कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की गाड़ियों पर ‘बिश्नोई’ सरनेम वाली नंबर प्लेट को लेकर विवाद सामने आया है। लॉरेंस गैंग के बढ़ते आपराधिक मामलों के चलते ब्रिटिश कोलंबिया की सरकारी वाहन बीमा एजेंसी ICBC सुरक्षा का हवाला देकर नंबर प्लेट बदलने या हटाने की सल
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भारतीय नागरिक मंजू बिश्नोई ने एक इंटरव्यू में कहा कि ICBC के एक अधिकारी का उन्हें फोन आया, जिसमें उसने कहा कि कि भले ही आपका किसी आपराधिक गिरोह से कोई संबंध न हो, लेकिन ‘बिश्नोई’ नाम को लेकर गलतफहमी के कारण सड़क पर उनके साथ नफरत या हमला होने का खतरा हो सकता है।
मंजू ने इस सलाह पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी निर्दोष व्यक्ति को अपनी पहचान या सरनेम छिपाने के लिए कहना समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा करना पुलिस और सरकार की जिम्मेदारी है।
मंजू के मुताबिक, उन्होंने यह नंबर प्लेट 2023 में अपने परिवार के सरनेम के तौर पर ली थी और लंबे समय तक इससे कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाद बढ़ने के बाद भारतीय-कनाडाई समुदाय के कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर उनकी नंबर प्लेट को लेकर बहस की और उन पर हमला किया। मंजू का कहना है कि ‘बिश्नोई’ एक सामान्य सरनेम भी है और इसका किसी गैंग से कोई संबंध नहीं है।
गौरतलब है कि कनाडा सरकार ने 29 सितंबर 2025 को लॉरेंस गैंग को क्रिमिनल कोड के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया था। वहां के आधिकारिक दस्तावेजों में इसी संगठन को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम दर्ज किया गया है। इस वजह से ‘बिश्नोई’ नाम देखकर लोग इसे गैंग से जोड़ होने का शक करते हैं। हालांकि, बिश्नोई सरनेम लिखने से यह सबित नहीं होता है कि वह व्यक्ति गैंग से जुड़ा है।

भारतीय नागरिक मंजू बिश्नोई ने कहा कि ICBC के अधिकारी फोन कर नंबर प्लेट बदलने को कहा।
ICBC ने सुरक्षा के लिए नंबर प्लेट बदलने को कहा
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में गाड़ियों के इंश्योरेंस और लाइसेंस का काम संभालने वाली सरकारी संस्था ICBC ने भारतीय नागरिक मंजू बिश्नोई को नंबर प्लेट बदलने की सलाह दी। संस्था ने कहा कि भले ही उनका किसी आपराधिक गिरोह से कोई संबंध न हो, लेकिन हाल के विवादों के कारण ‘बिश्नोई’ नाम को कुछ लोग गलत नजर से देख रहे हैं।
ऐसे में सड़क पर कोई व्यक्ति उनकी नंबर प्लेट देखकर उन पर हमला कर सकता है या नफरत फैला सकता है। ICBC ने उनकी सुरक्षा के लिए पुरानी प्लेट जमा कर नई और सामान्य नंबर प्लेट लेने को कहा।
मंजू बोले- पहचान छिपाना समाधान नहीं
मंजू बिश्नोई ने नंबर प्लेट बदलने की सलाह पर सवाल उठाए। उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि अगर किसी निर्दोष व्यक्ति को अपनी गाड़ी से अपना सरनेम हटाना पड़े तो यह सही तरीका नहीं है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा करना पुलिस और सरकार की जिम्मेदारी है। अगर किसी नाम या पहचान को लेकर नफरत फैल रही है, तो सरकार को हमलावरों पर कार्रवाई करनी चाहिए, न कि आम नागरिक को अपनी पहचान छिपाने की सलाह देनी चाहिए।
मंजू ने कहा कि आज सरकार उपनाम हटाने को कह रही है, कल नफरत करने वाले लोग देश छोड़ने की बात कह सकते हैं। उनके मुताबिक, समस्या का समाधान पहचान मिटाना नहीं, बल्कि सुरक्षा देना और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना है।
2023 में ली थी कार के लिए नंबर प्लेट
