August 5, 2026

सावजी मटन पर IAS तुकाराम मुंढे के एक बयान से सुलग उठा विदर्भ, सड़कों पर उतरा हलबा समाज, जानें विवाद की जड़| Navbharat Live

Updated On: Aug 05, 2026 | 07:21 PM IST

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सार

Savji Mutton Controversy: IAS तुकाराम मुंढे के सावजी मटन पर दिए बयान से विदर्भ में हलबा समाज और सावजी फूड लवर्स भड़क गए है। जानें क्यों सड़कों पर उतरे लोग और क्या है इस विवाद की पूरी सच्चाई।

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तुकाराम मुंढे के स्टेटमेंट पर विवाद की सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)

विस्तार

Tukaram Mundhe Savji Mutton Statement: महाराष्ट्र के कड़क मिजाज और अक्सर चर्चाओं में रहने वाले आईएएस अधिकारी व वर्तमान में FDA विभाग के आयुक्त तुकाराम मुंढे एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार विवाद उनके किसी प्रशासनिक फैसले को लेकर नहीं, बल्कि विदर्भ की प्रसिद्ध सावजी पाक कला पर की गई एक टिप्पणी को लेकर है। उनके एक बयान ने पूरे विदर्भ, विशेषकर हलबा समाज में गुस्से की लहर पैदा कर दी है।

अमरावती में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तुकाराम मुंढे ने नागपुर के मशहूर सावजी मटन को लेकर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था, अगर मैं सावजी मटन खा लूं, तो महीने भर के लिए बीमार पड़ जाऊंगा। मुंढे का यह बयान सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया। विदर्भ के लोगों के लिए सावजी केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि उनकी पहचान और संस्कृति का हिस्सा है। ऐसे में एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा इसे बीमारी से जोड़ना लोगों को रास नहीं आया।

सड़कों पर उतरा हलबा समाज

मुंढे के इस बयान के बाद विदर्भ के कई जिलों, विशेषकर नागपुर और अमरावती में हलबा समाज ने कड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि सावजी मटन विदर्भ की खाद्य संस्कृति का गौरव है। सावजी समाज के लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे और तुकाराम मुंढे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मुंढे ने जानबूझकर इस पारंपरिक व्यंजन का अपमान किया है, जिससे इस व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है।

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मैं अपने बयान पर कायम हूं

विवाद बढ़ता देख तुकाराम मुंढे ने अपनी सफाई पेश की, लेकिन वे अपने रुख पर अडिग नजर आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह बयान अपनी व्यक्तिगत सेहत के संदर्भ में दिया था। मुंढे ने कहा, मैंने यह कहा था कि अगर मैं सावजी खाऊंगा तो बीमार पड़ जाऊंगा, मैंने दूसरों को इसे खाने से मना नहीं किया है।

उन्होंने अपना एक पुराना किस्सा साझा करते हुए बताया कि एक बार उनके मित्र ने उन्हें जबरदस्ती सावजी खिलाने ले गए थे। वहां मटन का रंग और उस पर तैरता हुआ तेल देखकर उन्होंने केवल एक निवाला लिया और वहां से उठ गए। मुंढे ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस मामले में माफी मांगने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता, क्योंकि उन्होंने केवल अपनी पसंद और स्वास्थ्य के बारे में बात की थी।

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सोशल मीडिया पर छिड़ा सावजी वॉर

मुंढे के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है। जहां कुछ लोग तुकाराम मुंढे के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने के तर्क का समर्थन कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग सावजी मटन की तस्वीरें पोस्ट कर सावजी चैलेंज दे रहे हैं। ट्विटर और फेसबुक पर सावजी मटन ट्रेंड करने लगा है और लोग एक-दूसरे को चलो सावजी खाने चलते हैं जैसे संदेश भेजकर मुंढे की टिप्पणी का जवाब दे रहे हैं।

फिलहाल, विदर्भ में माहौल गर्माया हुआ है। हलबा समाज इस अपमान को भूलने के मूड में नहीं है, जबकि तुकाराम मुंढे ने साफ कर दिया है कि वे अपनी बात से पीछे नहीं हटेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस सांस्कृतिक और भावनात्मक विवाद को कैसे शांत करता है।

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