड़ी एक पौराणिक और अत्यंत रोचक कथा पाई जाती है. राजा इंद्रसेन के महान कर्मों और भगवान विष्णु की कृपा के कारण ही इस तिथि को यह खास नाम मिला. आइए जानते हैं राजा इंद्रसेन की इस पावन कथा के बारे में.

राजा इंद्रसेन और नारद मुनि का आगमन

पौराणिक कथा के अनुसार सत्ययुग में महिष्मती नाम की नगरी में राजा इंद्रसेन शासन करते थे. वे एक परम धर्मपरायण और विष्णु भक्त राजा थे. एक दिन राजा के दरबार में देवर्षि नारद मुनि का आगमन हुआ. राजा इंद्रसेन ने नारद जी का पूरे आदर के साथ स्वागत किया. नारद जी ने राजा को बताया कि वे यमलोक गए थे, जहां उन्होंने राजा के पिता को देखा. राजा के पिता अपने पूर्व जन्म के किसी अनजाने पाप के कारण यमलोक में कष्ट भोग रहे थे. उन्होंने नारद जी के माध्यम से राजा इंद्रसेन को यह संदेश भेजा कि यदि उनका पुत्र आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करे, तो उन्हें यमलोक के कष्टों से मुक्ति मिल सकती है और वे सीधे स्वर्ग लोक जा सकते हैं.

इंदिरा एकादशी व्रत और पिता की मुक्ति

नारद जी की बात सुनकर राजा इंद्रसेन ने अपने पिता की मुक्ति के लिए इस विशेष एकादशी का व्रत रखने का पूरा संकल्प लिया. नारद जी द्वारा बताई गई विधि के अनुसार राजा ने आश्विन कृष्ण एकादशी पर पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु का पूजन किया और उपवास रखा. राजा के इस पुण्य कर्म और भक्ति से प्रसन्न होकर उनके पिता को यमलोक के सभी कष्टों से तुरंत मुक्ति मिल गई और वे सीधे स्वर्ग लोक चले गए. राजा इंद्रसेन के नाम पर और उनके द्वारा किए गए इस महान कार्य के कारण ही इस तिथि का नाम इंदिरा एकादशी पड़ा. तभी से मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस व्रत को रखता है, उसके पूर्वजों को मोक्ष मिलता है और जीवन में सुख आता है.

इंदिरा एकादशी पर क्या करें और क्या न करें?

क्या करें?

भगवान विष्णु की पूजा: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, सात्विक वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें.

पितरों का तर्पण: दोपहर के समय भगवान विष्णु और पितरों के नाम से जल, तिल व कुशा लेकर तर्पण करें.

सात्विक आचरण: पूरे दिन मन में श्रद्धा बनाए रखें, विष्णु सहस्रनाम या भगवद्गीता का पाठ करें और सात्विक आहार लें.

अन्न और वस्त्र दान: किसी निर्धन या ब्राह्मण को फल, अन्न, वस्त्र या तिल का दान दें.

संध्या दीपक: शाम को घर के मुख्य द्वार और पीपल के पेड़ के नीचे पितरों के नाम का दीप प्रज्वलित करें.

क्या न करें?

तामसिक भोजन का सेवन: इस दिन घर में प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और अंडे का सेवन बिल्कुल न करें.

चावल खाने से बचें: एकादशी तिथि के दिन चावल पकाना और खाना दोनों पूरी तरह वर्जित माना गया है.

क्रोध और गृह क्लेश: इस पावन दिन किसी पर गुस्सा न करें, किसी का अनादर न करें और वाद-विवाद से दूर रहें.

शाम को तर्पण: सूर्यास्त के बाद गलती से भी श्राद्ध या तर्पण न करें, क्योंकि इससे पितृ अप्रसन्न होते हैं.

ये भी पढ़ें: पापांकुशा एकादशी पर तुलसी पूजन क्यों है इतना खास? जानिए मान्यता

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी प्रकार के सुझाव के लिए astropatri.com पर संपर्क करें.

दिव्या गौतम

दिव्या गौतम

दिव्या एक रचनात्मक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि वाली लेखक हैं, जो ज्योतिष, जीवनशैली और आत्म-ज्ञान से जुड़ी सामग्री लिखती हैं. इनके पास 3 साल 10 महीने का अनुभव है, जिसमें इन्होंने 2022 में इंडिया न्यूज़ डिजिटल के साथ बतौर लेखक काम करना शुरू किया था. दिव्या की लेखनी सरल, भावनात्मक और रोचक होती है, जो सीधे पाठक के हृदय तक पहुंचती है और जीवन के छोटे-छोटे रहस्यों, ज्योतिषीय सिद्धांतों और रोचक ज्ञान से परिचित कराती है. उनका उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं है, बल्कि पाठकों को आध्यात्मिक समझ, आत्म-ज्ञान से जोड़ना है. दिव्या का लेखन हर पाठक को उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है.

Read More

google button