October 23, 2026

Husband Extramarital Affair: पति का Affair साबित होने पर भी नहीं बनेगा 498A का केस! मद्रास HC ने बताया- कब माना जाएगा क्रूरता का अपराध

Husband Extramarital Affair: मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- पति का विवाहेतर संबंध (Extramarital Affair) अपने आप में IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं। अभियोजन को क्रूरता के अतिरिक्त सबूत देने होंगे।

चेन्नई। पति का किसी दूसरी महिला के साथ विवाहेतर संबंध (Extramarital Affair) होना अपने आप में पत्नी के साथ क्रूरता (Cruelty) का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत मामला साबित करने के लिए सिर्फ पति के अफेयर का सबूत काफी नहीं होगा। अभियोजन पक्ष को यह भी साबित करना होगा कि पति का व्यवहार कानून में परिभाषित क्रूरता के दायरे में आता था।

क्या है पूरा मामला?

मामला साल 2010 का है। एक महिला और उसके करीब डेढ़ साल के बच्चे की मौत से जुड़े मामले में पति पर पत्नी के साथ क्रूरता करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया था। महिला के भाई ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उसके बहनोई ने उसकी बहन को दहेज (Dowry) के लिए प्रताड़ित किया था। साथ ही पति के किसी दूसरी महिला के साथ विवाहेतर संबंध होने का भी आरोप लगाया गया था।

मामले में ट्रायल कोर्ट (Trial Court) ने साल 2018 में पति को बरी कर दिया था। अदालत का कहना था कि अभियोजन पक्ष दहेज की मांग और विवाहेतर संबंध से जुड़े आरोपों को पर्याप्त सबूतों के आधार पर साबित नहीं कर सका। इसके बाद महिला के भाई ने पति की बरी के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।

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हाईकोर्ट ने अफेयर को लेकर क्या कहा?

अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुंदर मोहन ने कहा कि केवल इस वजह से विवाहेतर संबंध के आरोप को खारिज नहीं किया जा सकता कि जिस महिला के साथ कथित संबंध था, उसे गवाह के तौर पर अदालत में पेश नहीं किया गया।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि विवाहेतर संबंध साबित हो जाने के बाद भी IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का अपराध अपने आप साबित नहीं होता। इसके लिए अभियोजन पक्ष को ऐसे अतिरिक्त तथ्य और सबूत पेश करने होंगे, जिनसे यह साबित हो सके कि पति का व्यवहार कानून के तहत आने वाली क्रूरता की श्रेणी में था।

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दहेज के आरोप भी पर्याप्त साबित नहीं हुए

कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न (Dowry Harassment) के आरोपों की भी जांच की। अदालत ने पाया कि दहेज की मांग को लेकर लगाए गए आरोप पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं थे। इसके अलावा शुरुआती शिकायत में भी दहेज की मांग का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था।

हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। ऐसे में ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।

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क्या है IPC की धारा 498A?

IPC की धारा 498A पति या उसके रिश्तेदारों की ओर से महिला के साथ क्रूरता (Cruelty Against Women) किए जाने से जुड़ी थी। इसमें ऐसे जानबूझकर किए गए व्यवहार को शामिल किया गया था, जिससे महिला को गंभीर मानसिक या शारीरिक नुकसान पहुंचने की आशंका हो या उसे दहेज की गैरकानूनी मांग पूरी करने के लिए प्रताड़ित किया जाए।

इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने मूल रूप से यह स्पष्ट किया कि पति का अफेयर और 498A के तहत क्रूरता साबित होना दो अलग-अलग कानूनी बातें हैं। अफेयर का सबूत अपने आप में दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन को क्रूरता के आवश्यक तत्वों को भी ठोस साक्ष्यों से साबित करना होगा।

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