IIT दिल्ली के MSc फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद संस्थान में जारी प्रदर्शन को लेकर छात्रों के बीच मतभेद सामने आने लगे हैं। जहां IIT दिल्ली के छात्र मामले की स्वतंत्र जांच, जवाबदेही और छात्र कल्याण व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रदर्शन में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU के छात्रों की भागीदारी को लेकर कुछ IIT छात्रों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बाहरी राजनीतिक दखल से मूल मुद्दा कमजोर हो सकता है।
IIT दिल्ली के एक छात्र सक्षम ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को धीरे-धीरे राजनीतिक दिशा देने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि IIT दिल्ली में छात्रों की मौत और संस्थान की छात्र कल्याण व्यवस्था से जुड़े सवालों पर IIT के छात्र खुद अपनी आवाज उठा रहे हैं।
छात्र ने साफ तौर पर कहा कि यह प्रदर्शन IIT दिल्ली का है, JNU या दिल्ली विश्वविद्यालय का नहीं, इसलिए दूसरे परिसरों से आने वाले लोगों को यह तय नहीं करना चाहिए कि आंदोलन किस दिशा में जाएगा। छात्रों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता ऋषिकेश कुमार की मौत की निष्पक्ष जांच और संस्थान में जरूरी सुधार हैं।
ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन
31 वर्षीय MSc फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की 22 अगस्त को IIT दिल्ली परिसर में छठी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है और बाद में अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी FIR भी दर्ज की गई। छात्रों ने इस घटना को लेकर संस्थान प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही, छात्र कल्याण व्यवस्था में सुधार और ऋषिकेश के परिवार के लिए उचित मुआवजा शामिल है। कुछ छात्र डीन और छात्र कल्याण से जुड़े अधिकारियों के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।
IIT छात्रों का आरोप- मुद्दे से भटक सकता है आंदोलन
प्रदर्शन में JNU के छात्रों की मौजूदगी को लेकर नाराज छात्रों का कहना है कि IIT दिल्ली के अंदर उठे इस मुद्दे को किसी बड़े राजनीतिक आंदोलन का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे छात्रों की वास्तविक मांगें पीछे छूट सकती हैं और आंदोलन की दिशा बदल सकती है।
एक IIT छात्र ने कहा कि बाहर से आने वाले राजनीतिक प्रभावों के कारण प्रदर्शन की एकता प्रभावित हो रही है। छात्रों का जोर इस बात पर है कि आंदोलन को छात्र कल्याण और संस्थागत सुधार तक सीमित रखा जाए।
JNU छात्रों ने भी जताया समर्थन
दूसरी ओर, JNU के छात्रों ने IIT दिल्ली के बाहर प्रदर्शन कर ऋषिकेश कुमार की मौत के मामले में जवाबदेही की मांग की थी। JNU छात्र नेताओं का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मौत को सामान्य घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने छात्र सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और कथित भेदभाव से जुड़े मुद्दों पर व्यापक सुधार की मांग उठाई।
IIT दिल्ली ने बनाई बाहरी जांच समिति
लगातार विरोध के बीच IIT दिल्ली ने मामले की जांच के लिए एक बाहरी समिति गठित करने की घोषणा की है। समिति को ऋषिकेश कुमार की मौत से जुड़े हालात और संस्थान की प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का जिम्मा दिया गया है। छात्रों के मुताबिक, वे केवल समिति बनाने से संतुष्ट नहीं हैं और जवाबदेही की अपनी अन्य मांगों पर भी कायम हैं।
फिलहाल IIT दिल्ली में प्रदर्शन जारी है और छात्रों के बीच यह बहस भी तेज हो गई है कि आंदोलन को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए। एक पक्ष जहां दूसरे विश्वविद्यालयों के छात्रों के समर्थन को व्यापक छात्र एकजुटता के रूप में देख रहा है, वहीं IIT दिल्ली के कुछ छात्र इसे अपने संस्थान के मुद्दे का राजनीतिकरण मान रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऋषिकेश कुमार की मौत की जांच और छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ेगा।