July 13, 2026

Hormuz Strait पर क्यों दावा ठोक रहा है ईरान? जानिए 39 KM चौड़े इस रास्ते का पूरा विवाद

US-Iran War: होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान-अमेरिका के बीच विवाद क्यों बढ़ गया है? जानिए 39 KM चौड़े इस समुद्री रास्ते की अहमियत, दोनों देशों के दावे और दुनिया पर असर

Hormuz Strait Dispute: अमेरिका और ईरान में एक बार फिर आर-पार की लड़ाई शुरू हो गई है। रविवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के करीब 140 जगहों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले कर दिए। बुशेहर, बंदर अब्बास, किश्म और अहवाज जैसे कई बड़े शहरों में अटैक हुए। जवाब में सोमवार को IRGC ने भी बड़ा पलटवार किया। ईरान ने दावा किया है कि उसने कुवैत और बहरीन में बने अमेरिकी मिलिट्री बेसों को निशाना बनाया है, जहां अमेरिका का सबसे एडवांस 'पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम', फ्यूल टैंक और ड्रोन कंट्रोल सेंटर को तबाह हो गए। लेकिन दोबारा शुरू हुई इस जंग के पीछे की असली वजह होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) माना जा रहा है। ईरान के बड़े नेता तो यहां तक कह रहे हैं कि यह रास्ता उनके लिए कई परमाणु बमों से भी ज्यादा कीमती है। ऐसे में सवाल उठ रहा कि आखिर 39 किलोमीटर चौड़े इस समुद्री रास्ते में ऐसा क्या है, जिसके लिए दोनों देश अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं? आइए जानते हैं...

होर्मुज स्ट्रेट क्या है, कहां है और क्यों है इतना खास?

होर्मुज स्ट्रेट समंदर का एक बहुत ही संकरा रास्ता है, जो दो देशों ईरान और ओमान के बीच में स्थित है। इसका उत्तरी हिस्सा ईरान से सटा है और दक्षिणी हिस्सा ओमान के पास है। सबसे कम चौड़ाई वाली जगह पर यह रास्ता सिर्फ 39 किलोमीटर (21 नॉटिकल मील) चौड़ा है। यह रास्ता इतना खास इसलिए है, क्योंकि दुनिया में जितना भी कच्चा तेल और गैस जहाजों के जरिए एक देश से दूसरे देश जाता है, उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी पतली सी गली से होकर गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाए, तो पूरी दुनिया में तेल को लेकर क्राइसिस मच सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर विवाद क्यों मचा है?

बहुत पहले नियम था कि किसी भी देश की सीमा से लगा समंदर सिर्फ 3 नॉटिकल मील (करीब 5.5 किलोमीटर) तक ही उस देश का माना जाता था। तब बीच का रास्ता खुला रहता था। बाद में इंटरनेशनल नियमों में बदलाव हुआ। इसके बाद ईरान ने 1959 में और ओमान ने 1972 में अपने-अपने समुद्री क्षेत्र की सीमा बढ़ाकर 12-12 नॉटिकल मील यानी करीब 22 किमी कर दी। जब दोनों देशों ने 22-22 किलोमीटर समंदर पर अपना दावा ठोक दिया, तो होर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा, जो सिर्फ 39 किलोमीटर चौड़ा है, पूरी तरह से ईरान और ओमान के पानी के अंदर आ गया। हालांकि, दुनिया का व्यापार न रुके, इसलिए जहाजों के आने-जाने के लिए बीच में एक छोटा सा सेफ रूट (ट्रांजिट लेन) बनाया गया था।

ईरान इस पर अपना दावा क्यों कर रहा है?

इस समुद्री रास्ते का उत्तरी हिस्सा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी हिस्सा ओमान के पास आता है। कई दशक पहले दोनों देशों की समुद्री सीमा काफी कम थी, लेकिन बाद में अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत दोनों ने अपनी समुद्री सीमा बढ़ा दी। इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा दोनों देशों के समुद्री क्षेत्र में आने लगा। इसी वजह से ईरान का कहना है कि इस इलाके की सुरक्षा और यहां होने वाली गतिविधियों में उसका अधिकार बनता है। हाल ही में ईरान ने एक नया नक्शा भी जारी किया, जिसमें उसने इस संकरे हिस्से पर अपना कंट्रोल दिखाया है। ईरानी नेताओं का कहना है कि वे किसी भी विदेशी सैन्य दखल को स्वीकार नहीं करेंगे।

अमेरिका क्यों नहीं मान रहा ईरान की बात?

अमेरिका का नजरिया बिल्कुल अलग है। उसका कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट किसी एक देश का नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है। इसलिए दुनिया के किसी भी कारोबारी जहाज को यहां से गुजरने से रोका नहीं जा सकता। अमेरिका का दावा है कि उसकी नौसेना और लड़ाकू विमान इस इलाके में इसलिए मौजूद हैं ताकि वैश्विक व्यापार सुरक्षित रह सके और तेल-गैस की सप्लाई प्रभावित न हो। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच इस इलाके को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

दुनिया के लिए इतना अहम क्यों है यह रास्ता?

होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइनों में गिना जाता है। हर दिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से एशिया, यूरोप और दूसरे देशों तक पहुंचती है। अगर कभी यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो सिर्फ अमेरिका और ईरान ही नहीं बल्कि भारत समेत कई देशों पर असर पड़ सकता है। तेल महंगा हो सकता है, पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और ग्लोबल सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है।

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