इंटरव्यू में मंजू ने बताया कि उन्होंने यह खास नंबर प्लेट 2023 में अपनी कार के लिए ली थी। उस समय तक कनाडा सरकार ने लॉरेंस गैंग को किसी बड़े आपराधिक या आतंकवादी गिरोह के रूप में दर्ज नहीं किया था। उन्होंने यह प्लेट किसी विवाद की वजह से नहीं, बल्कि अपने परिवार के सरनेम के तौर पर चुनी थी।
मंजू के मुताबिक, 2023 से लंबे समय तक वह इसी प्लेट के साथ गाड़ी चलाते रहे और उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। सड़क पर किसी ने उनकी नंबर प्लेट को लेकर सवाल नहीं उठाया और न ही उनके साथ नफरत जैसा व्यवहार हुआ।
अपने ही समुदाय के लोगों पर हमले का आरोप
मंजू ने बताया कि उन्हें किसी विदेशी नागरिक ने नहीं, बल्कि भारतीय-कनाडाई समुदाय के कुछ लोगों ने निशाना बनाया। उनके मुताबिक, ‘बिश्नोई’ नाम को लेकर विवाद बढ़ने के बाद कुछ लोगों ने यह समझने की कोशिश नहीं की कि यह एक सामान्य सरनेम भी है और इसका किसी अपराध से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी ही कम्युनिटी के कुछ लड़कों ने सड़क पर उन्हें घेर लिया, उनकी गाड़ी की नंबर प्लेट को लेकर बहस की और उन पर हमला कर दिया। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। मंजू ने कहा कि यह दुखद है कि उनके ही समुदाय के कुछ लोगों ने नफरत के माहौल में एक निर्दोष व्यक्ति को निशाना बनाया।

लॉरेंस गैंग को ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित क्यों किया..
- कनाडा में आतंक और भय का माहौल: मीडियो रिपोर्ट के अनुसार, यह गैंग कनाडा में रह रहे दक्षिण-एशियाई (विशेषकर भारतीय) प्रवासियों, व्यापारियों और सांस्कृतिक हस्तियों को निशाना बनाकर लगातार जबरन वसूली, गोलीबारी, आगजनी और हत्याओं को अंजाम दे रहा था, जिससे समाज में डर का माहौल पैदा हो गया था।
- दक्षिण-एशियाई कारोबारियों को निशाना बनाना: ब्रिटिश कोलंबिया और ओन्टारियो जैसे प्रांतों में भारतीय मूल के व्यापारिक मालिकों को गैंग द्वारा हत्या की धमकियां देकर रंगदारी वसूलने की शिकायतें बहुत बढ़ गई थीं। प्रांतीय मुख्यमंत्रियों ने सरकार से कानून प्रवर्तन को अधिक शक्तियां देने के लिए इस गैंग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।
- अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क: कनाडाई पुलिस (RCMP) और अमेरिकी जांच एजेंसी (FBI) की संयुक्त जांच में सामने आया कि यह गिरोह भारत की जेलों से संचालित होने के बावजूद कनाडा और अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी, हथियारों की तस्करी और अपहरण जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों का जाल फैला चुका है।
- कठोर कानूनी कार्रवाई के लिए आवश्यक: साधारण क्रिमिनल गैंग होने पर पुलिस के पास सीमित अधिकार थे। 'आतंकवादी संगठन' का दर्जा मिलने के बाद कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों को गैंग की संपत्तियों व बैंक खातों को फ्रीज करने, उनकी गाड़ियों को जब्त करने, और गैंग को फंडिंग या सपोर्ट करने वाले किसी भी कनाडाई नागरिक पर आतंकवाद विरोधी धाराओं में मुकदमा चलाने की असीमित कानूनी शक्तियां मिल गईं।
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कनाडा में लॉरेंस गैंग को लेकर सियासत गरमा गई है। गैंग की ओर से कनाडा में राज करने की धमकी वाला कथित लेटर सामने आने के बाद वहां के सांसद ब्रैड विस ने लॉरेंस गैंग का एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में 10 फायरिंग की घटनाओं के फुटेज शामिल किए गए हैं। जिसमें शूटर मशीन गन से गोलियां चलाते दिख रहे हैं। (पढ़ें पूरी खबर)