August 3, 2026

शिमला: स्क्रब टाइफस का खतरा बढ़ा, IGMC में दो नए मामले सामने आए

हिमाचल की राजधानी शिमला के IGMC में स्क्रब टाइफस के दो नए मामलों की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही इस सीजन में कुल पॉजिटिव केस तीन हो गए हैं। डॉक्टरों ने लोगों को खेतों या झाड़ियों में जाने के बाद बुखार, सिरदर्द जैसे लक्षणों पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी है।

शिमला (हिमाचल प्रदेश) [भारत], 3 अगस्त (एएनआई): हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (आईजीएमसी) में स्क्रब टाइफस के दो नए मामलों की पुष्टि हुई है। अस्पताल अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि इसके साथ ही इस सीजन में पॉजिटिव पाए गए मामलों की कुल संख्या तीन हो गई है।

आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव के अनुसार, सोमवार को नौ खून के नमूनों की जांच की गई, जिनमें से दो स्क्रब टाइफस के लिए पॉजिटिव पाए गए, जबकि बाकी सात निगेटिव निकले। जिन दो मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, उनकी पहचान मंडी जिले की करसोग तहसील के शकरा गांव के निवासी धनंजय (24) और शिमला जिले के दुर्गापुर के रहने वाले कुंदन लाल (54) के रूप में हुई है।

डॉक्टर ने दी सलाह

डॉ. राव ने बताया कि अब तक आईजीएमसी में 38 नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से तीन मरीजों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे लगातार बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें, खासकर खेतों, झाड़ियों या जंगली इलाकों में जाने के बाद। उन्होंने ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी है। डॉ. राव ने कहा, "बचाव ही स्क्रब टाइफस से सबसे अच्छी सुरक्षा है। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से इस बीमारी को सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है।"

संक्रमण से कैसे बचें

स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों, विशेषकर किसानों, मजदूरों और खेतों या जंगली इलाकों में काम करने वालों को पूरी बाजू के कपड़े पहनने, सीधे घास या झाड़ियों पर बैठने या लेटने से बचने और संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है।

क्या है स्क्रब टाइफस?

स्क्रब टाइफस 'ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी' नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला एक संक्रमण है, जो संक्रमित लार्वा माइट्स (चिगर्स) के काटने से इंसानों में फैलता है। ये माइट्स आमतौर पर झाड़ियों, घास के मैदानों और जंगली क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इस बीमारी में आमतौर पर तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द, बदन दर्द और कुछ मामलों में, माइट के काटने की जगह पर एक विशेष काला पपड़ीदार निशान (एस्चर) बन जाता है। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकता है और कई अंगों को प्रभावित कर सकता है।

बीमारी का इतिहास और प्रभाव क्षेत्र

ऐतिहासिक रूप से, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा और सीलोन में तैनात कई मित्र देशों के सैनिकों की मौत स्क्रब टाइफस से हुई थी और इसे लंबे समय से पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संक्रामक रोग के रूप में जाना जाता है। यह बीमारी एक विशाल भौगोलिक क्षेत्र में फैली हुई है, जिसे "त्सुत्सुगामुशी त्रिभुज" के नाम से जाना जाता है। यह उत्तर में उत्तरी जापान और पूर्वी रूस से लेकर दक्षिण में उत्तरी ऑस्ट्रेलिया तक, और पश्चिम में पाकिस्तान और अफगानिस्तान से लेकर पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों तक फैला हुआ है।

समय पर इलाज है जरूरी

शुरुआती चरण में बीमारी का पता लगने और उचित एंटीबायोटिक दवाओं के साथ तुरंत इलाज शुरू करने से गंभीर बीमारी और मृत्यु का खतरा काफी कम हो जाता है। (एएनआई)

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