एमओयू साइन करने के दौरान ट्रिपल आईटी ऊना के निदेशक प्रो मनीष गौर व एनआईटी पटना के असिस्टेंट डीन (एकेडमिक) डॉ. अंकुर कुमार।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) ऊना और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) पटना ने एक समझौता ज्ञापन पर साइन किए हैं। इसका मकसद शैक्षणिक सहयोग, संयुक्त रिसर्च, इनोवेशन और छात्रों के विकास को मजबूत करना है।
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ट्रिपल आईटी ऊना की तरफ से निदेशक प्रो. मनीष गौर और एनआईटी पटना के असिस्टेंट डीन (एकेडमिक) डॉ. अंकुर कुमार ने इस पर साइन किए। एनआईटी पटना की तरफ से निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार जैन और कुल सचिव डॉ. असीत नारायण ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ज्ञापन पांच साल तक लागू रहेगा।
दोनों संस्थान कई क्षेत्रों में सहयोग करेंगे इस एमओयू के तहत दोनों संस्थान कई क्षेत्रों में सहयोग करेंगे। इनमें शैक्षणिक कार्यक्रम, पाठ्यक्रम विकास, संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट, रिसर्च सुविधाओं और उपकरणों का साझा इस्तेमाल शामिल है। साथ ही, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी छात्रों का संयुक्त पर्यवेक्षण भी किया जाएगा।
छात्रों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना मकसद इस साझेदारी का मुख्य मकसद शिक्षकों और छात्रों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। दोनों संस्थानों के छात्रों को तय नियमों के तहत दूसरे संस्थान में समर रिसर्च इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा। एमओयू में विजिटिंग स्टूडेंट्स प्रोग्राम भी शामिल है। इसके तहत बी.टेक और एम.टेक के छात्र दूसरे संस्थान में एक सेमेस्टर बिता सकेंगे। वे क्रेडिट-आधारित कोर्स में हिस्सा ले सकेंगे और रिसर्च, इंटर्नशिप या प्रोजेक्ट वर्क कर सकेंगे।

ट्रिपल आईटी ऊना के निदेशक का डॉ. अंकुर कुमार स्वागत करते हुए।
पीएचडी प्रोग्राम में जल्दी एडमिशन का मौका इस एमओयू से अंतिम वर्ष के बी.टेक और दूसरे वर्ष के एम.टेक छात्रों को फायदा होगा। उन्हें सहयोगी संस्थान के पीएचडी प्रोग्राम में जल्दी एडमिशन का मौका मिलेगा। शिक्षक भी दूसरे संस्थान में पोस्टडॉक्टोरल और अन्य शैक्षणिक अवसरों का लाभ उठा सकेंगे।
सतत शिक्षा कार्यक्रमों को बढ़ावा देगी साझेदारी यह साझेदारी संयुक्त वर्कशॉप, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और छोटे समय के सतत शिक्षा कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देगी। इसके अलावा, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, लाइब्रेरी और लैब का साझा इस्तेमाल, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इनक्यूबेशन सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। रिसर्च आधारित स्टार्ट-अप्स को भी बढ़ावा मिलेगा।
दोनों संस्थानों की आपसी सहमति से तय होंगी गतिविधियां इस एमओयू के तहत खास सहयोगी गतिविधियां दोनों संस्थानों की आपसी सहमति से तय होंगी। यह साझेदारी दोनों संस्थानों के छात्रों और शिक्षकों के लिए शैक्षणिक अवसरों को बढ़ाएगी। साथ ही, रिसर्च नेटवर्क को भी मजबूत करेगी।