18 अगस्त 2026, विदिशा: विदिशा में आधुनिक खेती को बढ़ावा, ICAR वैज्ञानिक किसानों को सिखाएंगे उन्नत तकनीक; धान-बेर-टमाटर की नई किस्मों पर जोर – मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कृषि रोडमैप के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन गतिविधियों में उन्नत किस्मों के प्रदर्शन एवं वितरण, बागवानी फसलों को बढ़ावा, मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, जल प्रबंधन, फसल उत्पादन तकनीक तथा कृषकों के क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) एवं उससे संबद्ध संस्थानों के वैज्ञानिकों के सहयोग से चयनित ग्रामों में किसानों को नवीन कृषि तकनीकों से जोड़ा जा रहा है।
उन्नत अरहर किस्म का प्रदर्शन
कृषि रोडमैप के अंतर्गत ICAR-PR केन्द्र भोपाल के सहयोग से कुरवाई विकासखंड के ग्राम सीरखेला में अरहर की उन्नत किस्म PA 15-6 का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को उन्नत किस्म की उत्पादन क्षमता, फसल प्रबंधन एवं आधुनिक कृषि तकनीकों से परिचित कराना है, ताकि क्षेत्र में दलहन उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके और किसानों की आय में वृद्धि हो।
बेर एवं अन्य उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा
उद्यानिकी क्षेत्र में भी नवीन एवं उन्नत किस्मों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उद्यानिकी विभाग के सहयोग से चयनित किसानों को बेर की उन्नत किस्म TAG-73 का पौध सामग्री/रोपण सामग्री उपलब्ध कराने की गतिविधि की जा रही है। इसके लिए विकासखंड नटेरन के ग्राम काम पगारिया, गुर्जरखेड़ी, खेराई, नेवती तथा फूफेर सहित चयनित क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराकर उद्यानिकी फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादकता में वृद्धि करना है। बेर जैसी फल फसलें किसानों के लिए अतिरिक्त एवं दीर्घकालिक आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।
धान की उन्नत किस्मों का वितरण
धान उत्पादन में नवीन किस्मों को बढ़ावा देने के लिए ICAR-ARI नई दिल्ली एवं ICAR-CRRI कटक के सहयोग से उन्नत धान किस्मों CR धान 802 एवं CR धान 348 की रोपण सामग्री/बीज का वितरण किए जाने की गतिविधि शामिल है। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन क्षमता वाली किस्मों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
विदिशा जिले के चयनित ग्रामों में इन गतिविधियों के माध्यम से किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
उच्च गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री उपलब्ध कराने की पहल
ICAR-CS4 लखनऊ के सहयोग से विदिशा उद्यानिकी क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली फलदार फसलों की रोपण सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। चयनित क्षेत्रों में किसानों की आवश्यकता के अनुसार उन्नत पौध सामग्री उपलब्ध कराकर बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा नटेरन एवं विदिशा विकासखंड के चयनित ग्रामों में उद्यानिकी एवं कृषि से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
टमाटर की नवीन किस्मों एवं जल प्रबंधन पर कार्य
ICAR-IIVR वाराणसी के सहयोग से टमाटर की नवीन किस्मों के वितरण की गतिविधि प्रस्तावित है। इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जल प्रबंधन, सोयाबीन में BBF तकनीक, खरपतवार एवं कीट प्रबंधन तथा सब्जियों में आधुनिक उत्पादन तकनीकों के संबंध में किसानों को तकनीकी जानकारी देने की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
इन गतिविधियों के लिए चयनित ग्रामों एवं प्रदर्शन स्थलों का निर्धारण किया जा रहा है, ताकि स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकों का प्रभावी प्रदर्शन किया जा सके।
मृदा स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता
कृषि रोडमैप के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ICAR-ISS भोपाल एवं KVK विदिशा द्वारा चयनित ग्रामों के किसानों के खेतों से अब तक 14 मृदा नमूने एकत्रित किए गए हैं, जिनकी जांच की प्रक्रिया जारी है।
मृदा परीक्षण के माध्यम से खेत की उर्वरता, पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा फसल के लिए आवश्यक उर्वरक प्रबंधन की जानकारी प्राप्त होगी। इससे किसानों को मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए मार्गदर्शन मिल सकेगा और अनावश्यक लागत में कमी लाने में मदद मिलेगी।
मृदा नमूना संग्रह के लिए विदिशा विकासखंड के ग्राम बागौरा, बरखेड़ी, जैतू, बासौदा विकासखंड के चयनित ग्राम, कुरवाई विकासखंड के ग्राम ईशरखेड़ी, नटेरन विकासखंड के ग्राम गोकुलपुर तथा ग्यारसपुर विकासखंड के चयनित ग्रामों को गतिविधियों में शामिल किया गया है।
वैज्ञानिकों के साथ कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा
कृषकों के क्षमता निर्माण एवं जागरूकता के लिए कृषि वैज्ञानिकों के साथ सीधे संवाद की गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। ICAR-ISS, ICAR-HARI, ICAR-IVRI, ICAR-CISH तथा ICAR-CRRI सहित विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक चयनित ग्रामों में पहुंचकर कृषकों से कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा कर रहे हैं।
इन परिचर्चाओं में किसानों को चयनित फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीक, मृदा स्वास्थ्य, जल प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन, उन्नत बीजों के उपयोग, उद्यानिकी फसलों की देखभाल तथा आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जा रही है। कृषक-वैज्ञानिक संवाद के लिए ग्राम बागौरा, बरखेड़ी, जैतू, विदिशा विकासखंड तथा बासौदा, कुरवाई, नटेरन और ग्यारसपुर विकासखंड के चयनित ग्रामों को शामिल किया गया है।
कृषि को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कदम
कृषि रोडमैप के अंतर्गत संचालित ये गतिविधियां जिले में कृषि को परंपरागत पद्धतियों से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक, तकनीक आधारित और अधिक लाभकारी कृषि की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्नत बीज एवं पौध सामग्री के प्रदर्शन, मृदा परीक्षण, जल प्रबंधन, फसल तकनीक और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिले में कृषि वैज्ञानिकों, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग तथा संबंधित अनुसंधान संस्थानों के समन्वय से इन गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नई तकनीकों को अपनाने का अवसर मिलेगा और कृषि उत्पादकता तथा किसानों की आय में वृद्धि की संभावनाएं मजबूत होंगी।
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