July 27, 2026

IIT कानपुर से पढ़े अर्जव मोदी ने छोड़ी 40 लाख की नौकरी वाली जिंदगी, बोले- पहाड़ों का सुकून ज्यादा कीमती

ज्यादा कमाई या सुकून भरी जिंदगी? यह सवाल आज के दौर में कई युवाओं के सामने खड़ा है। जहां बड़ी सैलरी, कॉर्पोरेट लाइफ और शहरों की चमक को सफलता का पैमाना माना जाता है, वहीं कुछ लोग मानसिक शांति और संतुलित जीवन को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है IIT कानपुर से पढ़े अर्जव मोदी ने, जिन्होंने बेंगलुरु की हाई-फाई कॉर्पोरेट लाइफ छोड़कर पहाड़ों में रहना शुरू कर दिया।

अर्जव मोदी ने अपनी जिंदगी के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने बेंगलुरु की तेज रफ्तार कॉर्पोरेट लाइफ और पहाड़ों की धीमी व शांत जिंदगी के बीच बड़ा अंतर महसूस किया।

उनका कहना है कि बेंगलुरु में अच्छी सैलरी और सुविधाएं होने के बावजूद जीवन में लगातार भागदौड़ बनी रहती थी। वहीं, पहाड़ों में कम आय और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्हें ज्यादा सुकून और खुशी महसूस होती है।

अर्जव के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति मानसिक शांति को प्राथमिकता देता है तो उसे कम सुविधाओं में भी जिंदगी ज्यादा खूबसूरत लग सकती है।

चार महीने पहले पहाड़ों में हुए शिफ्ट

अर्जव वर्तमान में राइटिंग फील्ड में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले चार महीनों से पहाड़ों में रह रहे हैं और इस बदलाव ने उनके नजरिए को पूरी तरह बदल दिया है।

उन्होंने कहा कि शहरों में जहां लोग पैसे और करियर की दौड़ में लगातार व्यस्त रहते हैं, वहीं पहाड़ों में जीवन की छोटी-छोटी चीजों को महसूस करने का मौका मिलता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनुभव

अर्जव की यह सोच सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। कई लोगों ने उनकी बातों से सहमति जताई और कहा कि आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य और जीवन का संतुलन भी उतना ही जरूरी है जितना पैसा कमाना।

कई यूजर्स ने कहा कि सफलता केवल बड़ी नौकरी या ज्यादा कमाई से तय नहीं होती, बल्कि यह भी जरूरी है कि व्यक्ति अपनी जिंदगी से कितना खुश है।

युवाओं के लिए संदेश

अर्जव का कहना है कि हर व्यक्ति को अपनी प्राथमिकताएं खुद तय करनी चाहिए। उन्होंने यह नहीं कहा कि बड़ी नौकरी या ज्यादा पैसा गलत है, लेकिन जीवन में शांति और खुशी के महत्व को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

उनके अनुसार, कई बार हम बेहतर भविष्य की तलाश में वर्तमान के अच्छे पलों को खो देते हैं। इसलिए जरूरी है कि करियर के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाए।

अर्जव मोदी की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो सफलता के पारंपरिक रास्तों से अलग हटकर अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना चाहते हैं। उनका मानना है कि असली कामयाबी वही है, जिसमें इंसान खुद को खुश और संतुष्ट महसूस करे।